उत्तराखंड पत्रकार यूनियन-उत्तरांचल प्रेस क्लब की मांग पर आश्वासन

पेंशन राशि न्यूनतम 15 हजार रुपए मासिक करने की मांग

Shiny Mack Khan

CM त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने आज कहा कि राज्य के पत्रकारों की समस्याओं और पेंशन वृद्धि पर सरकार निश्चित रूप से गंभीरता के साथ सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी और उचित फैसला लेगी। उत्तराखण्ड पत्रकार यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष चेतन गुरूंग की अगुवाई में सचिवालय में पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल ने रावत से मांगों के संबंध में मुलाक़ात कर ज्ञापन दिया। उत्तरांचल प्रेस क्लब की तरफ से भी इस मांग को समर्थन दिया गया।

प्रतिनिधिमंडल ने पत्रकारों की समस्याओं से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। अन्य राज्यों में पत्रकारों के लिए की गई कल्याणकारी योजनाओं और पेंशन के बारे में जानकारी दी। उनको बताया गया कि उत्तराखंड में पत्रकारों को पेंशन की जो व्यवस्था की गई है, वह न सिर्फ बहुत कम है, बल्कि उसके कुछ प्रावधान अव्यवहारिक हैं। त्रिवेन्द्र ने आश्वासन दिया कि वह पत्रकारों की समाज के प्रति दायित्व और ज़िम्मेदारी के साथ ही उनकी चुनौतीपूर्ण कार्यों का सम्मान करते हैं। वह इस संबंध में निश्चित रूप से सकारात्मक सोच के साथ फैसला करेंगे।

इस अवसर पर यूनियन के प्रदेश महामंत्री गिरिधर शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष नवीन थलेड़ी, सदस्य जितेन्द्र अंथवाल, कुंवर राज अस्थाना के साथ ही उत्तरांचल प्रेस क्लब अध्यक्ष देवेन्द्र सती, कोषाध्यक्ष इंद्रेश कोहली भी उपस्थित थे। पत्रकार कल्याण कोष (कोरपस फंड) से पत्रकारों को पेंशन प्रदान की जाती है। 60 वर्ष अथवा उससे अधिक उम्र के पत्रकारों को निर्धारित शर्तें पूरी करने के पश्चात 5,000 रूपये की मासिक पेंशन प्रदान किए जाने का प्रावधान है।

पत्रकार की मृत्यु के पश्चात उसकी पत्नी को इसकी आधी ही राशि (2,500 रुपए) पेंशन स्वरूप दिए जाने की व्यवस्था है। इसमें यह भी प्रतिबंध लगाया गया है कि ’’ऐसे पत्रकार किसी अन्य पेंशन योजना से लाभान्वित न हों और समस्त स्रोतों से उनकी वार्षिक आय 1.5 लाख (डेढ़ लाख रूपये सालाना) से अधिक न हो।’’पत्रकारों ने इस सीमा को हटाने की मांग भी मुख्यमंत्री से की।

मुख्यमंत्री को ये भी बताया गया कि पत्रकारों को मिलने वाली पेंशन राशि में पिछले चार वर्ष के दौरान किसी तरह की वृद्धि नहीं की गई है। सभी आवश्यक वस्तुओं की कीमतें इस अवधि में डेढ़ से दो गुना तक बढ़ गई हैं। ऐसे में प्रतिदिन औसतन 166 रूपये मात्र (फैमिली पेंशन के मामले में 83 रूपये रोज) की यह पेंशन अत्यंत नाकाफी है। देश के अन्य राज्यों हरियाणा में 10,000, महाराष्ट्र में 10,000, तमिलनाडु में 10,000, झारखंड में 10,000, असम में 8,000 रुपए मासिक पेंशन प्रदान की जा रही है।

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि सबसे कम पेंशन उत्तराखंड में मिल रही है। हरियाणा की भाजपा सरकार ने प्रावधान किया हुआ है कि यदि संबंधित पत्रकार किसी अन्य राज्य सरकार अथवा समाचार संगठन से पेंशन प्राप्त कर रहा है और ऐसी पेंशन की राशि 10,000 रुपए से कम है, तो उक्त राशि को घटाते हुए वह अवशेष राशि तक की पेंशन प्राप्त करने का पात्र भी होगा।
वर्तमान में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार भी 5 लाख रुपए तक की वार्षिक आय को आयकर छूट के दायरे में ला चुकी है। ऐसे में वृद्ध पत्रकारों की पेंशन के लिए उत्तराखंड में लगाया गया सभी स्रोतों से 1.5 लाख रूपये वार्षिक आय संबंधी प्रतिबंध पूरी तरह अव्यावहारिक है।

उत्तराखण्ड पत्रकार यूनियन और उत्तरांचल प्रेस क्लब की तरफ से मुख्यमंत्री से जो मांग ज्ञापन के जरिये की गई वह इस प्रकार है।

1-वृद्ध पत्रकारों को मिलने वाली पेंशन की राशि में वृद्धि करते हुए इसे न्यूनतम 15,000 (पंद्रह हजार रूपये) रुपए किया जाए।
2- हरियाणा की भांति अन्यत्र से पेंशन प्राप्ति संबंधी प्रतिबंध राज्य में मिलने वाली पेंशन की सीमा तक हटाने और सभी स्रोतों से 1.5 लाख रूपये वार्षिक आय के प्रतिबंध को शिथिल करते हुए 5 लाख रूपये वार्षिक तक करने का कष्ट करेंगे।
3-पात्रता शर्त में इस प्रावधान को भी शामिल किया जाए कि पेंशन योजना में उत्तराखंड राज्य के स्थाई निवासी पत्रकार ही शामिल हों। साथ ही कम से कम पिछले 20 साल से राज्य में पत्रकारिता कर रहा हो।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here