फ़ौजदारी में दर्ज होंगे मुकदमे: दून-हरिद्वार में बढ़ते केसों पर गंभीर हुई सरकार

माफिया-नगर निगम-कैंट बोर्ड-पुलिस-तहसील-नेताओं की मिलीभगत से हो रहा भू-अपराध

डाकरा-गढ़ी में करोड़ों की जमीन पर कब्जे:पुलिस-सरकार-बोर्ड खामोश

Chetan Gurung

देहरादून-हरिद्वार में ज़मीनों से जुड़े अपराध लगातार बढ़ रहे। इसको काबू में करने के लिए अब इससे जुड़े लोगों के खिलाफ सीधे फ़ौजदारी में मुकदमे दर्ज किए जाएंगे। आज गढ़वाल के आयुक्त रमन रविनाथ और IGP अभिनव कुमार ने साथ बैठ के इस तरह के अपराधों और अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए कई फैसले किए।

डाकरा कैंट में संजय विहार में कैंट बोर्ड की तरफ से लगाए गए बोर्ड में लिखा था कि इसके दोनों तरफ 30-30 फुट तक कोई निर्माण नहीं होगा। आज ये बोर्ड रह गया है। दोनों तरफ अवैध कब्जे हो गए हैं। राज्य सरकार-कैंट बोर्ड दोनों सोई है।

बैठक में भूमि धोखाधड़ी से जुड़े हुए विभिन्न प्रकरणों पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ और संज्ञान लिया गया। आयुक्त ने निर्देश दिए कि अगर स्पष्ट तौर पर धोखाधड़ी और फर्जीवाड़ा प्रतीत होने वाले मामलों को पुलिस विभाग को भेज दिया जाए। इस पर आवश्यक जांच के बाद फौजदारी कानून के मुताबिक एफ़आईआर दर्ज की जाए। बैठक में ग्राम समाज और राजस्व रिकार्ड में सम्मिलित भूमि पर घपलेबाजी, अतिक्रमण एवं अवैध कब्जे के मामले भी सामने आए। रमन ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे मौके पर जाकर सर्वे और सीमांकन करें। सरकारी रिकार्ड से मिलान करने पर यदि भूमि सरकारी पाई जाती है तो तत्काल कब्जा हटाया जाए। मुनादी भी कराई जाए।

उन्होंने कृषि भूमि, अनुसूचित जनजाति की भूमि एवं वन भूमि जिसमें भूमि को गलत तरीके से अन्य श्रेणी में दर्शाकर खुर्द्धबुर्द्ध और क्रय-विक्रय किया गया हो, की भी जांच करने के निर्देश दिए। साथ ही जांच के बाद मामले को न्यायालयों में अपील में ले जाने अथवा पुलिस विभाग को प्रेषित करने की भी हिदायत दी। एक ही व्यक्ति के नाम एक से अधिक बार  भूमि आवंटित होने तथा गलत ढंग से आवंटन होने पर पत्ते को निरस्त करने की हिदायत भी दी। भूमि के फर्जीवाड़े में संलिप्त कार्मिक पर उचित प्रशासनिक व विभागीय कार्रवाई के लिए भी कहा।

विभिन्न स्थानों पर रिकार्ड में दर्ज भूमि तथा मौके पर अधिक कब्जाई गई भूमि के मामले भी कई सामने आए। ऐसे मामलों में आयुक्त ने निर्देश दिए कि मौके पर जाकर निरीक्षण कर लिया जाए। सरकारी अभिलेखों का मूल्यांकन करने पर  यदि रिकार्ड में दर्ज भूमि से अधिक कब्जा पाया जाता है तो उसको भी तत्काल प्रभाव से हटाया जाए। अतिक्रमणमुक्त भूमि को राजस्व भूमि में सम्मिलित किया जाए। उन्होंने सचिव एमडीडीए को निर्देश दिए कि  विवादित भूमि के बारे में जिलाधिकारी कार्यालय से स्पष्ट आख्या प्राप्त होने तक ऐसी भूमि पर भवन का नक्शा पास न किया जाए। ऐसी विवादित भूमि, जिससे जुड़े प्रकरण अदालत में विचाराधीन हैं, की खरीद-फरोख्त भी रोकने के निर्देश दिए।

आयुक्त ने अधिकारियों को अगली बैठक में आज के निर्देशों के अनुपालन की रिपोर्ट के साथ मौजूद होने को कहा। बैठक में जिलाधिकारी देहरादून डॉ.आशीष कुमार श्रीवास्तव, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) अरविन्द पाण्डेय, भी मौजूद थे। ताज्जुब की बात ये रही कि बैठक में गढ़ी-प्रेमनगर कैंट के अधिकारी नहीं थे, जबकि कैंट में अवैध कब्जे, अतिक्रमण और सरकारी ज़मीनों, नजूल भूमि, नाले-खालों पर कब्जों का जबर्दस्त खेल चल रहा। इसमें कैंट बोर्ड, तहसील, पुलिस, स्थानीय नेताओं की जबर्दस्त दुरभि संधि चल रही है।

पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) अशोक कुमार ने SIT से डाकरा कैंट में संजय विहार के चारों तरफ हो रहे नाले-खालों पर कब्जों, गढ़ी में टपकेश्वर मंदिर इलाके में भी जबर्दस्त अवैध कब्जों पर रिपोर्ट तलब की थी। SIT ने गढ़ी के कब्जों पर रफा-दफा वाली रिपोर्ट दी और संजय विहार कॉलोनी में हो रहे और हो चुके कब्जों का जिक्र ही रिपोर्ट में नहीं किया। संजय विहार में ज़मीनों की कीमत बहुत ऊंची है, लेकिन वहाँ नालों पर जबर्दस्त कब्जे हो चुके हैं।  

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