Home उत्तराखंड क्रिकेट:`पृथ्वी मिसाइल’ छूटी:सीएयू-बीसीसीआई-एसबीआई में हड़कंप

क्रिकेट:`पृथ्वी मिसाइल’ छूटी:सीएयू-बीसीसीआई-एसबीआई में हड़कंप

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सोसाइटी रजिस्ट्रार-कोषागार भी धमाके की गूंज से हिले:CM से भी शिकायत  

कोरोना प्रोटोकॉल तोड़ने के मामले में मुकदमा मुमकिन

स्पेशल जनरल मीटिंग पर प्रशासन के चंगुल में फंसे ओहदेदार

Chetan Gurung

देहरादून। क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड में लगता है कि शांति और कायदे-कानून के लिए गुंजाइश नहीं रह गई है। अबकी बार कोषाध्यक्ष पृथ्वी सिंह नेगी की मिसाईलनुमा चिट्ठियों ने इसके ओहदेदारों को नए संगीन आरोपों के फंदे में ले लिया है। नेगी ने बीसीसीआई-एसबीआई-सोसायटी रजिस्ट्रार और कोषागार तक पर हमला बोल उनमें खलबली मचा डाली है। पृथ्वी ने मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को भी चिट्ठी भेज के एसोसिएशन में चल रहे वित्तीय मामलों और नियुक्तियों से जुड़े बड़े खेल की कथा बताई है। चिट्ठी की इबारत पर राज्य सरकार ने भी कार्रवाई कर दी तो अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला और सचिव माहिम वर्मा के लिए दिक्कत होनी स्वाभाविक है।

अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला (बाएँ से तीसरे) और सचिव माहिम वर्मा (दाएँ से दूसरे)की कार्यशैली के खिलाफ कोषाध्यक्ष पृथ्वी सिंह नेगी (बाएँ से पहले) ने इस बार चिट्ठियों की मिसाइल छोड़ खलबली मचा दी है

मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और रजिस्ट्रार सोसायटी ऑफिस सूत्रों ने पुष्टि की कि चिट्ठी उनको मिल गई है। इस बारे में क्या कार्रवाई उनके स्तर पर की जा सकती है, इस पर विचार किया जा रहा है। नेगी से इस बारे में `News Space’ ने संपर्क किया तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि इस बारे में अध्यक्ष या फिर सचिव से ही बात करना उचित रहेगा। वह बात करने के लिए अधिकृत नहीं हैं। उन्होंने सिर्फ चिट्ठियाँ लिख के भेजने की पुष्टि की। 21 जुलाई को हुई स्पेशल जनरल मीटिंग में नेगी ने खुल के आरोप लगाए थे कि सीएयू में बहुत वित्तीय और नियुक्ति संबंधी गोलमाल हो रहे हैं।

अध्यक्ष गुनसोला पर उन्होंने आरोप लगाए थे कि बिना कोषाध्यक्ष की मंजूरी के साढ़े चार करोड़ रुपए का भुगतान खामोशी संग कर दिया गया। उन्होंने और एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष हीरा सिंह बिष्ट ने पिछले सीजन में टीमों के लिए खरीदी गई किट की गुणवत्ता और खरीद प्रक्रिया पर भी अंगुली उठाई है। बिष्ट ने कहा कि किट की खरीद में न कोई प्रक्रिया का पालन किया गया न ही उसकी गुणवत्ता को ही देखा गया। टेंडर कैसे और कब निकाले गए, इसकी भी कोई जानकारी नहीं है। 65 लाख रुपए की खरीद के बाद अब कोषाध्यक्ष पर भुगतान के लिए दबाव डाला जा रहा है।

नेगी ने चिट्ठी भेज के एसबीआई (एसोसिएशन का खाता है) मुख्य शाखा को भी लपेटे में लिया है कि उसने भुगतान की प्रक्रियाओं का पालन क्यों नहीं किया? भुगतान कैसे कर दिया? सोसायटी ऑफिस में भी पिछले दो सालों की बैलेंस शीट जमा नहीं है। सोसाइटी ऑफिस वैसे मामूली बिन्दुओं पर अड़ंगा लगाने के लिए विख्यात है। रजिस्ट्रार भूपेश तिवारी ने कहा कि इस शिकायत का परीक्षण कराया जा रहा है। ऐसा पहली दफा किसी संस्था में हुआ होगा कि भुगतानों के बारे में स्पेशल जनरल मीटिंग में फैसला और आदेश हुआ। पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा बिष्ट ने एसोसिएशन के बाई लॉज के खिलाफ बहुमत के आधार पर फैसलों की परंपरा को बेहद गलत करार दिया है।

उन्होंने कहा, `बाई लॉज असली चीज है। बहुमत के आधार पर अगर ये फैसला होता है कि मुझे गोली मार दी जाए तो क्या उसको मान लिया जाएगा’? एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष नेगी अंदरखाने हो रही गड़बड़ियों और धांधलियों पर लगातार मुखर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार उन्होंने सीएयू में चल रहे खेल की जानकारी बीसीसीआई अध्यक्ष को भी दी है। सवाल तो SGM बुलाए जाने पर भी उठ रहे हैं। एसोसिएशन के सदस्य नाम का खुलासा न करने की शर्त पर सवाल उठा रहे हैं। उनका तर्क है कि आपात कालीन हालात पर कुछ अहम बिन्दुओं को ले के SGM बुलाई जाती है। 12 बिन्दुओं पर नहीं।

एक अन्य सदस्य ने कहा कि ये फैसले पहले एपेक्स काउंसिल में होने चाहिए थे। उसका अनुमोदन AGM में किया जाता है। पिछले साल 30 सितंबर से AGM लंबित है। AGM न करा के SGM बुलाने का फैसला समझ से परे है। एक अन्य के मुताबिक CEO अमृत माथुर की नियुक्ति का अधिकार अध्यक्ष को नहीं है। फिर वह कैसे माथुर को खुद ही नियुक्त कर सकते हैं। मुख्य प्रशिक्षक वासिम जाफ़र की काबिलियत तो उनके कार्य शुरू करने के बाद पता चलेगा, लेकिन उनकी नियुक्ति पूरी तरह अवैध है। मुख्य प्रशिक्षक और अन्य की नियुक्ति करने के लिए एड्वाइजरी कमेटी होती है। उसका गठन अब जा के किया गया है।

ये सवाल भी उठाए जा रहे हैं कि जाफ़र की नियुक्ति किसने और किस आधार पर की? किस प्रकार की प्रक्रिया अपनाई गई, हाउस को बताया जाना चाहिए था। लोकपाल नियुक्त किए गए जस्टिस वीरेंद्र सिंह की नियुक्ति भी किस प्रक्रिया से हुई? क्या और नाम भी इसके लिए सामने थे? उनको किन शर्तों पर और कितने वेतन पर नियुक्त किया गया, इसकी जानकारी हाउस को दी जानी चाहिए। जो नियुक्तियाँ CEO को करनी है, वह सारी नियुक्तियाँ सचिव ने कैसे कर दीं? कायदे-कानून तोड़ने की सीएयू ओहदेदारों की आदत इस बार भारी पड़ती दिखाई दे रही है।

SGM कोरोना प्रोटोकॉल और मोदी सरकार के प्रतिबंध के बावजूद राजधानी में रायपुर के करीब तुनवाला के शाकुंभरी गार्डन में कराए जाने पर मुकदमा दर्ज होने के आसार बढ़ गए हैं। वेडिंग पॉइंट स्वामी भी इसके चंगुल में आ सकता है। एडीएम (प्रशासन) अरविंद पांडे ने कहा कि सीएयू को बैठक आयोजित करने पर जो कारण बताओ नोटिस भेजा गया है, वह रिसीव हो चुका है। पांडे के मुताबिक नोटिस के जवाब के बिना पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। अगर दोषी पाए जाते हैं तो मुकदमे का प्रावधान भी है।

बैठक में सदस्यों के साथ ही उनके समर्थकों, स्टाफ, कैटरिंग स्टाफ और अन्य को मिला के 100 के करीब लोग मौजूद थे। भारत सरकार ने शादी सरीखे आयोजन के लिए भी दोनों पक्षों को मिला के अधिकतम 50 लोगों की उपस्थिति को मंजूरी दी है। इस प्रतिबंध को तोड़ने पर मुकदमे का प्रावधान है।   

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