Home उत्तराखंड ओमप्रकाश नौकरशाही के नए `Boss’:कल शाम 5 बजे लेंगे चार्ज

ओमप्रकाश नौकरशाही के नए `Boss’:कल शाम 5 बजे लेंगे चार्ज

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CS उत्पल ने कल ही `News Space’ को दे दिया था उनके नाम का ईशारा

Chetan Gurung

ओमप्रकाश उत्तराखंड नौकरशाही के नए `BOSS’ होंगे। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने आज उनके नाम की फाइल पर दस्तखत करने के साथ ही आदेश भी जारी कर दिए। `News Space’ से बातचीत में आउट गोइंग CS उत्पल कुमार सिंह ने कल ही OP के नाम का ईशारा कर दिया था। 1987 बैच के ओमप्रकाश ने खुद के मुख्य सचिव नियुक्त किए जाने पर `News Space’ को बताया कि वह कल शाम 5 बजे नया कार्यभार ग्रहण करेंगे।

नए मुख्य सचिव को ले के चल रहे असमंजस के माहौल में उत्पल से कल `News Space’ ने पूछा था कि उनके उत्तराधिकारी कौन होने जा रहे हैं? उन्होंने नाम लिए बगैर कहा था कि राज्य में उपलब्ध सबसे वरिष्ठ नौकरशाह को ही CS बनाने की परंपरा रही है। ओमप्रकाश से वरिष्ठ राज्य में कोई नहीं हैं। ओमप्रकाश ने संपर्क करने पर CM त्रिवेन्द्र सिंह रावत का आभार जताया तथा कहा कि वह कल मुख्य सचिव का कार्यभार ग्रहण करेंगे। उत्पल के उत्तराधिकारी के नाम का खुलासा होने में देरी के चलते ये कयास लगाए जाने लगे थे कि क्या CS की कुर्सी की कोई दौड़ भी होने वाली है?

मुख्य सचिव नियुक्त होने के बाद ओमप्रकाश ने मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से शिष्टाचार मुलाक़ात कर उनका आभार प्रकट किया।

दिल्ली में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात अनूप वधावन को ले के संभावना भी जताई जाने लगी थी। ओमप्रकाश मुख्य सचिव बनेंगे, ये अंदाज वैसे सभी को बहुत पहले से था। वह उत्तराखंड बनने के बाद से ही राज्य में अलग-अलग पदों पर सेवा करते रहे हैं। राज्य गठन के बाद से पूर्ववर्ती सुभाष कुमार और एस रामास्वामी की ही तरह कभी केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर नहीं गए। उनके नाम के वजनदार होने की सबसे बड़ी वजह खुद मुख्यमन्त्री थे। ओमप्रकाश को उनका सबसे करीबी और विश्वासपात्र नौकरशाह का दर्जा शुरू से हासिल है।

दोनों के बीच का ये रिश्ता उत्तराखंड बनने के बाद से ही बना हुआ है। जब त्रिवेन्द्र विधायक थे। ओमप्रकाश देहरादून के DM हुआ करते थे। ओमप्रकाश को ले के भले तमाम विवाद सोशल मीडिया से ले के प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया में उछले, लेकिन त्रिवेन्द्र का भरोसा और यकीन उनको ले कर कभी कम नहीं हुआ। ओमप्रकाश को अगर किसी से चुनौती मिल सकती थी तो सिर्फ वधावन से। उनके उत्तराखंड आने की इच्छा न होने से फिर कोई प्रतिद्वंद्वी उनके सामने था ही नहीं।

`News Space’ ने वधावन से जब उत्तराखंड लौटने की संभावनाओं पर पूछा तो उन्होंने इस दिशा में कोई इच्छा प्रकट नहीं की थी। ओमप्रकाश को उत्तराखंड काँग्रेस के अध्यक्ष प्रीतम सिंह के भी गुड बुक्स में शुमार किया जाता है। राधा रतूड़ी के प्रशंसक भी काफी हैं। कुछ लोग उनके नाम को भी मुख्य सचिव के तौर पर उछाल रहे थे। वरिष्ठता के लिहाज से भी राधा का OP के बाद मुख्य सचिव बनना तय है। ऐसे में वह किसी भी तरह की जल्दबाज़ी में शायद ही हों। वह एक किस्म से आउट ऑफ टर्न CS बनने की इच्छुक भी कभी दिखाई नहीं दी हैं।

उत्तराखंड में बहुत कम मौके ऐसे आए हैं, जब वरिष्ठता को दरकिनार कर कनिष्ठ को मुख्य सचिव बनाया गया। सिर्फ सुभाष कुमार ही ऐसे नौकरशाह रहे, जो वरिष्ठ के राज्य में ही उपलब्ध होने के बावजूद मुख्य सचिव बनाए गए। उनके ही बैच में उनसे आगे अजय जोशी को दरकिनार कर उनको नौकरशाही का नया मुखिया बनाया गया था। मुख्यमन्त्री किसी भी सूरत में ओमप्रकाश का पत्ता काट के किसी और को मुख्य सचिव बनाएँगे, इसकी गुंजाइश तक नहीं दिखाई दे रही थी।

जो ताजिंदगी खासमखास रहे हों। जिनके कारण विवादों तक से परहेज न किया हो। उस अफसर के सबसे बड़े ख्वाब को पूरा होने वह नहीं देंगे, ऐसा सोचना भी बेमानी था। अगर राधा या किसी और कनिष्ठ को मुख्य सचिव बनाया जाता तो ओमप्रकाश को फिर सरकार के सिस्टम से भी बाहर करना पड़ता। जूनियर के मुख्य सचिव होने पर सीनियर को उनके नीचे शासन तंत्र में कभी नहीं रखा जाता है। मुख्य सचिव नियुक्त होने के बाद ओमप्रकाश ने मुख्यमंत्री से शिष्टाचार भेंट की तथा उनका आभार प्रकट किया।

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