4 कम 3000 हुआ कोरोना पॉज़िटिव एक्टिव केस टोटल

खुद ही संभलिए: बाद में सरकार-डॉक्टर को दोष न दें

Chetan Gurung

उत्तराखंड में आज देर शाम तक 264 पॉज़िटिव केस सामने आए। इसके साथ ही प्रदेश में एक्टिव केसों का टोटल 2996 हो चुका था। 7447 जैसे अंकों में कुल पॉज़िटिव केसों का योग पहुँच गया है। कोरोना की रफ्तार कभी-कभार ही धीमी पड़ रही। आए दिन वह फेरारी कार की तरह फर्राटा भर रही। साफ है। सरकार-डॉक्टर के भरोसे ही न रहे। बेहतर है कि खुद ही सतर्कता बरतें। याद रखें कि सिर्फ 60 साल से ऊपर वाले ही कोरोना के शिकार नहीं हो रहे। आज जिन 3 कोरोना पॉज़िटिव की मौत हुई, वे सभी 50 साल से कम वय वाले थे।

कोरोना से मौत की तादाद 83 हो चुकी है। फिक्र की बात ये भी है कि रिकवरी रेट भी कम हो रहा है। जितनी तादाद में पॉज़िटिव केस सामने आ रहे हैं, उस अनुपात में ठीक होने वालों की तादाद बहुत कम है। आज ढाई सौ से ज्यादा पॉज़िटिव निकले तो 162 लोग ही ठीक हुए। कुल 4330 लोग अभी तक ठीक हुए हैं। 8106 सैंपल रिपोर्ट अभी लंबित है। 23.80 के साथ डबलिंग रेट भी बहुत खराब चल रहा है।

आज बागेश्वर (31) और उत्तरकाशी (17) में भी काफी कोरोना केस सामने आए। ये जिले इस महामारी को अमूमन थामते रहे हैं। सबसे ज्यादा 95 केस आज नैनीताल में निकले। देहरादून में अपेक्षाकृत कुछ कम 27 केस सामने आए। Containment Zone का रेकॉर्ड (301) बनाने वाले हरिद्वार में फिर 42 केस निकले। सरकार की तमाम कोशिशों और डॉक्टरों-पैरा मेडिकल स्टाफ की कोशिशों के बावजूद कोरोना मरीज बढ़ते ही जा रहे हैं।

केंद्र और राज्य सरकारों ने भी थक-हार के लॉक डाउन नाम के अस्त्र को त्याग दिया है। सरहदों को खोल दिया है। नाम के प्रतिबंध ही रह गए हैं। आने वाले दिनों में बचे-खुचे भी खत्म कर दिए जाएंगे। ऐसे में केस और बढ़ेंगे। इसको कोई नहीं रोक सकता है। चिकित्सा और स्वास्थ्य सचिव अमित सिंह नेगी ने `News Space’ से बातचीत में माना कि प्रवासियों और बाहरी लोगों की हजारों की तादाद में हो रही आमद बढ़ते कोरोना केसों की इकलौती वजह है। इसको थामना बहुत मुश्किल है’।

इसका मतलब ये ही हुआ कि लोगों को कोरोना से लड़ने के लिए खुद भी सुदर्शन चक्र उठाना होगा। सरकार के भरोसे अधिक बैठना खुद के पाँव पर कुल्हाड़ी मारना जैसा होगा। खुद ही जितनी सतर्कता बरतेंगे उतना कोरोना दूर रहेगा। डॉक्टर कोरोना वार्ड या ICU में जाने से बच रहे हैं। ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं कि डॉक्टर कोरोना मरीजों को देखने नहीं आते हैं। सिर्फ स्टाफ नर्स ही देखभाल और ईलाज में जुटी हुई हैं। WHO की इस गाइड लाइन के भरोसे भी नहीं बैठा जा सकता कि 10 साल के छोटे बच्चों और 60 साल से अधिक उम्र वालों के लिए Covid-19 वाइरस अधिक घातक है।

आज 3 कोरोना मरीजों ने अंतिम सांस ली और तीनों 50 साल से कम उम्र के थे। 42 साल के एक मरीज ने Aiims ऋषिकेश में और 42 साल के ही एक अन्य मरीज ने दून अस्पताल में दम तोड़ा। सुशीला तिवारी अस्पताल, हल्द्वानी में 49 साल के मरीज ने जिंदगी का सफर पूरा किया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here