Home उत्तराखंड Big Q:क्लीन चिट के बाद IAS चंद्रेश के खिलाफ SIT जांच बेमानी!

Big Q:क्लीन चिट के बाद IAS चंद्रेश के खिलाफ SIT जांच बेमानी!

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बेकसूर थे तो फँसाने वालों पर कार्रवाई होगी?

सरकार के रुख से सचिव डॉ. पंकज को भी मिलेगी राहत!

Chetan Gurung

IAS अफसर चंद्रेश यादव को सरकार की क्लीन चिट और प्रोन्नति तकरीबन साथ-साथ मिलने से उनके खिलाफ NH-74 घोटाले की SIT जांच बेमानी होती नजर आ रही है। सरकार की नजरों में चंद्रेश को बेदाग पाया गया है। ऐसे में पुलिस जांच की अहमियत कितनी रह जाएगी, कहा नहीं जा सकता है। ये संभावना भी जताई जा रही है कि चंद्रेश के प्रति सरकार के रुख का सकारात्मक-मनोवैज्ञानिक फायदा प्रभारी सचिव डॉ. पंकज पांडे को भी मिल सकता है। राष्ट्रीय राजमार्ग घोटाले में उनको और चंद्रेश को एक साथ मुअत्तल किया गया था। बाद में दोनों बहाल कर दिए गए थे।

चंद्रेश यादव को सरकार की क्लीन चिट रिपोर्ट

सरकार ने चंद्रेश-पंकज के खिलाफ कार्रवाई SIT जांच और आरोपों के मद्देनजर की थी। दोनों के जवाबों और प्रारम्भिक परीक्षण के बाद सरकार ने उनको बहाल करते हुए कामकाज सौंप दिया था। पंकज तो प्रभारी हो गए थे। चंद्रेश की प्रोन्नति रोक दी गई थी। इस बीच सरकार ने अपने स्तर पर भी दोनों के खिलाफ जांच बिठा दी थी। सचिव शैलेष बगौली को चंद्रेश की और प्रमुख सचिव आनंदबर्द्धन को पंकज की जांच सौंपी गई थी।

शासन सूत्रों के मुताबिक बगौली की रिपोर्ट हालांकि काफी सख्त किस्म की थी। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में चंद्रेश की कई खामियों का जिक्र किया था। इस पर शासन की तरफ से चंद्रेश से सफाई मांगी गई थी। चंद्रेश ने जो जवाब दिए, उससे शासन संतुष्ट हो गया। आनंदबर्द्धन की पंकज पर रिपोर्ट आनी है। चंद्रेश के मामले में सरकार के रुख से दो बातें साफ हुई। या तो सरकार ने अति उत्साह और मीडिया के दबाव में आ के गलत कार्रवाई की। या फिर उसने चंद्रेश को जान बूझ के राहत दी। दोनों में एक भी सही है तो सरकार पर अंगुली उठनी स्वाभाविक है।

माना चंद्रेश पर आरोप निराधार थे। या फिर गंभीर किस्म के नहीं थे। तो ये सवाल क्यों न उठे कि फिर उनके खिलाफ की गई निलंबन और प्रोन्नति डेढ़ साल तक रोकने की कार्रवाई के लिए सरकार कैसे जिम्मेदार नहीं है? ये भी सवाल उठेगा कि इसी तरह का फैसला पंकज के मामले में भी आता है तो क्या होगा? SIT जांच में दोनों को फँसाने वाले जो भी हों, उनके खिलाफ सरकार कार्रवाई करेगी? इतना तो जरूर है कि सरकार का रुख बिना ठोस सुबूतों के नौकरशाहों को दंडित करने का अब नहीं दिख रहा।

संभावना यही है कि पंकज के साथ भी वाकई जल्दबाज़ी में कार्रवाई हुई होगी और ठोस सुबूत नहीं होंगे तो उनको भी क्लीन चिट तय है। सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक चंद्रेश को सिर्फ ज़मीनों के बाजार मूल्य निर्धारण में अनदेखी का जिम्मेदार पाया गया। इसके लिए उनको सचेत भर किया गया है। ये भी रिपोर्ट में साफ लिखा गया है कि बाकी जो भी आरोप चंद्रेश पर लगाए गए थे, वे सिद्ध नहीं होते हैं। `News Space’ के पास सरकार की क्लीन चिट रिपोर्ट की कॉपी है।

इसका मतलब ये कि सरकार ने कम से कम चंद्रेश के तो डेढ़ साल बर्बाद कर दिए। उनको तनाव और असम्मानजनक जिंदगी जीने के लिए मजबूर किया। इसका हिसाब भी उस शख्स से जरूर लिया जाना चाहिए, जो इसके लिए जिम्मेदार था। SIT जांच अब किस करवट लेगी, इस पर नजर रखनी होगी।

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