Home उत्तराखंड अजब हाल:आबकारी इंस्पेक्टर प्रमोशन:`CMO’ ने फिर रखे `टेस्ट’

अजब हाल:आबकारी इंस्पेक्टर प्रमोशन:`CMO’ ने फिर रखे `टेस्ट’

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जिम्मा `Physical Test’ का मिला, जिद `Medical Test’ की

उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की भी गाइड लाइंस दरकिनार

स्वास्थ्य सचिव को भी गुमराह करने की कोशिश!

Chetan Gurung

आबकारी महकमे में इंस्पेक्टर पद पर प्रमोशन में देहरादून के CMO डॉ.BC रमोला मानकों के खिलाफ अभ्यर्थियों के मेडिकल टेस्ट कराने पर अड़े हुए हैं। टेस्ट भी अपने दफ्तर में नहीं करा रहे। नई तारीख 4 अगस्त को Coronation और गांधी शताब्दी नेत्र अस्पताल में करा रहे हैं। इसमें खास बात क्या है? दरअसल, उत्तराखंड लोक सेवा आयोग इसकी मंजूरी नहीं देता है।

जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक ने आबकारी महकमे को चिट्ठी भेज के नई तारीख बताने के साथ ही अस्पतालों में सभी अभ्यर्थियों को भेजने के लिए कहा है। प्रोन्नति सब इंस्पेक्टर और लिपिक वर्ग से 16 पदों पर होनी है। आबकारी महकमे के अफसरों के मुताबिक टेस्ट 4 जुलाई को हो चुके हैं। उसके नतीजे भेजने के लिए CMO को कहा गया है। CMO नतीजे देने के बजाए पहले तो ले के बैठे रहे। फिर जब ज़ोर डाला गया तो कहा गया है कि मेडिकल और फिजिकल टेस्ट फिर होंगे।

आबकारी महकमे का कहना है कि टेस्ट और प्रोन्नति उनकी है। CMO को सिर्फ टेस्ट कराने हैं और नतीजे देने हैं। ये भी इसलिए कि उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने ये व्यवस्था की है। आबकारी महकमे के मानकों को बदलने के बाबत कहने के लिए CMO अधिकृत ही नहीं हैं। न ही उनका इससे कोई मतलब है। फिजिकल टेस्ट में पुरुष अभ्यर्थियों के सीने की माप, उनका कद और वजन देखा जाना होता है। फिजीशियन, नेत्र-कान और हड्डी रोग विशेषज्ञों से रिपोर्ट ली जानी है। CMO का काम सिर्फ टेस्ट कराना है।

नतीजे न भेजने पर आबकारी महकमे ने 15 जुलाई को सीएमओ को चिट्ठी भेज के दो दिनों में ही नतीजे भेजने को कहा था। सीएमओ ने नतीजे तो भेजे नहीं बल्कि, फिर 4 अगस्त को मेडिकल और फिजिकल टेस्ट रख दिया है। साथ ही अभ्यर्थियों को कोरोनेशन तथा गांधी शताब्दी नेत्र अस्पताल में भेजने को कहा है। आबकारी महकमे का कहना है कि अव्वल तो ये टेस्ट अब हो नहीं सकते हैं। होने की सूरत में जो लोग इसमें रह जाएंगे, वे अदालत चले जाएंगे। उनके पास इस टेस्ट के विधि सम्मान न होने का तर्क होगा।

लोक सेवा आयोग के मुताबिक फिजिकल टेस्ट सिर्फ सीएमओ के यहाँ ही हो सकते हैं। आज से पहले सभी टेस्ट वही हुए हैं। इसके अलावा कहीं और टेस्ट होने पर इसके नतीजों को अदालत में चुनौती दी जा सकती है। ऐसी सूरत में प्रमोशन की प्रक्रिया लटक सकती है। सीएमओ के रुख और जिद को ले के आबकारी महकमे में हैरानी जताई जा रही है। स्वास्थ्य सचिव अमित सिंह नेगी ने `News Space’ से इस बारे में कहा कि वह आबकारी महकमे की चिट्ठियों का परीक्षण करा रहे हैं’।

माना जा रहा है कि इस टेस्ट के मामले में स्वास्थ्य सचिव को भी गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। ये भी माना जा रहा ही कि आबकारी महकमे के जो अभ्यर्थी पहले टेस्ट में सफल नहीं हो पाए, वे ही टेस्ट को दुबारा कराने की कोशिश में जुटे हुए हैं। वे किसी तरह अब फिजिकल के स्थान पर मेडिकल टेस्ट कराने की कोशिश कर रहे हैं।

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