खेल-खिलाड़ियों के लिए `सेस’-मेडलिस्ट को Direct नियुक्ति क्रांतिकारी फैसला

खेल मंत्री-सचिव को सरकार का सहयोग मिला तो हो जाएगा चमत्कारिक बदलाव

Chetan Gurung

उत्तराखंड में नई खेल नीति की कसरत अंतिम दौर में है। आज उत्तराखंड ओलिम्पिक संघ के साथ खेल मंत्री अरविंद पांडे और खेल सचिव बृजेश संत बैठे। नीति के ड्राफ्ट का प्रस्तुतीकरण हुआ। दोनों ने संघ के लोगों से राय मांगी। ड्राफ्ट में कुछ कमियाँ दिखती हैं, लेकिन आम तौर पर ये शानदार बना है। खेल-खिलाड़ियों के भले के लिए 1 फीसदी `सेस’ और ओलिम्पिक-वर्ल्ड-एशियन गेम्स के Gold-Silver-Bronze मेडल विजेताओं को सीधे सरकारी नौकरी का प्रस्ताव क्रांतिकारी है। सरकार (मंत्रिमंडल) का सहयोग मिल गया तो ये नीति शायद खेलों को उस ऊंचाई तक उत्तराखंड में ले जाए, जहां उसको होना चाहिए।

सचिवालय में संघ के महासचिव DK Singh और खेलों की दुनिया के पुराने खुर्राट लोगों मुखर्जी निर्वाण-गुरचरण सिंह-सतीश शर्मा-सुभाष राणा-महेश जोशी के साथ कई अन्य ने विश्वकर्मा भवन के वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली सभागार में अपने अनुभव के आधार पर ड्राफ्ट में शामिल करने के लिए सुझाव दिए। अच्छी बात ये रही कि आधे से अधिक सुझावों पर खेल मंत्री-सचिव ने सहमति जताई। उनको ड्राफ्ट में शामिल करने के निर्देश भी जारी किए।

खेल विभाग के ड्राफ्ट में कई प्रस्ताव ऐसे हैं, जिसके लिए मोटा बजट चाहिए। मसलन, खेलों की बुनियादी सुविधाएं निचले स्तर तक तैयार करने, खेल संघों को अनुदान में इजाफा, अवार्ड राशि बढ़ाया जाना, प्राइवेट एकेडमी को सरकारी आर्थिक अनुदान दिया जाना। ड्राफ्ट में स्कूली स्तर पर खेलों को विषय के तौर पर शामिल करने और खेल पत्रकारों को खिलाड़ियों की तरह अवार्ड हर साल दे के खेल पत्रकारिता को भी प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव भी शामिल है। इस बजट की मांग पूरी करने के लिए प्रस्तावित खेल नीति में आबकारी विभाग के राजस्व में 1 फीसदी `सेस’ लगाने का प्रस्ताव शामिल किया गया है।

इस बात पर भी खेल मंत्री सहमत हुए कि टीमों को रेल से जाने के लिए जाने-आने के लिए टिकट में छूट के लिए DRM ऑफिस मुरादाबाद जाने की बाध्यता खत्म होनी चाहिए। इसके बजाए देहरादून (गढ़वाल-हरिद्वार के खिलाड़ियों के लिए) और काठगोदाम (कुमायूं के खिलाड़ियों के लिए) में रेल विभाग से इस सुविधा के लिए दफ्तर खुलवाने की कोशिश की जाए। ये राय भी सामने आई कि राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए राज्य स्तर की प्रतियोगिता या शिविर के लिए आने-जाने में बसों का इस्तेमाल होता है, इसलिए खिलाड़ियों को बस के सफर में टिकट की छूट दी जाए।

वन विभाग के पूर्व चीफ RBS रावत ने खेलों के विकास के लिए विशेष निधि की स्थापना पर बल देते हुए कहा कि इसके लिए ONGC-ऊर्जा निगम-UJVNL-Siidcul से आर्थिक अनुदान हासिल किया जा सकता है। राजेंद्र सिंह तोमर ने संघों को सरकारी अनुदान डेढ़ लाख रुपए दिया जाना बहुत कम बताया और इसमें इजाफे की दरकार जताई। आखिरी में DK ने अपने सुझाव में कहा कि खेल नीति का अमल ढंग से हो, इस पर खास तौर से ध्यान देना होगा। खेल मंत्री पांडे ने कहा कि सरकार की मंशा देश की सर्वश्रेष्ठ खेल नीति बना के खेल-खिलाड़ियों के विकास की है।

उन्होंने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जाने वाली टीम को पहले ही ब्रांडेड-स्तरीय किट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। ओलिम्पिक-एशियाई खेल-कॉमनवेल्थ गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुने गए खिलाड़ी को पुरस्कार राशि का एक तिहाई पहले ही दे के तैयारियों में मदद करने पर भी मंत्री ने सहमति जताई। इन खेलों में मेडल विजेताओं को सीधे सरकारी नौकरी देने के प्रस्ताव को भी ड्राफ्ट में शामिल किया गया है। खेल सचिव संत ने ओलिम्पिक संघ को शुक्रवार तक और भी जरूरी सुझाव देने के लिए कहा। इसके बाद ड्राफ्ट को मंत्रिमंडल की बैठक में पेश कर दिया जाएगा।

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