Home उत्तराखंड IAS बनने की जंग:CM दरबार से भी ना-उम्मीद लौटे Direct-Promotee PCS

IAS बनने की जंग:CM दरबार से भी ना-उम्मीद लौटे Direct-Promotee PCS

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Direct PCS अवमानना का मामला SC में डालने के फेर में

शासन के लुंज-पुंज रुख से दोनों ही किस्म के छोटे नौकरशाह नाखुश

Chetan Gurung

IAS बनने को ले के चल रही जंग में उतरे Direct और Promotee PCS कार्मिक महकमे के रुख से असंतुष्ट होने के बाद CM दरबार की दहलीज पर गुहार करने पहुंचे। दोनों को ही ना-उम्मीद हो के लौटना पड़ा। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने दोनों किस्म के छोटे नौकरशाहों से अपनी गुजारिश और केस शासन को लिख के देने पर विचार करने का आश्वासन दिया। इस मामले में शासन के लुंज-पुंज रुख से नाराज Direct PCS अवमानना का मामला Supreme Court में डालने के मूड में दिखाई दे रहे हैं।

CM Trivendra Singh Rawat and CS OmPrakash

`News Space’ ने IAS में चयन को ले के दोनों ही पक्षों के असंतोष और मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। इसके बाद शासन भी जाग उठा। मुख्य सचिव ओमप्रकाश-ACS (कार्मिक) राधा रतूड़ी के साथ Direct PCS अफसरों के प्रतिनिधिमंडल ने बुलाए जाने पर इस मुद्दे पर मुलाक़ात की। NT कैडर से आए Promotee PCS की भी ऐसी ही बैठक इस मुद्दे पर ACS राधा के साथ हुई। हालांकि, दोनों ही पक्ष शासन के रुख से संतुष्ट नहीं हुए।

Direct और Promotee अफसरों को शक है कि शासन उनके साथ इंसाफ नहीं कर रहा। इसके बजाए दूसरे पक्ष के प्रति नरम और सकारात्मक-सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपना रहा है। Direct वालों की CS से इस मामले में असंतोष जाहिर हो रहा है कि वह प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता के दौरान चुन-चुन के उनके मुद्दों को गलत साबित करने की कोशिश कर रहे थे। शासन का रुख ऐसा लग रहा है कि वह इस मसले को हल करने के बजाए लटकाना चाहता है। Promotee अफसरों को इस बात पर एतराज है कि CS ने उनको मिलने का वक्त ही नहीं दिया। ACS के पास भेज दिया।

मामला गर्मी पकड़ने के बाद मुख्यमंत्री दरबार से दोनों को बुलावा आया। CM ने दोनों को सुना। दोनों पक्षों को इस बात पर निराशा हुई कि उन्होंने भी कोई ठोस कार्रवाई के निर्देश कार्मिक महकमे को नहीं दिए। मामला सुनने के बाद उन्होंने सिर्फ ये कहा कि वे अपना प्रत्यावेदन विधिवत लिख के दें तो उस पर विचार गंभीरता पूर्वक किया जाएगा। इसके बाद कार्मिक विभाग ने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग को पत्र भेज के उन 5 PCS (Direct) अफसरों के नाम बताने को कहा है, जिनका चयन पहले अध्याचन में भेजे गए 15 पदों के विपरीत हुआ है।

इन 5 नामों को ही खुद से पहले IAS न बनाने की मांग Promotee PCS कर रहे हैं। उनका तर्क है कि नियमावली के मुताबिक अध्याचन के विरुद्ध चयन वालों को वरिष्ठता सूची में उनसे पीछे रखा जाना चाहिए। इस पर Direct PCS कैडर भी तकरीबन सहमत हैं, लेकिन सरकार की तरफ से IAS में चयन को ले के एक इंच भी प्रगति न होने से वे बेचैन-नाराज हैं। उनके मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने जब उनके हक में फैसला दे दिया है तो फिर IAS में चयन की प्रक्रिया 7 महीने से लटकाया जाना अनुचित है।

इन Direct PCS अफसरों के मुताबिक सरकार का रुख अगर इसी किस्म का और लटकाने वाला रहा तो उनको मजबूरन शासन के खिलाफ Supreme Court की शरण ले के अवमानना का मामला दायर करना पड़ेगा। सरकार को जिन 5 अफसरों को IAS के लिए रोकना है, रोके। अन्य को तो न लटकाए। जो सूची शासन आयोग से मांग रहा है, वह तो कार्मिक महकमे में उपलब्ध है। उसने ही तो आयोग को सूची भेजी है। उनका ये भी तर्क है कि अगर अध्याचन के विरुद्ध चयन को मुद्दा बनाया जाता है तो फिर NT कैडर में भी 6 ही अपने कैडर की वरिष्ठता सूची में ऊपर आते हैं।

उनका दावा है कि बाकी 10 का चयन अध्याचन के पदों के विरुद्ध किया गया है। उनका नंबर तब साल 2012 में जा के आएगा। अभी सिर्फ 4 लोगों का चयन ही IAS में हो पाएगा। बहरहाल, Supreme Court के फैसले पर अमल को ले के सरकार और कितना वक्त लेती है और दोनों ही किस्म के छोटे नौकरशाहों का आपसी विवाद किस सूरत तक जाता है, ये देखना बेहद अहम-दिलचस्प होने वाला है।  

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