क्या युवा-क्या बुजुर्ग-सभी समा रहे काल के मुख में:फिर शाम 7 बजे ही Medical Bulletin जारी

अस्पतालों में मरीजों को जगह नहीं:कोरोना टेस्ट के लिए नहीं आ रहा नंबर:हालात बेकाबू

Chetan Gurung

कोरोना जलजला ने देवभूमि पर एक बार फिर भीषण कहर बरपाते हुए अमंगल कर दिया। शाम 7 बजे ही मेडिकल बुलेटिन जारी होने के बावजूद 1391 पॉज़िटिव केस हो चुके थे। राजधानी एक्सप्रेस (देहरादून) इस कदर रफ्तार से दौड़ रही कि एक बार फिर 421 केसों के साथ शीर्ष पर रही। क्या युवा और क्या बुजुर्ग, महामारी कुछ नहीं देख रही। आज फिर 9 को वह काल के मुख में ले गया। हालात इस कदर बेकाबू दिख रहे कि अस्पतालों में मरीजों के ईलाज के लिए जगह या उनको देखने की व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। प्राइवेट लैब में अगर कोविड टेस्ट कराने जाओ तो पैसे देने के बावजूद नंबर नहीं आ रहा है।

देहरादून ने 8 हजार (8391) और हरिद्वार 7 हजार (7180) की बाधा पार कर ली। हरिद्वार में 219, उधम सिंह नगर में 318 और नैनीताल में 226 केस सामने आए। इस तरह 80 फीसदी कोरोना केस इन चार जिलों की ही देन साबित हो रही है। अल्मोड़ा-बागेश्वर को ऐसे दौर में भी आज एक भी केस देर शाम तक न आने देने के लिए बधाई दी जा सकती है। 34407 पॉज़िटिव केस अब तक उत्तराखंड में हो चुके हैं।

23085 मरीज ही अब तक ठीक हुए हैं। अब ये परंपरा बन गई है कि जितने लोग ठीक हो रहे हैं, उससे ज्यादा मरीज सामने आए जा रहे हैं। मंगलवार को 1008 लोग ही ठीक हो सके। डबलिंग रेट 21.44 दिन हो गए हैं। 438 मौतें राज्य में अब तक हो गई हैं। 20 साल से ले के 85 साल तक की उम्र के कोरोना मरीजों के आज प्राण पखेरू उड़ गए। सबसे ज्यादा 4 लोगों ने AIIMS ऋषिकेश में दम तोड़े।

हालात सरकार के काबू से बाहर नजर आने लगे हैं। UNLOCK-4 केंद्र सरकार ने ऐसा लागू किया कि देवभूमि के लिए ये अभिशाप बन गया है। त्रिवेन्द्र सरकार की तमाम कोशिशों को ये पलीता लगा रहा है। कोविड-19 अस्पताल दून मेडिकल कॉलेज में न तो किसी नए मरीज को देखने के लिए डॉक्टर राजी हैं न ही अब वहाँ जगह ही भर्ती के लिए रह गई है। इसके चलते गरीब-गरबतियों के लिए कोरोना के लक्षण दिखाई देने और तबीयत खराब होने के बावजूद जानते-बूझते मौत के मुंह में जाने के सिवाय कोई चारा नहीं दिखाई दे रहा है।

उनके पास न टेस्ट कराने के पैसे हैं न ही इतना महंगा ईलाज कराने की हैसियत ही उनकी है। ऐसे कई मरीज `News Space’ के पास आए, जिनको दून अस्पताल से बिना टेस्ट के लौटा दिया गया। उनको तबीयत खराब होने के बावजूद भर्ती नहीं किया गया। जेब में पैसा है भी तो प्राइवेट लैब में कोरोना के बुरी तरह फैल जाने के कारण सहमे लोग RT-PCR टेस्ट कराने लाइन में लगे हैं। वहाँ नंबर अगले दिन आ रहा है। सरकार टेस्ट तक कराने की दशा में नहीं दिखाई दे रही है।

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