कई नामी डॉक्टर्स भी Infected:CMI से सम्बद्ध CIMS के Head डॉ.जादौन की कोरोना से मौत:

डॉ.मंजु कालरा गंभीर:डॉ.अर्चना लूथरा-डॉ.अजय खन्ना भी Infected:प्रशासन के रवैये से कोरोना वारियर्स में नाराजगी

जान जोखिम में डाल के कर रहे Covid test:डॉ.आहूजा

Chetan Gurung

दुनिया का दिमाग सुन्न कर देने और मौत-संकट का दूसरा नाम बन गए Covid-19 के खिलाफ जंग में लोगों की जिंदगी बचाते-बचाते सिर्फ राजधानी के ही तकरीबन 150 डॉक्टर्स इस महामारी के शिकार हो गए हैं। इनमें कई तो एकदम युवा महिला डॉक्टर्स शामिल हैं। CMI से सम्बद्ध नर्सिंग कॉलेज CIMS के निदेशक डॉ. जी सिंह जादौन की भी कोरोना से मौत हो गई। इसके बाद डॉक्टरों में खौफ और हड़कंप का आलम है। दूसरी तरफ प्राइवेट लैब के प्रति सरकार और प्रशासन के रुख से डॉक्टरों में बेहद नाराजगी छाई हुई है।

जिन डॉक्टरों को कोरोना ने जकड़ लिया है, उनमें कई नामी पुरुष और महिला डॉक्टर शामिल हैं। इनमें सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेज-अस्पतालों के डॉक्टर भी शुमार हैं। डॉ. अजय खन्ना और डॉ. अर्चना लूथरा भी कोरोना पॉज़िटिव हैं। इनको सारा शहर जानता है। 23 साल की आरुषि कोठारी, 24 साल की अर्शिया गुप्ता, 25 साल की सृष्टि रावत, तेजस्वी, हरनीत खुराना, बंधुबाइगरी एच, निखिल, 23 साल के सिद्धान्त, 24 साल के निखिल राजवंशी सरीखे बेहद युवा पुरुष और महिला डॉक्टर कोरोना के शिकारों में शामिल हैं।

68 साल की डॉ. मंजु काला ICU में भर्ती हैं। Indian Medical Association के महासचिव डॉ. दीपक धर चौधरी के मुताबिक उनकी दशा गंभीर बताई जा रही है। 69 साल के विनय राय, 65 साल की नीलम कंडारी, 64 साल के दीपक कालरा, 82 साल के जेपी शर्मा, 70 साल के एसएस ओबराय, 64 साल के रविंदर लवानिया को भी महामारी ने दबोच लिया है। Combined (PG) Institute of Medical Sciences and Research के Head डॉ. जादौन की मृत्यु भी कोरोना से होने के बाद डॉक्टरों के समुदाय में फिक्र और खौफ का जबर्दस्त आलम है।

कोरोना Infected डॉक्टरों में कई प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती हैं। कई घरों में Isolated हैं। इतनी अधिक तादाद में डॉक्टरों के ही कोरोना की गिरफ्त में आ जाने से कोरोना मरीजों के ईलाज में संकट आने लगा है। डॉक्टर खुद संदिग्ध मरीजों को देखने या फिर उनके ईलाज से घबरा रहे हैं। इसके बावजूद वे अपनी ड्यूटी को अंजाम दे रहे हैं। महंत इंद्रेश अस्पताल में संक्रमित डॉक्टरों की तादाद काफी बताई जा रही है। IMA के ओहदेदारों के साथ ही SGRR विवि के अफसरों ने भी इसकी पुष्टि की।

डॉ.आलोक आहूजा

ये भी कहा गया कि महंत इंद्रेश में कोरोना के मरीजों की तादाद बेहद बढ़ जाने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन बहुत ही लापरवाही से इंतज़ामों को देख रहा है। इससे और अधिक कोरोना फैलने की आशंका बनी हुई है। आहूजा पैथोलॉजी में कोरोना का RT-PCR टेस्ट करने के कारण अब तक 6-7 महिला कर्मचारी खुद संक्रमित हो गईं। अभी भी एक कर्मचारी संक्रमित है। डॉ. आलोक आहूजा के अनुसार उनकी लैब (आहूजा पैथोलॉजी) उत्तराखंड की इकलौती ऐसी लैब है, जो RT-PCR टेस्ट कर रही है।

उन्होंने कहा कि उनके पुरुष हो या महिला कर्मचारी, ऐसी विषम और जानलेवा परिस्थितियों में भी डट के अपना फर्ज निभाते हुए खुद को कोरोना वारियर्स साबित कर रहे हैं। IMA के ओहदेदारों के अनुसार डॉक्टरों ने इस वक्त लोगों को बचाने के फेर में अपनी जिंदगी दांव पर लगाई हुई है। ऐसे में प्रशासन और सरकार की तरफ से उनका हौसला बढ़ाए जाने की जरूरत है। इसके बजाए प्रशासन के कई कदम ऐसे हैं, जो डॉक्टरों को परेशान कर रहे हैं।  

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