Home उत्तराखंड जॉर्ज एवरेस्ट में बनेगा महान सर्वेयर के नाम पर कार्टोग्राफिक म्यूजियम

जॉर्ज एवरेस्ट में बनेगा महान सर्वेयर के नाम पर कार्टोग्राफिक म्यूजियम

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पर्यटन सचिव दिलीप ने विशेषज्ञों संग किया मसूरी में निरीक्षण

Chetan Gurung

मसूरी के करीब हाथीपांव स्थित जॉर्ज एवरेस्ट में महान सर्वेयर के नाम पर ही कार्टोग्राफिक म्यूजियम का निर्माण किया जाएगा। एशियन डेवलपमेंट बैंक के माध्यम से किए जा रहे हैं निर्माण कार्य का जायजा लेने आज पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर मौके पर पहुंचे। 7 बार दुनिया की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट को फतह करने वाले उत्तराखंड और देश के विख्यात पर्वतारोही लवराज धर्मशक्तू ने सरकार के इस फैसले को पर्यटन और साहसिक खेलों के साथ ही उत्तराखंड के संदर्भ में भी बहुत शानदार करार दिया।

George Everest House

उनके साथ सर्वे ऑफ इंडिया के विशेषज्ञ और अधिकारी भी थे। कार्टोग्राफिक संग्रहालय के बाबत शीघ्र ही सर्वे ऑफ इंडिया के साथ एक मेमोरेंडम आफ अंडरस्टैंडिंग (द्विपक्षीय करार) किया जाएगा। दिलीप ने कहा कि जॉर्ज एवरेस्ट में लगभग 24 करोड़ रुपए की परियोजना पर कार्य किया जा रहा है। इसमें पर्यटकों के लिए  इको-फ्रेंडली लॉग हट्स, मोबाइल टॉयलेट, फूड वैन, ओपन थिएटर, अप्रोच रोड तथा  एक हैरीटेज़ ट्रैक का निर्माण किया जाना है।

सचिव ने बताया कि म्यूजियम बन जाने से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। साथ ही इस क्षेत्र का प्रचार पर्यटन के नजरिए से और अधिक होगा। इस हेरिटेज स्थल को पर्यटकों के बीच एक लोकप्रिय गंतव्य के रूप में स्थापित किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि हाथी पाँव में  पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यह पर्यटकों का एक पसंदीदा स्थान है। अवस्थापना कार्यों के माध्यम से पर्यटन विभाग का उद्देश्य यहां आने वाले पर्यटकों को अधिकतम सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

लवराज सिंह धर्मशक्तू

जॉर्ज एवरेस्ट में काफी वक्त से लोग और पर्यटक जाते रहे हैं। यहाँ हालांकि पर्यटकों के लिए कोई भी सुविधा उपलब्ध न होने से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। साथ ही रास्ता भी बहुत अच्छा न होने से तमाम पर्यटक चाहने के बावजूद नहीं जा पा रहे हैं। पर्वतारोही लवराज ने `News Space' से कहा-`मैं इस हेरिटेज के खंडहर में बदलने से चिंतित था । इस बाबत मैंने 3 मुख्यमंत्रियों भगत सिंह कोश्यारी-हरीश रावत और मौजूदा सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत से मुलाक़ात कर इस हेरिटेज को संरक्षित करने की गुजारिश थी’।

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