सरकारी कॉलेजों की ब्रांच छिपाने के पीछे कोई राज!

घुड़दौड़ी इंजीनियरिंग कॉलेज के रजिस्ट्रार के सवालों से VC पर अंगुली

THDC-IHET में भी बुरा हाल:न HC न सरकार की सुन रहे निदेशक Mer

Chetan Gurung

उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। इस बार कुलपति डॉ. नरेंद्र चौधरी पर अंगुली उठाई गई है कि ऑनलाइन काउन्सलिंग में विवि क्या अपने कॉलेजों को दरकिनार कर प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों को कृतार्थ कर रहा? इसी विवि के संघटक कॉलेज टिहरी का THDC-IHET कॉलेज भी बदहाल हो चुका है। इसके निदेशक KKS Mer पर आरोप हैं कि वह न सरकार के न ही हाई कोर्ट की सुन और मान रहे हैं। कॉलेज वह आम तौर पर जाते नहीं और तनख्वाह एक-एक महीने देर से दी जा रही। HC के आदेश से बहाल अरविंद कुमार सिंह को महीना खत्म हो जाने के बावजूद 6 महीने की तनख्वाह नहीं दी गई है।

CM त्रिवेन्द्र सिंह रावत की प्रतिष्ठा को यूटीयू से काफी नुक्सान पहुँच रहा

सबसे पहले UTU की ऑनलाइन कौंसलिंग का जिक्र किया जाए। ये आरोप लगाए जा रहे हैं कि ये व्यवस्था इस तरह की गई है कि सरकारी कॉलेजों को नए छात्र-छात्राएँ मिलने की संभावना बहुत कम है। उनके पास उपलब्ध ब्रांचों के बारे में जानने और उनको अपनाने के लिए बहुत कम वक्त दिया गया है। ऐसी युक्ति अपनाई गई कि सरकारी कॉलेजों की ब्रांचों को एक साथ और पर्याप्त अवधि रहते वेबसाइट पर प्रदर्शित ही नहीं किया गया।

इसका खामियाजा ये हुआ कि नव प्रवेशी छात्र-छात्राओं ने अपनी चॉइस प्राइवेट कॉलेजों में भर डाली। इसका खामियाजा सामान्य और रिजर्व कोटे के छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ा। GB पंत इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलॉजी के रजिस्ट्रार संदीप कुमार ने इस व्यवस्था पर तगड़ा प्रश्न चिह्न लगाते हुए कुलपति-नोडल अफसर (ऑनलाइन कौंसलिंग) को औपचारिक पत्र लिख के संगीन आरोप लगाए हैं। उन्होंने शक जताया कि इससे UTU और उससे जुड़े सरकारी कॉलेजों की छवि खराब हो सकती है। उनकी विश्वसनीयता और प्रामाणिकता पर भी दाग लगने का खतरा उत्पन्न हो गया है।

HC-शासन के आदेश के बावजूद वेतन कब मिलेगा? प्रो. अरविंद कुमार सिंह

संदीप ने मांग की कि कौंसलिंग को ले कर शुद्धिकरण जारी किया जाए। सीटों का आवंटन फिलहाल रोक दिया जाए। कौंसलिंग को विस्तार दिया जाए। तकनीकी शिक्षा को ले के उत्तराखंड लगातार गलत कारणों से सुर्खियों में है। कुलपति और रजिस्ट्रार अनीता रावत के बीच जबर्दस्त शीत युद्ध भी छिड़ा। इसमें सरकार ने अनीता का साथ दिया। दूसरी तरफ THDC-IHET टिहरी के प्रो. अरविंद कुमार को हाई कोर्ट और सरकार के आदेश के बावजूद अभी तक 6 महीने का वेतन नहीं दिया गया है। निदेशक मेर पर आरोप हैं कि वह कॉलेज जाते नहीं हैं। कॉलेज के करीब से गुजर जाते हैं। गेट में घुसते नहीं हैं। इससे कॉलेज में व्यवस्थाएँ ठप हो गई हैं। अव्यवस्था-असंतोष फ़ैल गया है।

कॉलेज के स्टाफ का कहना है कि कामचलाऊ निदेशक मेर के कार्यकाल में उनको कभी भी वक्त से तनख्वाह नहीं मिली। मेर गोपेश्वर इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक हैं। THDC-IHET के निदेशक का कार्यभार उनको वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर दिया गया है। उनकी दौर में कॉलेज की सीट भी 50 कम कर दी गई है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के पास तकनीकी शिक्षा मंत्रालय है। ऐसे में तकनीकी शिक्षा में हो रहे इस गड़बड़झाले और विवादों से सरकार के साथ ही मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा पर भी आंच आ रही है।

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