Home उत्तराखंड मुद्दा::CM साहब!IAS-IPS-IFoS से ज्यादा तनख्वाह तो डॉक्टर-इंजीनियर-प्रोफेसर-PCS उठा रहे

मुद्दा::CM साहब!IAS-IPS-IFoS से ज्यादा तनख्वाह तो डॉक्टर-इंजीनियर-प्रोफेसर-PCS उठा रहे

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कर्मचारियों के 1 दिन की वेतन कटौती समाप्ति का GO जारी:DA पर रोक भी पहले खत्म होगी!

Chetan Gurung

उत्तराखंड सरकार ने 1 दिन की तनख्वाह कोरोना से जंग के लिए काटने का अपना आदेश वापिस लेने के GO में IAS-IPS-IFoS काडर के जूनियर अफसरों को राहत नहीं दी गई है। उनकी वेतन कटौती बरकरार रहेगी। ये कुछ हैरान करने वाला फैसला इसलिए लगता है कि ऑल इंडिया सर्विस के अनेक अफसरों की तनख्वाह डॉक्टर-इंजीनियरों-प्रोफेसरों-शिक्षकों-सीनियर PCS से कहीं कम हैं। जिनको राहत दे दी गई है।

CM-स्पीकर-मंत्रियों-विधायकों-मंत्री के समकक्ष दर्जा धारियों को राहत न देना तो समझ आता है। शासनादेश के मुताबिक उनकी तनख्वाह में 1 दिन वाली कटौती रहेगी। अगर कुल वेतन को कटौती का आधार बनाया गया है तो किसी भी सीनियर डॉक्टर-CMS-CMO और उससे वरिष्ठ के, किसी भी सुपरिटेंडेंट इंजीनियर और उससे ऊपर वालों तथा एसोसिएट प्रोफेसर और उससे वरिष्ठ या फिर डिग्री कॉलेजों के प्रवक्ताओं-प्राचार्यों की तनख्वाह सीधी सेवा वाले ऑल इंडिया सर्विस के अफसरों से कहीं अधिक हैं।

5 साल की सेवा में DM-SSP-DFO बनने वालों की तनख्वाह 1 लाख भी नहीं होती है। इसी तरह सीनियर PCS-PPS-SFS की तनख्वाह भी ऑल इंडिया सर्विस (RR वाले) के अफसरों से कहीं अधिक होती हैं। उनको भी राहत दे दी गई है। सरकार के वेतन कटौती वापसी के GO से ये ध्वनि निकलती है कि हर IAS-IPS-IFoS अफसर की तनख्वाह लाखों में हैं। ग्रेड पे को मानक बना के वेतन कटौती का आदेश होता तो सिर्फ प्रभारी सचिव-अपर सचिव या फिर उनसे ऊपर के ही नौकरशाहों को कटौती का सामना करना पड़ता। ऐसा ही अन्य दोनों काडर के अफसरों के साथ होता।

ऑल इंडिया सर्विस के अफसरों का ऐतराज इस पर है कि वेतन कटौती पे स्केल स्लैब के आधार पर किया जाना चाहिए। सिर्फ 3 काडर को ही इसका निशाना बनाना उनके साथ ना-इंसाफ़ी है। पे स्लैब को मानक बनाया जाए तो न सिर्फ विसंगतियाँ खत्म होंगी बल्कि सरकारी खजाने में कहीं अधिक राजस्व जमा होगा। वेतन कटौती का आदेश जारी कर त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने लोकप्रिय फैसले करने वाले CM के तौर पर खुद को स्थापित करने की कोशिश की है। इससे उनको कर्मचारियों का समर्थन अलबत्ता, अवश्य मिल सकता है। कर्मचारियों के लिए एक दिन की तनख्वाह बहुत मायने रखती है। खास तौर पर लॉक डाउन के दौर में।

कर्मचारियों की नजर अब इस पर भी टिकी है कि त्रिवेन्द्र सरकार DA पर रोक भी पहले ही खत्म करती है या फिर अगले साल मध्य तक के आदेश पर कायम रहती है। बीजेपी के प्रमुख नेताओं की राय के मुताबिक विधानसभा चुनावों के मद्देनजर DA पर रोक के फैसले को वापिस लिया जाता है तो सियासी तौर पर पार्टी को ये अच्छा स्कोर दे सकता है। सरकारी खजाने की हालत पतली होने और भारत सरकार से आर्थिक-वित्तीय मदद के नाम पर ठेंगा दिखाए जाने से हालांकि, राज्य सरकार के लिए इतना अहम फैसला ले पाना आसान नहीं दिखाई देता है।

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