रोज ही अपने कारनामों-फैसलों से सुर्खियां बटोर रहे CaU के ओहदेदार

वासिम जाफ़र ने नौकरी शुरू भी नहीं की और 11 लाख पेशगी ले लिए

किंग्स इलेवन पंजाब के भी Coach हैं एक्स क्रिकेटर! सिर्फ 4 महीने के सीजन के 45 लाख!

सीजन का अता-पता नहीं था फिर भी गेस्ट खिलाड़ियों की नियुक्ति में ऐसी हड़बड़ी क्यों थीं?

टेंडरों से कोषाध्यक्ष को किया बाहर:सिर्फ चाय-लंच के लिए हैं AG-एपेक्स वाले

Chetan Gurung

उत्तराखंड क्रिकेट में BCCI की मान्यता के बाद से जो खेल शीर्ष स्तर पर चल रहे और विवादों से दामन छूट नहीं रहा, उसको देखते हुए जो जम्मू-कश्मीर क्रिकेट संघ के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व CM फारुक अब्दुल्ला संग ED-CBI कर रही, वैसा नजारा यहाँ कभी भी नजर आए तो अचंभा नहीं होगा। संघ के चुनावों-भर्तियों-टीम चयन-टेंडरों-ख़रीदों-बैंक अकाउंट ट्रांसफर्स को ले के बवाल पहले से चल रहा था। ताजा मामला ये है कि CaU की सेवा विधिवत जॉइन किए बगैर Coach वासिम जाफ़र को 11 लाख पेशगी दे दिया गया। गज़ब तो ये है कि वह इसके बाद IPL में Kings Eleven Punjab की सेवा में चले गए। CaU के अध्यक्ष-सचिव की कार्यशैली-फैसलों को ये सारे मामले पूरी तरह सवालों के घेरे में लाते हैं।

उत्तराखंड को बीसीसीआई की मान्यता मिली तो सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत भी बहुत खुश हुए थे। उन्होंने CaU वालों को मिठाई खिलाई थी।

फारुक पर ED-CBI के मामले तब के हैं जब वह जम्मू-कश्मीर क्रिकेट संघ के अध्यक्ष हुआ करते थे। भारत में बाकी किसी भी खेल संघों से अधिक क्रिकेट संघों पर न सिर्फ मीडिया की बल्कि IT-ED-CBI की पैनी नजर हमेशा रहती हैं। क्रिकेट में क्या हो रहा, इस सबकी खबर वे नियमित रूप से गोपनीय ढंग से लेते हैं। जिन संघों में पैसे के गोलमाल और अन्य घोटालों-अनियमितता के आरोप अधिक लगते हैं, वे उनके निशाने पर अधिक रहते हैं।

खाँटी राजनीतिज्ञ हैं CaU अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला । संविधान में कोई भी राजनेता-सरकारी अधिकारी सदस्य तक नहीं हो सकता ।

फारुख सरीखे बड़े नाम भी उनके शिकंजे से नहीं बच सके। उत्तराखंड के क्रिकेट आकाओं की उनके सामने क्या बिसात। सूत्रों के मुताबिक तीनों एजेंसियों ने CaU के कामकाज और कार्यशैली में भी दिलचस्पी लेनी शुरू कर दी है। राज्य की खुफिया एजेंसियां भी नजर रखने लगी हैं। संघ में CM के भतीजे संजय रावत के उपाध्यक्ष होने और अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला के काँग्रेस से होने के कारण भी इन एजेंसियों के कान अब विवादों के लगातार सामने आने के कारण खड़े होने लगे हैं। 

सचिव माहिम वर्मा संविधान के खिलाफ लगातार चौथी बार ऑफिस बेयरर बने हैं

CaU के कुछ फैसले इस कदर विवादास्पद रहे हैं कि इसके कुछ खास ओहदेदारों पर कभी भी गाज गिर जाए तो बड़ी बात नहीं होगी। BCCI और CaU के बाई लॉज के मुताबिक कोई भी राजनीतिज्ञ इसके सदस्य तक नहीं हो सकते हैं। गुनसोला काँग्रेस विधायक और मसूरी नगर पालिका अध्यक्ष रहे हैं। आज भी सक्रिय काँग्रेस नेता हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनी लोढ़ा कमेटी के मुताबिक भी उनका चुनाव ही अवैध है। सचिव माहिम वर्मा का भी और गज़ब हाल है।

कोषाध्यक्ष पृथ्वी सिंह नेगी:मुझे कुछ नहीं पता। अध्यक्ष-सचिव से पूछें।

उनकी हर जानकारी जो रजिस्ट्रार चिट फंड दफ्तर में है, वह संदिग्ध है। वह कभी भी गजेटेड अधिकारी तो दूर सरकारी कर्मचारी तक नहीं रहे। फिर भी रजिस्ट्रार दफ्तर में खुद को राजपत्रित अधिकारी बताया। रजिस्ट्रार कार्यालय के एक अधिकारी के अनुसार कोई अगर इस बारे में विधिवत शिकायत करें तो इस पर कार्रवाई भी हो सकती है। रजिस्ट्रेशन रद्द भी हो सकता है। संविधान के मुताबिक ऑफिस बेयरर (अध्यक्ष-उपाध्यक्ष-सचिव-संयुक्त सचिव-कोषाध्यक्ष) लगातार 3 बार नहीं हो सकते। जिंदगी में 3 बार से अधिक कोई भी इन ओहदों पर नहीं रह सकते। माहिम लगातार चौथी बार ऑफिस बेयरर हैं।

उत्तराखंड टीम के नए कोच वासिम जाफ़र। नौकरी शुरू हुई नहीं और 11 लाख पेशगी के ले के IPL में किंग्स इलेवन पंजाब की सेवा में चले गए

अभी जिस मामले को ले के विवाद है वह नए कोच जाफ़र और गेस्ट खिलाड़ियों को ले के है। हालांकि और भी तमाम नए विवाद पैदा हो चुके हैं। जाफ़र को नियुक्ति पत्र CaU दे चुका है। अपने खर्च पर होटल मधुबन में ठहरा चुका है। इसके बावजूद वह IPL शुरू हुआ तो Kings Eleven Punjab के साथ बतौर प्रशिक्षक जुड़ने चले गए। एक साथ दो जगह नौकरी की ये मिसाल साफ-साफ हितों का टकराव है। इस बारे में कोषाध्यक्ष पृथ्वी सिंह नेगी ने पूछे जाने पर कहा कि जाफ़र की नौकरी CaU में 11 नवंबर से शुरू होगी। ये पूछे जाने पर कि क्या जाफ़र को 11 लाख रुपए पेशगी के दिए गए हैं? उन्होंने इसकी पुष्टि की लेकिन इस बारे में पूछे जाने पर अध्यक्ष-सचिव को ही बोलने के लिए अधिकृत कह के बचने की कोशिश की।

ऐसी मिसाल कहीं नहीं मिलती कि किसी को नौकरी शुरू होने से पहले ही 45 लाख रुपए की नौकरी तश्तरी में सजा के दी जाए। फिर लाखों रुपए एडवांस में भी दे दें। दूसरी जगह नौकरी करने की छूट भी दी जाए। नेगी ने ये पूछने पर अनभिज्ञता जताई कि जाफ़र के पास क्या किंग्स इलेवन पंजाब से उत्तराखंड की सेवा में जाने देने की NoC है? नेगी ये भी साफ नहीं कर पाए कि जाफ़र को जब पूरे सीजन के 45 लाख रुपए दिए जा रहे तो क्या अब उनकी तनख्वाह में कटौती होगी। घरेलू क्रिकेट सीजन अब 1 जनवरी से होगा और बामुश्किल 2 महीने चलेगा। उसके बाद IPL-21 शुरू होगा। ये भी जवाब वह नहीं दे पाए कि क्या जाफ़र ने CaU को लिख के दिया है कि अगले IPL सीजन में उनका किसी भी फ्रेंचाईजी से कोई कांट्रैक्ट नहीं होगा। उन्होंने ये भी अध्यक्ष-सचिव से पूछने के लिए कहा।

खास बात ये है कि पूरे देश में किसी भी राज्य ने गेस्ट खिलाड़ी नहीं रखे। कोरोना-लॉक डाउन के कारण तस्वीर साफ न होना इसकी वजह थी। इसके बावजूद उत्तराखंड ने 3 गेस्ट प्लेयर रख लिए। वह भी ऐसी खिलाड़ी, जिनकी कदर उनके ही गृह राज्य में खत्म हो चुकी है। जब सीजन का पता ही नहीं तो फिर लाखों रुपए की तनख्वाह में गेस्ट प्लेयर और राज्य के खिलाड़ियों को चुनने की क्या जल्दबाज़ी थी! पृथ्वी ने पूछे जाने पर इसकी पुष्टि तो की कि बैंक अकाउंट भी देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI से प्राइवेट बैंक Axis Bank में ट्रांसफर कर दिया गया। इसकी वजह उन्होंने ये बताई कि SBI में दिक्कत हो रही थी। जब देश में अर्थव्यवस्था का बुरा हाल हो और बैंकों के डूबने का सिलसिला चल रहा हो, ऐसे हाल में सुरक्षित SBI से खाता हटा के प्राइवेट बैंक में ले जाने का जोखिम लिया जाना किसी की समझ में नहीं आ रहा।

अंदरखाने की खबर ये है कि टेंडरों और ख़रीदों में से कोषाध्यक्ष को बाहर कर दिया गया है। सिर्फ सचिव अकेले ही सारे फैसले लेंगे। चाहे वह किसी को नियुक्त करने का मामला हो या फिर करोड़ों की खरीद का। इतनी ताकत तो किसी मुख्यमंत्री के पास भी नहीं है। उनको भी हर फैसला नियमों के मुताबिक करना होता है। बहुमत के आधार पर फैसले के नाम पर सचिव को सारे अधिकार सौंप दिए जाने से ये भी साफ हो गया कि गुनसोला सिर्फ रबर स्टैम्प हैं या फिर उनके ऊपर भारी दबाव है। ताज्जुब है कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से की गई व्यवस्था के अंतर्गत रखे गए डिप्टी AG योगेश अग्रवाल भी इन मामलों को मजबूत ढंग से या तो उठा नहीं पा रहे या फिर उनकी बातों को तवज्जो ही नहीं दी जा रही है। ये एक किस्म से सुप्रीम कोर्ट की तौहीन भी है।

एक ओहदेदार के अनुसार एपेक्स काउंसिल भी एकदम फर्जी है। इसमें नामित सरकारी कर्मचारी सदस्य अवैध रूप से बैठक में आ रहे हैं। संघ के एक सदस्य ओमप्रकाश सूदी भी नेगी और पूर्व अध्यक्ष तथा संरक्षक पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट की तरह CaU में चल रही गड़बड़ियों पर रह-रह के आवाज उठाते रहते हैं। उनके अनुसार वह वाजिब मुद्दों को उठा के उत्तराखंड क्रिकेट को बचाने की अपनी कोशिश जारी रखते रहेंगे। सूत्रों के अनुसार UP की शुक्ला लॉबी उत्तराखंड क्रिकेट को अपने ईशारों पर चला रही। करोड़ों का जो बजट BCCI से मिलता है, वह और चयन में होने वाली धांधली इसकी प्रमुख वजह है। पिछले साल के खर्चे के 11 करोड़ रुपए अभी तक CaU को मिल चुके हैं। अभी और पैसे आने हैं। इस साल के पैसे आने अभी शुरू भी नहीं हुए हैं।

इतनी बड़ी रकम बोर्ड से मिलने के बावजूद उत्तराखंड में क्रिकेट के नाम पर उपलब्धि शून्य रही है। उत्तराखंड ने न सिर्फ बहुत खराब क्रिकेट खेली है बल्कि खिलाड़ियों में भी हताशा और समर्थकों में निराशा नजर आई। जो पैसा क्रिकेट विकास और खिलाड़ियों को बेहतर बनाने में लगाने के लिए बोर्ड ने भेजा है, वह दावतों-गैर जरूरी ख़रीदों-सभी के लिए लैप टॉप पर खर्च किए गए। CBI-ED-IT-खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं तो इसकी वजह यही सब कुछ है।  

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