CM त्रिवेन्द्र ने किया गैरसैण में सचिवालय का शिलान्यास

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Chetan Gurung

गैरसैण में विधान भवन के अस्तित्व में आने के बावजूद समर कैपिटल तब तक शुरू नहीं हो सकता जब तक कि सचिवालय स्थापित न हो। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने गैरसैण के भराड़ीसैण में सचिवालय भवन का शिलान्यास भी आज कर दिया। इसके निर्माण में 110 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।

विधान भवन का इस्तेमाल सिर्फ सदन चलने और सत्र के दौरान ही होता है। सचिवालय में सरकार के सारे अहम कार्य और फैसले होते हैं। E-File के जरिये त्रिवेन्द्र सरकार गैरसैण में सचिवालय को संचालित करने का ऐलान पहले ही कर चुकी है। इससे देहरादून से वहाँ फाइल ले जाने या लाने की दिक्कत से छुटकारा मिल जाएगा।

सचिवालय संचालित करने के लिए अफसरों-कर्मचारियों की जरूरत के साथ ही भवन की दरकार थी। सरकार ने इसके निर्माण की दिशा में कदम उठाते हुए शिलान्यास कर दिया। इससे ये उम्मीद बांध सकते हैं कि पहाड़ से भी अब राज्य के अहम फैसले किए जा सकते हैं। ये बात अलग है कि गर्मियों की राजधानी होने के कारण गैरसैण में फैसले कम ही होने की संभावना है।

विधान भवन और सचिवालय की स्थापना के बाद सरकार का अगला कदम राजभवन और मुख्यमंत्री-स्पीकर और मंत्री आवास के साथ ही मुख्य सचिव आवास का निर्माण भी हो सकता है। कई अफसरों-कर्मचारियों को स्थायी तौर पर गैरसैण में ही तैनात करना पड़ेगा। उनके लिए आवास की व्यवस्था भी करना जरूरी है। ये हो सकता है कि वहाँ के लिए देहरादून सचिवालय में कार्य कर रहे अफसरों-कर्मचारियों से विकल्प मांगा जाए।

सरकार पहाड़ से सरकार के संचालन को किस तरह अंजाम देगी, ये भी देखना होगा। उत्तर प्रदेश के विभाजन से पहले भी नैनीताल-देहरादून में उत्तरांचल विकास विभाग और मिनी सचिवालय हुआ करता था। इसके बावजूद सारे अहम फैसले लखनऊ से ही हुआ करते थे। देहरादून मिनी सचिवालय सिर्फ नाम का हुआ करता था। ऐसा न हो कि गैरसैण भी उसी दशा-दिशा को प्राप्त कर जाए। आज सचिवालय भवन शिलान्यास के दौरान राज्य मंत्री डॉ.धनसिंह रावत, विधायक सुरेन्द्र सिंह नेगी, महेन्द्र भट्ट, जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया भी मौजूद थीं।

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