कई CM आए-चले गए:न कस पाए न ढंग से नियमित दौरे करा पाए अफसरों के

वाद निस्तारण की रिपोर्ट तलब किए जाने पर DM’s में खलबली:कमिश्नरों को भी हिदायतें  

Chetan Gurung

CM त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अपने लिए सबसे कठिन-दुरूह लक्ष्य या फिर चुनौती चुन ली है। उन्होंने सचिवों को हिदायत दी कि वे उन जिलों का दौरा और प्रवास करें, जहां के वे प्रभारी हैं। दोनों कमिश्नरों को भी अपने मण्डल में विधानसभावार योजनाओं की समीक्षा करने के निर्देश दिए। उत्तराखंड का इतिहास गवाह है कि इस चुनौती में हर CM तकरीबन फेल साबित हुए हैं। त्रिवेन्द्र अगर ये करा पाए तो उनकी उपलब्धियों में इसको जोड़ा जा सकेगा। प्रशासनिक तौर पर कुशल का तमगा भी लगा सकेंगे।  

त्रिवेन्द्र ने निर्देश दिए कि सुशासन दिवस (25 दिसम्बर) तक सचिवालय के सभी अनुभाग ई-ऑफिस के रूप में कार्य करना सुनिश्चित करें। इसके लिये प्रशिक्षण एवं संसाधनों की उपलब्धता का जिम्मा उन्होंने अपर मुख्य सचिव (कार्मिक) राधा रतुड़ी एवं सचिव (आईटी) आरके सुधांशु को सौंपा। दिसम्बर से आरम्भ होने वाले मंडलायुक्तों को निर्देश दिए कि उनके जनपदों के प्रवास कार्यक्रम से पूर्व वे विधान सभा क्षेत्रवार योजनाओं की समीक्षा सुनिश्चित करें।

मंगलवार को सचिवालय में मुख्य सचिव ओमप्रकाश सहित शासन के आला अफसरों संग त्रिवेन्द्र ने अहम बैठक की। बद्रीनाथ-केदारनाथ धाम के दर्शन UP के CM योगी आदित्यनाथ के साथ करने के बाद लौटे मुख्यमंत्री अचानक फॉर्म में दिखे। उन्होंने जनपदों के प्रभारी सचिवों को नवंबर के अंत तक सम्बन्धित जिलों का भ्रमण कर विकास योजनाओं एवं कार्यक्रमों की समीक्षा करने और रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। सचिवों को हिदायत मिली कि वे ग्रोथ सेंटरों का भी निरीक्षण करेंगे। उन्होंने जिलाधिकारियों को भी नियमित रूप से ब्लाक स्तर तक सरकार आपके द्वार-समस्या समाधान शिविरों का आयोजन करने को सख्ती से कहा। डीएम एवं एसडीएम को नियमित रूप से अपनी कोर्ट संचालित करने पर भी ध्यान देने को कहा।

मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों से पिछले तीन माह में उनके स्तर पर निस्तारित वादों का विवरण उपलब्ध कराने को भी कहा। बड़ी संख्या में दाखिल खारिज के लम्बित प्रकरणों के त्वरित निस्तारण करने के साथ ही जिन वादों के नोटिस जारी किए जा चुके हैं, उनका निस्तारण भी 25 दिसम्बर तक करने के निर्देश दिए। इससे कलेक्टरों में खलबली मची है। इस मामले में उनमें से कईयों की रिपोर्ट अच्छी नहीं है। विभागाध्यक्षों को भी नियमित रूप से विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश जारी किए।  

मुख्यमंत्री विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं के लम्बित प्रकरणों को शीघ्र निस्तारित किये जाने के निर्देश देते हुए सचिव (वित्त) अमित नेगी से इस सम्बन्ध में बैंकर्स के साथ बैठक कर इसमें तेजी लाने को कहा। नौकरशाहों पर पूरी तरह केन्द्रित बैठक को मुख्यमंत्री की प्रशासन को अधिक चुस्त-दुरुस्त करने की कोशिश माना जा रहा है। ये भी अर्थ निकाले जा रहे हैं कि त्रिवेन्द्र नौकरशाहों को कसने की दिशा में जुट गए हैं। नौकरशाहों के सरकार में हावी होने के आरोप से बीजेपी सरकार पर बार-बार अंगुली उठती रही है। त्रिवेन्द्र विधानसभा चुनाव से पहले इस दाग को खत्म करने के हक में हैं।

आईएएस अफसरों से काम ले पाना कभी भी किसी भी सरकार या मुख्यमंत्री के लिए आसान नहीं रहा है। त्रिवेन्द्र ने देर से ही सही लेकिन इस दिशा में लगता है ध्यान लगाना शुरू कर दिया है। इस पर भी निगाहें सभी की टिकी हुई रहेंगे कि दौरे में सभी अफसरों को मुख्यमंत्री भेज पाएंगे या फिर चुनींदा को ही ज़िम्मेदारी निभाने के लिए दबाया जाएगा।

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