शहीद राकेश डोभाल के आश्रितों को 10 लाख:University में मुफ्त पढ़ाई का लिखित पत्र भी

Chetan Gurung

श्रद्धांजली भर देने से किसी शहीद का परिवार भविष्य के फिक्र से मुक्त नहीं हो जाता। भावनाओं का उद्गार शहीदों के प्रति सम्मान भाव तो जगाता है लेकिन उनके आश्रितों की रोजी-रोटी इससे नहीं चलती है। ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी और ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी की ओर से 5-5 लाख रुपये (कुल-10 लाख रूपये)  BSF के शहीद राकेश डोभाल की धर्मपत्नी को सौंपी जा रही है। शहीद के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी हो। उसके बच्चे अच्छी शिक्षा अर्जित कर भविष्य में फिर देश की सेवा में जुटे। इस पर ध्यान देना जरूरी है। इस दिशा में मदद के लिए `Graphic Era’ समूह के अध्यक्ष डॉ. कमल घनसाला का सामने आना निस्संदेह बाकी रईसों-औद्योगिक समूहों-निजी विवि के स्वामियों के लिए नजीर हो सकती है।

कारगिल युद्ध को याद करें। तमाम बड़ी कंपनियों-औद्योगिक समूहों ने शहीदों के परिवारों को बड़ी-बड़ी मदद देने के नाम पर जम के वाहवाही लूटी। जो कोरी साबित हुई। कारगिल में भारत-पाकिस्तान की फौजें सीधे सरहद पर टकराई थीं। इसके चलते उसको जंग का दर्जा हासिल हुआ था। जंग में शहीदों को जो सुविधाएं मिलनी चाहिए, वह सरकार ने शहीद की पत्नी को दी। जो विवाहित नहीं थे, उनके माता-पिता को मदद और सहूलियतें दीं।

मीडिया में कारगिल युद्द को जबर्दस्त प्रचार के कारण कई बड़े औद्योगिक समूह शहीदों के परिवारों की मदद की घोषणा करने आगे आए। भारतीय चिकत्सा संघ (IMA) ने भी मुफ्त ईलाज शहीद परिवारों को देने का ऐलान कर वाहवाही लूटने में कसर नहीं छोड़ी थी। राज्य सरकार की तरफ से पाँच बीघा जमीन शहीद के आश्रितों को देने का ऐलान किया था। उत्तराखंड में एक भी केस ऐसा नहीं दिखता, जिसको इस ऐलान का फायदा मिला हो। स्कूलों ने मुफ्त शिक्षा देने का ऐलान किया था। कुछ स्कूलों ने जरूर इस वादे को पूरा किया। बाकियों ने वक्त के साथ इसको भुला दिया।

शहीद राकेश को कारगिल युद्ध शहीद सरीखा दर्जा न सरकार से मिला है न मिल सकता है। भले उनके परिवार के सामने भविष्य में तमाम ऐसी चुनौतियाँ पेश होंगी, जिसका सामना करना उनके आश्रितों के लिए कभी भी आसान नहीं होगा। डॉ. घनसाला के लिए शहीदों का सम्मान सिर्फ शब्दों-भावनाओं से करना काफी नहीं रहा है। कारगिल युद्ध के दौरान भी वह शहीदों के घरों में जाया करते थे। डोभाल के आश्रितों को 10 लाख रुपए की मदद करना उनके लिए नई बात नहीं है। इसी किस्म की खामोश भूमिका में रहना उनका शगल है। उनकी पत्नी और ग्राफिक एरा मैनेजमेंट बोर्ड की आला ओहदेदार राखी घनसाला कल खुद चेक सौंपने शहीद डोभाल के घर जाएँगी।

शहीद डोभाल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ग्राफिक एरा ने उनके आश्रितों के लिए जो फैसले किए हैं, वे वाकई असली और व्यावहारिक है। ग्राफिक एरा एजुकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ कमल ने `News Space’ से कहा, `शहीद की बेटी दित्या डोभाल को 12वीं कक्षा के बाद ग्राफिक एरा में इन्जीनियरिंग, मैनेजमेंट, कम्प्यूटर एप्लीकेशन के किसी भी कोर्स में बिना फीस की पढ़ाई करने की सुविधा भी बोर्ड ने तय की है। ये कोरा ऐलान नहीं होगा। इस सम्बंध में परिवार को लिखित प्रस्ताव  सौंपा जायेगा’।

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