प्रभारी बनाए गए सचिवों को नए सिरे से सौंपे जिले

Chetan Gurung

5 प्रभारी सचिवों और 8 पूरे सचिवों को सरकार ने बुधवार को नए सिरे से जिलों की ज़िम्मेदारी सौंप दी। ACS-प्रमुख सचिव को इस ज़िम्मेदारी से दूर रखा गया है। मुख्य सचिव ओमप्रकाश की तरफ से जारी आदेश में जिलों के प्रभारी सचिवों के लिए प्रभारी मंत्रियों की बैठकों में मौजूद रहना अनिवार्य किया गया है।

CS Omprakash

जिलों के प्रभारी सचिवों की नए सिरे से मनोनयन इसलिए अहम है कि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उनको अब सक्रिय रहने और अपनी ज़िम्मेदारी को गंभीरता के साथ अधिक बेहतर ढंग से निभाने के निर्देश दिए हैं। अब तक प्रभारी सचिवों का होना न होना बराबर सा रहा है। विधानसभा चुनाव करीब आ जाने और बिहार विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी की दशा खराब रहने के कारण उत्तराखंड में पार्टी और खुद मुख्यमंत्री अतिरिक्त सतर्कता और मेहनत करने की दिशा में बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।

ये तो साफ हो चुका है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर पार्टी अगला चुनाव फतह नहीं कर सकती। इसके लिए खुद उत्तराखंड बीजेपी और त्रिवेन्द्र सरकार को ही अधिक ज़ोर लगाना होगा। त्रिवेन्द्र ने इसके चलते ही नौकरशाही को कसने और उसको अधिक जिम्मेदार-सक्रिय बनाने के साथ ही लोगों और राज्य को अधिक बेहतर ढंग से जानने के मोर्चे पर लगाया है। जिलों के प्रभारी सचिवों में फेरबदल को भी इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा सकता है।

जिलों के प्रभारी सचिवों की संशोधित सूची इस तरह है। आरके सुधांशु-हरिद्वार:एल फैनई-नैनीताल:डॉ. आर मीनाक्षी सुंदरम-पौड़ी:शैलेश बगौली-चंपावत:नितेश कुमार झा-उधम सिंह नगर:हरबंस सिंह चुघ-चमोली:दिलीप जावलकर-उत्तरकाशी:सौजन्या-देहरादून:डॉ. पंकज पांडे-रुद्रप्रयाग:डॉ. रणजीत सिन्हा-पिथौरागढ़:एसए मुरुगेशन-टिहरी:सुशील कुमार-अल्मोड़ा:भूपाल सिंह मनराल-बागेश्वर।   

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