कुलपति की चिट्ठी मिलने पर परीक्षण करेंगे:प्रमुख सचिव आनंदबर्द्धन

Chetan Gurung

Dr.Dhan Singh Rawat (State Minister-Higher Education)

VC और रजिस्ट्रार के झगड़ों-मतभेदों-विवादों ने उत्तराखंड टेक्निकल विवि को एक किस्म से बर्बाद कर दिया है। अब अगली बारी लगता है श्रीदेव सुमन विवि की आने वाली है। विडम्बना ये है कि दोनों ही Affiliating University हैं। श्रीदेव सुमन विवि के कुलपति ने अपने कुलसचिव सुधीर बुड़ाकोटी पर तमाम गंभीर आरोप लगाते हुए उनको हटाने के साथ ही उनकी जगह नई पोस्टिंग करने की चिट्ठी शासन को भेजी है। प्रमुख सचिव (उच्च शिक्षा) आनंदबर्द्धन ने `News Space’ से कहा, `रजिस्ट्रार शासन का प्रतिनिधि होता है। उसको हटाने का हक कुलपति को नहीं है। मेरे पास अभी कुलपति की चिट्ठी आई नहीं है। आने पर कुछ कहा जा सकेगा’।

कुलपति और कुलसचिव में जब भी तनातनी रही, विवि का भट्टा बैठ गया। ये इतिहास है। प्रोफेसर वीके तिवारी के UTU के VC रहने के वक्त मृत्युंजय मिश्र कुलसचिव थे। उस दौर में मिश्र के कारनामों ने विवि को एक किस्म से डुबो डाला था। ये वही दौर था जब तमाम प्राइवेट कॉलेज (इंजीनियरिंग-व्यावसायिक) डीम्ड विवि में तब्दील हो गए थे। मिश्र को सरकार की भी पूरी शह थी। उन्होंने परीक्षा नियंत्रक की कुर्सी भी खुद ही रख ली थी।

Principal Secretary (Higher Education) Anandbarddhan

परेशान हो के कुलपति तिवारी चले गए तो प्रो. दुर्ग सिंह चौहान उनकी जगह आए। चौहान के वक्त राकेश शर्मा तकनीकी शिक्षा सचिव थे। शर्मा ने मिश्र को कुलसचिव की कुर्सी से चलता कर चौहान का सिर दर्द काफी हद तक दूर कर दिया था। मौजूदा कुलपति प्रो. नरेंद्र चौधरी कुलपति के वक्त भी कुलसचिव अनीता राणा रावत और उनमें कभी नहीं बनी। UTU आज सबसे खत्म विवि में शुमार है। इसको उठाने में सरकार सफल हो भी नहीं पाई कि अब श्रीदेव सुमन विवि खात्मे की ओर अग्रसर दिख रहा।

यूटीयू इंजीनियरिंग-व्यावसायिक तो अन्य के लिए श्रीदेव सुमन विवि एफीलियेटिंग विवि है। दोनों की अहमियत को देख के सरकार की किसी किस्म की लापरवाही इस मामले में बर्दाश्त नहीं हो सकती। श्रीदेव सुमन विवि मामले में कुलसचिव के बारे में ये स्थापित राय है कि उनकी किसी भी विवि में किसी भी कुलपति से कभी नहीं बनी। हर जगह से उनकी छुट्टी हुई। भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) में भी जब वह सहायक निदेशक थे  तो उनको ले के प्रशिक्षकों और कर्मचारियों में काफी असंतोष रहता था।

कुलपति Dr.PP Dhyani ने सरकार को भेजी चिट्ठी में तमाम गंभीर आरोप लगाए हैं। इन पर शासन गौर करता है तो बुड़ाकोटी की परेशानी बहुत बढ़ जाएगी। तय है। खास तौर पर खुद ही बिना किसी उच्चानुमोदन के 10 हजार ग्रेड पे ले लेने और कुलपति को बताए बिना ड्यूटी से गैर हाजिर रहना तथा विवि संसाधनों का बेजा इस्तेमाल। 10 हजार ग्रेड पे सचिवों-मंडलयुक्तों और प्रोफेसरों को मिलता है। कुलपति को हालांकि ये हक नहीं है कि वह कुलसचिव को पदमुक्त कर सके। वह सिर्फ इसकी सिफ़ारिश भर शासन से कर सकता है। इसमें दो राय नहीं कि कुलसचिव विवि में शासन का प्रतिनिधि होता है। व्यवस्था में उसको ये अधिकार नहीं दिया गया है कि वह कुलपति की अवहेलना शुरू कर दे। अनुशासनहीन हो जाए।

प्रमुख सचिव आनंदबर्द्धन ने `News Space’ से कहा, `कुलपति की चिट्ठी के बारे में जानकारी मिली है, लेकिन मेरे पास अभी नहीं आई है। इसके मिलने के बाद परीक्षण किया जाएगा। उसके आधार पर ही आगे की जरूरी कार्रवाई की जाएगी’। उन्होंने कहा कि कुलसचिव विवि में शासन का प्रतिनिधित्व करता है। उसको हटाने का अधिकार कुलपति के पास नहीं है’। उन्होंने ये भी साफ किया कि कुलसचिव से काम लेने या न लेने का अधिकार कुलपति के पास है। या फिर किसी खास किस्म के कार्य लेने का अधिकार भी वह रखते हैं।

इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है कि कुलपति और कुलसचिव के बीच गंभीर विवाद से श्रीदेव सुमन विवि की व्यवस्था और इससे सम्बद्ध कॉलेजों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। विवि की छवि-प्रतिष्ठा भी धूल धूसरित हो रही। तकनीकी शिक्षा के मंत्री खुद मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत हैं। उच्च शिक्षा के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. धन सिंह रावत हैं। अपने महकमों में हो रहे इन कारनामों पर दोनों की खामोशी टूटने और कार्रवाई का इंतजार है।    

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