कभी PM ने इस योजना पर कटाक्ष किया था-मनमोहन सरकार की नाकामी का स्मारक

रोजगार गांरटी परिषद् की बैठक:हर 15 दिनों में DM समीक्षा करेंगे

Chetan Gurung

मनरेगा योजना में CM त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कार्य दिवस को सालाना 100 से बढ़ा के 150 कर दिया। उत्तराखंड सरकार का ये फैसला इसलिए अहम है कि PM बनने के बाद संसद में नरेंद्र मोदी ने इस योजना की खिल्ली उड़ाई थी। उन्होंने इसको मनमोहन सरकार की नाकामी का जीता जागता स्मारक करार दिया था।

मोदी ने तब ये भी कहा था कि वह इस योजना को इसलिए कायम रखेंगे, ताकि लोग काँग्रेस सरकार की नाकामी भुला न सके। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में सचिवालय में राज्य रोजगार गारंटी परिषद् की बैठक में आज उत्तराखण्ड आजीविका एप लॉन्च की गई। त्रिवेन्द्र ने इस मौके पर कहा कि राज्य में जल्द ही मनरेगा के कार्यदिवसों की अवधि बढ़ाई जाएगी। इसके कार्यदिवस 100  से बढ़ाकर 150 दिन किए जाएंगे। किये जायेगें। इसके लिए धनराशि की व्यवस्था राज्य फंड से की जाएगी। मनरेगा में कुछ जिलों में अच्छे कार्य हुए हैं। कार्य प्रकृति में सुधार के लिए सभी जिले एक-दूसरे से अपने अनुभवों को साझा करें।

उन्होंने कहा कि सभी जिलाधिकारी मनरेगा कार्यों की हर 15 दिनों में समीक्षा करते रहेंगे। की जाय। कोविड काल के दौरान की कार्य की भरपाई के लिए और मेहनत की आवश्यकता है। राज्य सरकार के इस फैसले से ये साफ हो गया कि मनरेगा योजना बहुत लाभप्रद है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जल स्रोतों के पुनर्जीवीकरण के लिए सुनियोजित तरीके से कार्य करने के निर्देश भी दिए। नदियों के पुनर्जनन के लिए जीआईएस मैपिंग पर बल दिया। पिथौरागढ़ में फिशरीज के क्षेत्र में लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए इच्छुक लोगों को भ्रमण कराने पर भी ज़ोर दिया। पौड़ी की पौषण वाटिका की तारीफ करते हुए अन्य जिलों में भी इस तरह की योजना बनाने पर बल दिया।

मनरेगा के तहत रोजगार दिवसों के औसत को और अधिक बढ़ाने तथा जल संरक्षण एवं संवर्द्धन, कृषि विकास, पोषण अभियान, कलस्टर आधारित क्रियान्वयन रणनीति, सतत आजीविका संसाधन विकास एवं विपणन सुविधा विकास के क्षेत्र में विशेष प्रयास पर भी उन्होंने ज़ोर दिया।  बैठक में राज्य योजना एवं जिला योजना में विभागों की मनरेगा में संभव योजनाओं के औचित्य पर अंगुली उठाई गई। ऐसे कार्यों को मनरेगा से करने में प्राथमिकता देने पर फैसला हुआ। राज्य एवं जिला योजना की धराशि का किसी अन्य मद में सदुपयोग करने को कहा गया।

बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य में मनरेगा के तहत कुल 12.19 लाख जॉब कार्ड बने हैं। 67.19 प्रतिशत सक्रिय जॉब कार्ड धारक है। राज्य में 58.69 प्रतिशत सक्रिय श्रमिक हैं। जॉब कार्ड धारकों में 53.65 प्रतिशत महिलाएं है। राज्य में पिछले एक साल में  2 लाख 66 हजार जॉब कार्ड धारकां की संख्या बढ़ी है। मनरेगा के में ससमय भुगतान एवं जॉब कार्ड सत्यापन में उत्तराखण्ड की राष्ट्रीय स्तर पर दूसरी रैंकिंग है। मनरेगा के तहत न्यूनतम अकुशल मजदूरी प्रतिदिन 201 रूपये है।

बैठक में ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग के अध्यक्ष डॉ. एसएस नेगी, अपर मुख्य सचिव मनीषा पंवार, अपर सचिव वंदना, उदयराज, राज्य नोडल अधिकारी (मनरेगा) मोहम्मद असलम भी मौजूद थे।

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