एक महीने पहले रिटायर पिता की आकस्मिक मृत्यु के बावजूद हिम्मत से लिया काम

Chetan Gurung

टप्केश्वर श्मशान घाट में पिता की चिता को मुखाग्नि देती दिव्या खत्री

केंद्र सरकार की सेवा से रिटायर अजय खत्री की आज सुबह अचानक घर पर ही धूप सेकते वक्त बैठे-बैठे मृत्यु हो गई तो ये संकट आन पड़ा कि अंतिम संस्कार में पुत्र धर्म कौन निभाएगा। उनकी इकलौती संतान बेटी दिव्या ने इस पसोपेश को फौरन हल कर दिया। उसने तय किया कि वह भले बेटी है, लेकिन अंतिम संस्कार में वह समस्त पुत्र धर्म निभाएगी। इसके बाद टपकेश्वर श्मशान घाट में उसी ने अंतिम क्रिया सम्पन्न की।

माहौल उस वक्त गमगीन हो गया जब चिता पर रखी पिता की मृत देह की अंतिम परिक्रमा करने के बाद  मुखाग्नि देते समय दिव्या अपनी आंसुओं को नियंत्रित नहीं कर पाई। उससे पहले वह बहुत मजबूती-दृढ़ता का परिचय दे रही थी। मुखाग्नि देते ही वह डबडबाई और आंसुओं से भरी आँखों को ढँक के साथ आईं अन्य महिला संबंधियों से गले लग के रो पड़ी। उसको तब सभी ने सांत्वना दी।

Central Soil and water Conservation training institute से अजय पिछले महीने ही रिटायर हुए थे। वह डाकरा कैंट में गंदु वाला-तीन कुआं इलाके में रहते थे। काफी वक्त से उनको किडनी की समस्या थी। परिवार के सदस्यों ने बताया कि अजय सुबह अपने घर के बरामदे में धूप सेक रहे थे। अचानक ही वह बैठे-बैठे लुढ़क गए। वहीं देह त्याग दी। 22 साल की दिव्या उनकी अकेले बेटी थी।   

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