काँग्रेस चुप क्यों? इसलिए कि गुनसोला हैं CaU अध्यक्ष:रेजिस्ट्रेशन-वोटर लिस्ट जांच से हिचक क्यों रही सरकार?

Chetan Gurung

पूर्व भारतीय ओपनर वासिम जाफ़र पर सांप्रदायिक होने का आरोप लगा के चौतरफा हमलों से घिर गए Cricket Association of Uttarakhand के सचिव माहिम वर्मा को खुद भी शायद इसका अंदाज नहीं होगा कि वह आखिर बोल क्या रहे। देश भर में अपनी फजीहत कराने के साथ ही उन्होंने देवभूमि को भी बदनाम कर दिया। आज तक धार्मिक विवादों से अछूते क्रिकेट को कलंकित कर दिया। शीर्ष क्रिकेटरों के बाद अब खुद काँग्रेस के आला नेता राहुल गांधी ने भी इस मामले में कूद मारते हुए ट्वीट कर मोदी सरकार-BJP पर परोक्ष हमला बोला है कि देश में जैसा उन्मादी माहौल चल रहा, उसने अब क्रिकेट को भी शिकंजे में ले लिया है। इस मामले में राहुल-और त्रिवेन्द्र सरकार सवालों के घेरे में है। राहुल को क्या ये मालूम नहीं कि जिस उत्तराखंड के CaU ने सांप्रदायिकता की चिंगारी भड़काई है, उसके अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला हैं। काँग्रेस के ही हैं। त्रिवेन्द्र सरकार भी देश भर में देवभूमि पर धब्बा लगाने वाले और जबर्दस्त यूपी-क्षेत्रवाद फैलाने वाले CaU के खिलाफ तमाम धांधली की शिकायतों पर कोई कार्रवाई-जांच न कराने को ले के सवालों के घेरे में है।

CaU को मान्यता मिली थी तो खुद CM त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने माहिम के पिता PC वर्मा को मिठाई खिला के बधाई दी थी। बगल में खड़े उस वक्त के अध्यक्ष हीरा सिंह बिष्ट को अब वर्मा-शुक्ला लॉबी ने किनारे कर दिया है।

राहुल ने बिना जाफ़र-माहिम का नाम लिए ट्वीट कर क्रिकेट में सांप्रदायिकता को ले आने के लिए एक किस्म से मोदी-बीजेपी सरकार पर प्रहार किया है। उन्होंने कहा, `देश में पिछले कुछ सालों से जैसा माहौल हो गया हैं, उसने सबसे लोकप्रिय खेल क्रिकेट को भी अपने शिकंजे में ले कर कलंकित कर दिया है। भारत सभी का है। इसको खंडित न होने दें’। राहुल के हाथ में बेशक भारत का क्रिकेट नहीं है, लेकिन उनके हाथ में इतना तो है कि अपनी पार्टी के पूर्व विधायक CaU अध्यक्ष से इस बारे में जवाब तलब करें कि वह आखिर एसोसिएशन में कर क्या रहे? अध्यक्ष होने के बावजूद वह कठपुतली क्यों बने हुए हैं? उनके कारण काँग्रेस की भी छिछालेदर हो रही। जग हँसाई का पात्र बनना पड़ रहा है। गुनसोला की हकीकत ये है कि वह वर्मा-राजीव शुक्ला लॉबी की कठपुतली भर बन के रह गए हैं। उनका काम सिर्फ हाँ में हाँ मिलाना भर रह गया है।

CaU की Apex काउंसिल बैठक में जितने भी खराब और विवादित फैसले हुए, सभी उनकी ही सरपरस्ती में हुए। राजीव शुक्ला भी काँग्रेस के हैं। बोर्ड उपाध्यक्ष हैं। राहुल आखिर उनको क्यों नहीं तलब कर सकते कि उनके बोर्ड में रहते क्रिकेट में ये सब क्या हो रहा? अगर उनके वश में कुछ नहीं है तो उस क्रिकेट बोर्ड में बने हुए क्यों हैं, जिसके सचिव जय शाह (गृह मंत्री अमित शाह के बेटे) हैं। खास बात ये है कि क्रिकेट में सांप्रदायिकता की चिंगारी भड़काने वाले माहिम और पर्दे के पीछे से उत्तराखंड क्रिकेट को चला रहे उनके पिता PC वर्मा शुक्ला के ही चेले हैं। शुक्ला के एक सहारनपुरी बदनाम विश्वासपात्र ही उत्तराखंड क्रिकेट में हर किस्म का दखल दे रहा है। राहुल अगर ट्वीट कर सकते हैं तो अपने स्तर पर शुक्ला-गुनसोला जैसों पर कार्रवाई तो कर ही सकते हैं। वह ट्वीट कर के बच नहीं सकते हैं।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के बारे में कहा जा रहा है कि वह जानते-बूझते हुए भी जय शाह के कारण उत्तराखंड क्रिकेट में हो रहे कृत्यों-कारनामों-कांड-आरोपों की तरफ से आँख बंद किए हुए हैं। हालांकि,इसकी कोई मिसाल कभी सामने नहीं आई कि उन पर कोई दबाव है। आरोप इस लिए लग रहे कि सरकार चाहे तो एसोसिएशन को दो मिनट में दुरुस्त कर दे। जांच ढंग से करा दे तो कई ओहदेदारों के लिए मुसीबत हो जाएगी। सोसाइटी एक्ट में CaU का रेजिस्ट्रेशन करते समय तमाम फर्जी दस्तावेज़ जमा किए गए हैं। खुद माहिम वर्मा ने दस्तावेजों में अपने को राजपत्रित अधिकारी बताया। उपनल के MD साफ कर चुके हैं कि माहिम उनके यहाँ बतौर श्रमिक पंजीकृत थे। उनसे काम चाहे कोई भी महकमा किसी भी किस्म का ले। वोटर लिस्ट को ले के तमाम धांधलियाँ सामने आ चुकी हैं। सरकारी कर्मचारी और IAS अफसर तक को एसोसिएशन में वोटर बनाया हुआ है। राजीव शुक्ला यूपी एओसिएशन और बोर्ड में होने के बावजूद CaU में भी वोटर बना दिए गए थे। एक ही खानदान के कई रक्त संबंधी वोटर हैं। `Newsspace’ के पास इससे जुड़े सारे दस्तावेज़ हैं।

त्रिवेन्द्र इन सभी की जांच करा दें तो सोसायटी में रजिस्ट्रेशन तत्काल रद्द हो जाए। CaU की मान्यता तत्काल खारिज हो जाए। मुख्यमंत्री का क्रिकेट में दिलचस्पी तत्काल लेना दो कारणों से अनिवार्य हो गया है। 1-वह खुद भी United Cricket Association के अध्यक्ष हैं। क्रिकेट के हित में उन्होंने अपने एसोसिएशन का समर्थन CaU को दिया था। CaU पर कोई भी आरोप लगता है तो उससे मुख्यमंत्री भी अछूते नहीं रह सकते हैं। 2-देश भर में क्रिकेट को ले के ही उत्तराखंड की बदनामी हो रही है। उनके भतीजे संजय रावत और उनकी एसोसिएशन के अवनीश वर्मा अपेक्स काउंसिल में हैं। रोहित सिंह भी उनकी एसोसिएशन से ही हैं। CaU की कोई भी गलत हरकत या उसके चलते होने वाली बदनामी से न तो उत्तराखंड न ही मुख्यमंत्री कन्नी काट सकते हैं। खास बात ये है कि खुद सुप्रीम कोर्ट को उसकी ही विनोद राय कमेटी ने रिपोर्ट दे के कहा है कि उत्तराखंड में सब गोलमाल चल रहा। माहिम चुनाव लड़ने के ही अयोग्य है। राजीव शुक्ला का बहुत ज्यादा दखल उत्तराखंड में है।

CaU की मान्यता को ले के भी तमाम सवाल हैं। उत्तरांचल क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव चंद्रकांत आर्य ने `Newsspace’ से कहा, `बोर्ड ने CaU को गलत ढंग से मान्यता दी है। हम इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में गए हैं। उम्मीद है कि वहाँ इंसाफ मिल जाएगा’। उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव दिव्य नौटियाल ने कहा, `बेहतर होगा कि बोर्ड CaU की मान्यता तत्काल रद्द कर नए सिरे से Concensus Committe का गठन कर मानिता विवाद हल होने तक उसको उत्तराखंड क्रिकेट की कमान सौंपे। CaU पर शुरू से ही एक के बाद एक कई गंभीर आरोप लग चुके हैं।’ उत्तराखंड कॉंग्रेस की भी खामोशी हैरान नहीं करती है। मोहल्लों-गलियों में नाली-खड़ंजों पर बयान जारी करने वाले प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह या किसी भी पार्टी ओहदेदार-प्रवक्ता ने इतने बड़े मुद्दे पर अभी तक जुबान नहीं खोली है। राहुल गांधी-त्रिवेन्द्र पर अब नजर रहेगी कि वे इसी तरह सोए रहेंगे या सनसनीखेज क्रिकेट मसले पर कोई कार्रवाई भी अपने स्तर पर करेंगे। 

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