वक्त पर पूरा करने-गुणवत्ता का ख्याल रखने की हिदायत

DM करेंगे हर 15 दिन में प्रगति समीक्षा:पोर्टल पर रिपोर्ट अपडेट की जाएगी

Chetan Gurung

विधानसभा चुनाव करीब आए तो मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने भी अपनी गाड़ी की रफ्तार बढ़ा दी है। उनके पाँव पिछले कुछ हफ्तों से लग रहा कि एक्सिलरेटर से हटने को राजी नहीं है। वह घोषणाएँ कर रहे। प्रदेश भ्रमण-रात्री विश्राम कर रहे। चमोली आपदा में उन्होंने कमांडर की तरह कमान संभाली। आज सचिवालय में पिथौरागढ़, बागेश्वर एवं चंपावत जिलों में खुद की घोषणाओं की प्रगति की समीक्षा की।

मुखयांतरि ने अपने साथ बैठक में विधायक बलवंत सिंह भौर्याल, चन्दन राम दास,  कैलाश चन्द्र गहतौड़ी, वर्चुअल माध्यम से विधायक चन्द्रा पंत, बिशन सिंह चुफाल को भी लिया। समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री घोषणाओं पर अमल को ले के गंभीर-सख्त नजर आए। उन्होंने अधिकारियों को अपने ऐलानों को तय समय में पूरा करने के निर्देश दिए।

साथ ही स्थानीय स्तर पर समस्या के त्वरित समाधान के लिए संबंधित विधायकगणों से समन्वय स्थापित करने के निर्देश दे के विधायकों की अहमियत को बढ़ा दी। उन्होंने चेताया कि वह खुद हर माह सीएम घोषणाओं की समीक्षा करेंगे। कार्यों में तेजी लाने के लिए जिलाधिकारियों को हर 15 दिनों में घोषणाओं की कार्य प्रगति की समीक्षा करने के निर्देश दिए। सीएम घोषणा पोर्टल पर सभी घोषणाओं को अपडेट रखने के निर्देश भी दिए। बैठक में बताया गया कि पिथौरागढ़ में मुख्यमंत्री की 152 में से 98 घोषणाएं पूर्ण हो चुकी है। बागेश्वर में 58 में से 36 और चम्पावत में 88 में से 53 घोषणाएं पूर्ण हो चुकी हैं।  

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि घोषणाओं को पूरा करने के साथ ही गुणवत्ता का भी विशेष ख्याल रखा जाए। धार्मिक एवं पर्यटक स्थलों पर पेयजल, आवागमन एवं अन्य सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाए। शौचालयों के निर्माण के साथ ही उनके रख-रखाव की व्यवस्था सुनिश्चित हों। पेयजल, स्वास्थ्य एवं शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं वाले कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।

बैठक में मुख्य सचिव ओम प्रकाश, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव आरके सुधांशु, अमित नेगी, दिलीप जावलकर, हरबंस सिंह चुघ, प्रमुख वन संरक्षक राजीव भरतरी, कुमाऊँ के कमिश्नर अरविन्द सिंह ह्यांकी भी उपस्थित थे। त्रिवेन्द्र के कामकाज की रफ्तार अचानक बढ़ी देख के खुद पार्टी के ही कई नेता भी बेचैन हैं। उनके पास त्रिवेन्द्र को ले के आला कमान से शिकायत का एक बड़ा हथियार उनके कामकाज की धीमी रफ्तार ही थी। त्रिवेन्द्र इस शिकायत को ही खत्म कर देते हैं तो उनके विरोधियों में निराशा व्याप्त होना स्वाभाविक है।

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