उत्तराखंड युवा संगठन ने CM को भेजा आरोपों से सजा मेल: सख्त कार्रवाई की मांग

जांच में सोसाइटी एक्ट-सांप्रदायिकता भड़काने-मनमानियों पर नप सकते माहिम और अध्यक्ष जोत सिंह

ज्ञानेन्द्र-निष्ठा को मैंने नहीं भेजा:अशोक मल्होत्रा (ICA अध्यक्ष)

Chetan Gurung

देश भर में इस वक्त बहुत गलत कारणों से उत्तराखंड क्रिकेट सुर्खियों में है। बड़े-बड़े National Daily और News चैनल की स्टोरी उत्तराखंड क्रिकेट में चल रही धांधलियों-इसके खिलाफ Head Coach और पूर्व टेस्ट ओपनर वासिम जाफ़र का Cricket Association Uttarakhand के सचिव माहिम वर्मा की पोल खोलते इस्तीफे पर धड़ल्ले से चल रहीं। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने PMO की तरफ से इस मामले में दिलचस्पी दिखाने के बाद अनौपचारिक तौर पर जांच शुरू करा दी है। अब उनके पास औपचारिक शिकायत भी CaU और माहिम को ले के पहुँच गई है। उत्तराखण्ड युवा संगठन ने CaU-माहिम के खिलाफ तमाम आरोप लगाने के साथ ही मुख्यमंत्री से सख्त जांच कराने की मांग की है।

CM त्रिवेन्द्र सिंह रावत:क्रिकेट में शिकायतों से नाराज:जांच के लिए तैयार

सूत्रों के मुताबिक सरकार के निर्देश पर खामोशी के साथ खुफिया महकमा CaU-माहिम के खेल और आरोपों की हकीकत जानने में जुट गया है। मुख्यमंत्री ने CaU के उपाध्यक्ष संजय रावत-कोषाध्यक्ष पृथ्वी सिंह नेगी और संयुक्त सचिव अवनीश वर्मा तथा अन्य को तलब कर पूरी जानकारी पहले ही ले ली है। खास बात ये है कि उन्होंने अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला और सचिव माहिम को नहीं बुलाया। इससे जाहिर होता है कि सरकार और खुद मुख्यमंत्री दोनों को आरोपों के दायरे से बाहर नहीं देख रहे। त्रिवेन्द्र ने CaU में चल रहे गड़बड़झाले से नाराज धड़े से मुलाक़ात में कहा था कि आधिकारिक तौर पर कोई शिकायत सरकार के पास आती है तो वह सरकार के स्तर पर विधिवत जांच बिठा देंगे।

ICA President अशोक मल्होत्रा:ज्ञानेन्द्र-निष्ठा को मैंने नहीं भेजा

`Newsspace’ ने इस पर पूरी रिपोर्ट प्रकाशित की। इसके सामने आते ही CaU के ही सदस्य ओमप्रकाश सूदी सामने आ गए। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन में यूपी लॉबी-शुक्ला-वर्मा गुट मनमानी कर रहा। उत्तराखंड के प्रतिभावान खिलाड़ियों के साथ ना-इंसाफ़ी हो रही। टीम चयन से ले के नियुक्तियों तक में धांधली हो रही। 41 में से 5 वोट सिर्फ माहिम वर्मा के परिवार से हैं। ये सभी रक्त संबंधी हैं। एक भतीजा न्यूजीलैंड में है। उत्तराखंड युवा संगठन के सचिव गोपाल सिंह गैलाकोटी ने मुख्यमंत्री को मेल से शिकायत की है कि माहिम और इसके अन्य ओहदेदारों के खिलाफ सख्त जांच होनी चाहिए। खुद इस्तीफे में वासिम जाफ़र ने साफ आरोप लगाया है कि टीम चयन में माहिम वर्मा का नाजायज दखल रहता था।

जोत सिंह गुनसोला
माहिम वर्मा (दाएँ)

पूर्व चयनकर्ता और यूपी के रणजी खिलाड़ी मनोज मुद्गल ने भी साफ तौर पर आरोप लगाया है कि उन्होंने सिर्फ 2-3 दिनों में ही चयनकर्ता की कुर्सी इसलिए छोड़ दी थी कि चयन में सहारनपुर के अकरम सैफी माहिम के साथ मिल के लगातार दबाव बना रहा था कि जो वे चाहते हैं, उनका ही चयन किया जाए। सैफी को बोर्ड उपाध्यक्ष और काँग्रेस नेता राजीव शुक्ला का बहुत करीबी माना जाता है। अकरम के खिलाफ यूपी में पहले से ही घूसख़ोरी-चयन में दखल देने समेत अन्य कई गंभीर आरोप लगे हैं। ये भी आरोप है कि माहिम और अध्यक्ष गुनसोला उसकी ही कठपुतली हैं।

माहिम ने जाफ़र पर ये आरोप लगा के देश भर में खूब सुर्खियां बटोरी हैं कि जाफ़र मैदान में मैच रोक के नमाज पढ़ते थे। मौलवी बुलाते थे। माहिम के आरोपों की हवा खुद टीम के कप्तान इकबाल अब्दुल्ला ने निकाल दी है। अब्दुल्ला ने कह दिया है कि जाफ़र ने किसी को नहीं बुलाया। मौलवी उन्होंने बुलाए थे। वह भी अभ्यास मैच के दौरान नहीं। मैच खत्म होने के बाद। ऐसा दो बार हुआ। ऐसा करने की पूर्व मंजूरी टीम मैनेजर नवनीत मिश्रा से ली गई थी। मिश्रा के बारे में पता चला है कि वह अविरल क्लासेज के मालिक का भाई है। अविरल क्लासेज दो साल पहले तब विवादों में आया था, जब माहिम के बारे में कहा जाता था कि वह एसोसिएशन के कामकाज को वहीं बैठ के अंजाम देते हैं।

Rahul Gandhi:जाफ़र-माहिम मामले में ट्वीट कर उत्तराखंड क्रिकेट की गड़बड़ियों को उछाल दिया

अब्दुल्ला का बयान इसलिए अहम है कि माहिम या CAU ने न तो उसके बयान पर असहमति जताई न ही उसके खिलाफ कार्रवाई का फैसला किया है। उल्टे माहिम अब सफाई देते फिर रहे कि उन्होंने जाफ़र पर सांप्रदायिक होने का कोई आरोप नहीं लगाया है। जाफ़र वाला मामला इस कदर आग पकड़ चुका है कि अनिल कुंबले सरीखे पूर्व भारतीय कप्तान के साथ ही कई अन्य दिग्गज पूर्व क्रिकेटर और काँग्रेस के दिग्गज नेता राहुल गांधी भी इस मामले में कूद चुके हैं। राहुल ने तो इस मामले में सीधे एक किस्म से मोदी सरकार-बीजेपी पर प्रहार कर दिया है। इसके बाद ही PMO-मुख्यमंत्री भी हरकत में आए हैं। CaU की Apex Council भी विवादों में है।

काउंसिल में दो ज्ञानेन्द्र पांडे और निष्ठा फ़रासी भी शामिल हैं। दोनों न सिर्फ वोट भी डाल रहे बल्कि मैदान में भी जा रहे। कोषाध्यक्ष नेगी और सूदी का कहना है कि मनोनीत सदस्यों को वोट डालने का हक ही नहीं है। दोनों किस तरह वोट डाल रहे। दोनों मैदान में भी नहीं जा सकते हैं। पांडे यूपी टीम के भी मैनेजर हैं। इस तरह वह उत्तराखंड में किसी भी तरह अपनी भूमिका निभा नहीं सकते हैं। निष्ठा सरकारी कर्मचारी है। सरकारी कर्मचारी न एसोसिएशन न ही Apex काउंसिल का हिस्सा हो सकते हैं। इस्म मामले में `Newsspace’ ने Indian Cricketer Association के अध्यक्ष अशोक मल्होत्रा से फोन पर बात की। वह इस मामले को टालते नजर आए।

उन्होंने कहा कि खिलाड़ी की मर्जी है कि वह दो राज्यों में भूमिका निभाना चाहता ही कि नहीं। जब उनसे पूछा गया कि अगर यूपी-उत्तराखंड में ही मैच हो तो ज्ञानेन्द्र क्या करेंगे? अशोक ने कहा कि आप मुझे क्यों विवादों में घसीट रहे? मेरे नाम पर बिल क्यों फाड़ रहे? उन्होंने सफाई दी कि ज्ञानेन्द्र-निष्ठा को उन्होंने उत्तराखंड नहीं भेजा। ये बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का फैसला था। आधिकारिक शिकायत मिलने के बाद अब सरकार CaU-माहिम और अन्य ओहदेदारों के खिलाफ विधिवत जांच-कार्रवाई कर सकती है। जांच में कई बिन्दुओं पर एसोसिएशन और माहिम को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

विकेट पर पूजा कराई गई और CaU की साइट पर अपलोड की गई

सबसे संगीन मामला क्रिकेट को सांप्रदायिक रंग देना है। ये साफ हो चुका है कि 20 अक्टूबर 2020 को खुद CaU ने अभिमन्यु क्रिकेट एकेडमी में कैंप की शुरुआत में पिच पर ही पूजा-अर्चना की थी। नारियल फोड़े गए और विकेट पर मालाएँ चढ़ाई गईं। मैदान पर मौलवी बुलाने-नमाज पढ़ने की पुष्टि नहीं हुई है लेकिन पिच पर पूजा-अर्चना की तस्वीरें खुद Association की आधिकारिक वेब साइट पर हैं। माहिम के जाफ़र पर मजहबी होने के आरोपों से पूरे भारत की क्रिकेट पर काला धब्बा लगा है।

सरकार सोसाइटी एक्ट के मुताबिक अगर जांच करती है तो CaU का पंजीकरण रद्द होना तय है। सोसाइटी एक्ट में पंजीकरण होने के कारण CaU को उत्तराखंड सोसाइटी एक्ट के अंतर्गत कार्य करना बाध्यता है। Newsspace के पास मौजूद दस्तावेजों के मुताबिक माहिम और CaU ने इसके कई प्रावधानों का उल्लंघन किया है। 5 रक्त संबंधियों और यूपीसीए के भी सदस्यों को CaU में शामिल किया गया था। कई दस्तखत  माहिम ने संयुक्त सचिव के तौर पर किए। जब वह सदस्य भी नहीं थे। इसके साथ ही एक ही सदस्य कई जिलों में हैं।     

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