खबरदार:हड़ताल-आंदोलन पर गए या समर्थन में छुट्टी ली तो `गैर हाजिर’ माने जाएंगे

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CS ने जारी किया फरमान:रोक दी जाएगी मार्च की Salary

Chetan Gurung

तीरथ सरकार ने अफसरों-कर्मचारियों-शिक्षकों के आंदोलनों-हड़ताल पर रोक लगाते हुए इसमें शरीक होने पर गैर हाजिर मानने और मार्च की तनख्वाह न देने का आदेश जारी कर दिया। CS ओमप्रकाश की तरफ से जारी आदेश में साफ कहा गया है कि हड़ताल के समर्थन में छुट्टी लेना भी हड़ताल में शरीक होना माना जाएगा।

आदेश के मुताबिक हड़ताल-आंदोलन से जन विकास से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ता है। दूसरी तरफ आम लोगों को भी दिक्कत होती है। हड़ताल राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली के अंतर्गत प्रतिबंधित है। सभी विभागों के सचिवों-HoD’s और अन्य संबन्धित आला अफसरों को भेजे गए आदेश में हिदायत दी गई है कि जो भी कार्मिक हड़ताल-आंदोलन के समर्थन में छुट्टी भी लेगा तो उसको उस दिन का वेतन न दिया जाए। साथ ही मार्च का वेतन भी रोक दिया जाए।

मुख्य सचिव ने No Work-No Pay आदेश का पालन सख्ती से करने के आदेश दिए हैं। तीरथ सरकार के पास अब विधानसभा आम चुनाव से पूर्व वक्त कम बच रहा है। कई चालू और भावी योजनाओं को तेजी से अंजाम देने की कोशिशों को अमली जमा भी पहनाना है। चुनावी माहौल देख दूसरी तरफ कर्मचारी संगठन सरकार पर दबाव बनाने के लिए आंदोलन और हड़ताल का सहारा लेते रहते हैं। इसको देख के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने ये कदम उठाया है।

त्रिवेन्द्र सिंह रावत को हटा के तीरथ को लाने के पीछे हाई कमान का मकसद आम लोगों को राहत देना, पार्टी कार्यकर्ताओं को संतुष्ट करना और विकास योजनाओं में रफ्तार लाना है। हड़ताल-आंदोलनों पर सख्ती से रोक न लगने पर नई सरकार के लिए इन सभी मसलों पर नतीजे दे पाना संभव नहीं हो पाएगा।

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