कल शाही स्नान नहीं कर पाएंगे:नेपाल के महाराजा ज्ञानेन्द्र भी कोरोना खतरे के दायरे में!

आज निरंजनी अखाड़े के पीठाधीश्वर कैलाशानन्द से की श्री 5 सरकार ने मुलाक़ात

RSS प्रमुख मोहन भागवत भी कुम्भ से लौट के कोरोना का शिकार हो के Isolation में हैं

Chetan Gurung

शाही स्नान से एक दिन पहले कोरोना पॉज़िटिव हो जाने के कारण अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि कल निरंजनी अखाड़े के द्वितीय शाही स्नान में शरीक नहीं हो पाएंगे। निरंजनी के द्वितीय शाही स्नान में शरीक होने आए नेपाल के महाराज ज्ञानेन्द्र वीर विक्रम शाहदेव को भी अब बेहद सतर्क रहने की जरूरत होगी। वह इस अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानन्द गिरि महाराज से आज मिले। नरेंद्र गिरि के भी कोरोना का शिकार होने से ये आशंका और बल पकड़ गई है कि अखाड़े में कोई न कोई बाबा-संत जरूर कोरोना फैलाने के लिए जिम्मेदार हैं। जो `Super Spreader’ भी हैं। इस आशंका को बल इसलिए भी मिल रहा है कि हाल ही में RSS प्रमुख मोहन भागवत भी इस अखाड़े से लौटते ही कोरोना पॉज़िटिव हो के आइसोलेशन में हैं।  

King of Nepal Gyanendra in Haridwar today

ऐसा शायद इतिहास में पहली बार होगा कि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष शाही स्नान स्नान का हिस्सा नहीं हो पाएंगे। इसके लिए कोरोना जिम्मेदार होगा। इससे पहले इस अखाड़ा में जो भी बड़े दिग्गज आए, सभी कोरोना पॉज़िटिव हुए। इनमें बीजेपी प्रमुख जेपी नड्डा, सीएम तीरथ सिंह रावत, उनसे पहले के सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत, मोहन भागवत और अब खुद अखाड़ा परिषद अध्यक्ष इसके शिकार हो गए। इसके चलते ये इस आशंका को बहुत बल मिलना स्वाभाविक है कि आखिर इस अखाड़े में जाने वाले बड़े नाम कोरोना के शिकार कैसे और क्यों हो रहे?

आलम ये है कि इस अखाड़े में जाना खतरे से खाली नहीं रह गया है। नया खतरा नेपाल के महाराजा के लिए उत्पन्न हो गया है। वह निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानन्द गिरि से आज मिले। कैलाशानन्द और नरेंद्र गिरि की नियमित मुलाक़ात होती रहती है। ऐसे में कैलाशानन्द भी कोरोना खतरे के दायरे में आ चुके हैं, कहा जाए तो गलत नहीं होगा। कोरोना प्रोटोकॉल अगर सख्ती से बाबाओं-संतों-साधुओं-महंतों-अखाड़ों पर लागू हो जाए तो आधे से अधिक को आइसोलेशन में रहना पड़ जाएगा। वे कोरोना लहर की जबर्दस्त वापसी के बावजूद न सोशल डिस्टेन्सिंग का पालन करते हैं न ही मास्क का इस्तेमाल करने को राजी हैं।

इस किस्म की भयानक लापरवाही और अखाड़ों-संतों के सामने सरकार के दंडवत-आत्म समर्पण करने से ही कोरोना का खतरा लगातार बढ़ रहा। महामारी अधिक खतरनाक ढंग से फ़ैल रहा। उत्तराखंड में तीन जिलों में रात का कर्फ़्यू लगाना पड़ गया। स्कूल बंद करने पड़े हैं। कल निरंजनी अखाड़े की पेशवाई में जबर्दस्त भीड़ रहने और कोरोना के और अधिक फैलने की आशंका से कोई इनकार नहीं कर सकता है। सरकार की लाचारी समझने के लिए इतना काफी है कि कुम्भ के चलते हरिद्वार में रात का कर्फ़्यू तक नहीं लगा पा रही है। भले कोरोना का खतरा वही है। वहीं से कोरोना के देश भर में फैलने की आशंका भी जताई जा रही है।

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