पड़ताल::टीम मोदी में शामिल होंगे त्रिवेन्द्र-अनिल बलूनी!निशंक के रहते एक को ही मौका मुमकिन

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उत्तराखंड में BJP की कमजोर पड़ती छवि मोदी-शाह को कर सकती मजबूर 

सरकार किसी भी सूरत में हाथ से जाने नहीं देना चाहेंगे दोनों:केदारनाथ-धार्मिक आस्था भी बड़ा कारण

Chetan Gurung

उत्तराखंड और केदारनाथ धाम के प्रति PM नरेंद्र मोदी की आस्था दुनिया जानती है
CM Tirath Singh Rawat::विधानसभा चुनाव में BJP के CM चेहरा बने रहेंगे!

केंद्र सरकार में मंत्रिपरिषद में फेरबदल की आहट के चलते माना जा रहा है कि सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि उत्तराखंड पर भी इसकी बौछारें पड़ सकती हैं। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत इन दिनों बेहद सक्रिय हैं। वह पिछले कुछ दिनों से कुमायूं के तूफानी दौरे में छाए हुए हैं। अनिल पहले से ही ठोस अंदाज में खामोशी संग काम करते रहे हैं। दोनों को क्या PM नरेंद्र मोदी अपनी टीम का हिस्सा बनाएँगे! या रमेश पोखरियाल निशंक के रहते सिर्फ एक को ही मौका मिल सकेगा! संभावनाएं ये भी हैं कि त्रिवेन्द्र को संगठन में अहम ज़िम्मेदारी दे दी जाए। उनको और अनिल को एक साथ टीम मोदी में जगह सिर्फ निशंक के हटने की सूरत में ही मिल सकती है।

केन्द्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक के रहते 2 नए मंत्रियों की उत्तराखंड से मोदी मंत्रिपरिषद में जगह नामुमकिन सी है

उत्तराखंड में भले लोकसभा की 5 सीटें ही हैं। छोटा राज्य है।  फिर भी मोदी-शाह-संघ के लिए बेहद अहमियत रखता है। हिंदुओं की पवित्र और जीवनदायिनी गंगा यहीं बनती है। केदारनाथ धाम के प्रति खुद मोदी की जबर्दस्त आस्था है। ये दुनिया जान चुकी है। हरिद्वार में कुम्भ मेला हर छह साल में होता है। मोदी-शाह-BJP-संघ के करीबी पतंजलि वाले चर्चित योगी बाबा रामदेव का मुख्यलाय (पतंजलि) यहीं है। एक पहलू और है। जिस राज्य में पार्टी की सरकार हो, उसको आखिर कोई भी क्यों अपने हाथ से जाने देना चाहेगा? ये सब पहलू ऐसे हैं जो देवभूमि को BJP ही नहीं बल्कि Congress के लिए भी अहम बनाते हैं।

अनिल बलूनी उत्तराखंड हितों को ले के अपनी सक्रियता के चलते काफी लोकप्रिय चेहरा हैं

पिछले कुछ महीनों से BJP और उसकी सरकार के लिए बहुत विकट वक्त चल रहा। कोरोना जैसी महामारी के बीच जिद पकड़ के सरकार का हरिद्वार कुम्भ भव्य अंदाज में कराना, फिर लाखों फर्जी RT-PCR टेस्ट का शर्मनाक खुलासा, हजारों की मौत कोरोना से हो जाना, लाखों का कोरोना पॉज़िटिव होना, फिर नई बनी तीरथ सरकार के मंत्रियों की नासमझी वाले बयानों-मंत्रियों में ही टकराव-मंत्री और अपने ही विधायकों में खुले आम कड़वाहट-झगड़े-कुम्भ आयोजन और कोरोना टेस्ट घोटाले पर CM तीरथ सिंह रावत और त्रिवेन्द्र में एक-दूसरे को गलत ठहराने और अपना पल्ला झाड़ने की कोशिशों ने BJP को बैकफुट पर ला खड़ा किया है।

आज हालात ये है कि बीजेपी के पास विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए बतौर CM कोई प्रभावी चेहरा नहीं है। भले त्रिवेन्द्र ने कहा कि चुनाव में तीरथ चेहरा होंगे, लेकिन इसमें गंभीरता कम और सवाल से पिंड छुड़ाने की कोशिश अधिक दिखाई देती है। CM कौन होगा, इस बारे में बोलने के लिए सिर्फ संगठन अधिकृत है। संगठन में फिलहाल त्रिवेन्द्र कुछ नहीं हैं। बीजेपी को खुद भी एहसास है कि देश का सबसे बड़ा ब्रांड `modi’ अब उत्तराखंड में भी वैसा विश्वसनीय नहीं रह गया है, जैसा पिछले विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में था। अकेले इस नाम के सहारे अब BJP की गाड़ी Victory Stand तक नहीं पहुँच सकती।

पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों ने ब्रांड मोदी को जबर्दस्त फीका किया है। UP के CM योगी आदित्यनाथ ने अपने तेवर दिखा के मोदी के कद और प्रतिष्ठा में जबर्दस्त सेंध लगा डाली है। कोरोना को काबू करने में मोदी सरकार की नाकामी और बेरोगारी-महंगाई से देश उबला हुआ है। चीन की लद्दाख में घुसपैठ तथा भारत सरकार का उसके सामने कठोर भाव में खड़ा न होने से मोदी की He Man वाली छवि भी बहुत प्रभावित हुई। रही-सही कसर कश्मीर के कथित गुपकार गैंग (कश्मीरी सियासी दिग्गजों को मोदी-शाह-बीजेपी इसी नाम से पुकारते थे) को दिल्ली बुला के मोदी-शाह का उनका गर्मजोशी से मुस्कुराते हुए स्वागत करने ने पूरी कर दी है।

जिनको देश द्रोही कहा हो, जिनको कैद रखा हो, उनको क्यों इतनी तवज्जो आखिर मोदी सरकार दे रही, ये कई मोदी समर्थकों का भी सिर दुखा रही है। कहने का मतलब ये है कि उत्तराखंड में फतह हासिल करने के लिए यहीं के बीजेपी नेताओं को अपना दम तो हर हाल में दिखाना होगा। BJP और मोदी-शाह को तरकीबें तलाशनी होंगी। मोदी को उत्तराखंड युवावस्था से ही भाता रहा है। वह खुद बार-बार कहते रहे हैं। यहाँ उनको आध्यात्मिक शांति-नई ऊर्जा और सियासी ताकत भी मिलती है। इस राज्य को वह कभी भी हाथ से नहीं जाने देना चाहेंगे। पार्टी की छवि को बेहतर बनाने और सियासी आपदा प्रबंधन के लिए वह कुछ बड़े फैसले कर सकते हैं।

इस कड़ी में ही त्रिवेन्द्र-अनिल की लॉटरी लग सकती है। त्रिवेन्द्र अभी सियासत के नजरिए से युवा हैं। सीएम न रहने के बाद अब वह राज्य में महज विधायक या फिर मंत्री बन के रहेंगे, ये सोचा नहीं जा सकता है। उनकी भूमिका अब या तो केन्द्रीय मंत्री की या फिर संगठन में अहम ओहदे पर बैठने की ही हो सकती है। वैसे मुख्यमंत्री भी फिर कभी बन सकते हैं। बीजेपी में ये परंपरा BC Khanduri को हटा निशंक को ला के फिर चुनाव से 6 महीने पहले निशंक को बेदखल कर वापिस BCK को 2011 में ला के बीजेपी शुरू कर ही चुकी है। जिस तरह त्रिवेन्द्र अचानक ही सियासी तौर पर बेहद सक्रिय हो गए दिख रहे, उससे लोग और पार्टी के भी कई क्षत्रप भौंचक्के हैं। सामाजिक और राजनीतिक आयोजनों में उनकी सक्रियता देखने लायक है।

सोचा जाने लगा है कि क्या TSR को कुछ अहम सुराग हाई कमान से लगे हैं? या फिर कोई ईशारा मिला है! विधायक बनने के लिए कोई इस कदर जान नहीं झोंक देता। त्रिवेन्द्र ने पहले कभी ऐसा नहीं किया। वह अपनी विधानसभा क्षेत्र तक सीमित रहने वालों में शुमार होते थे। इन दिनों वह खुद को शक्तिशाली-लोकप्रिय क्षत्रप साबित करने की कोशिश कर रहे दिखते हैं। त्रिवेन्द्र के अनुभव-संघ की पृष्ठभूमि और उत्तराखंड को हर हाल में फिर विधानसभा चुनाव के जरिये फतह करने की बीजेपी-संघ की कोशिशों के चलते वह मोदी की टीम में आ जाए तो हैरानी नहीं होनी चाहिए। हो सकता है कि त्रिवेन्द्र इसी लिए खुद की स्वीकार्यता साबित करने के लिए व्यापक दौरे कर रहे हों, सियासी तौर पर खुद को व्यस्त रख रहे। बलूनी को भी उनकी काबिलियत के साथ ही बीजेपी के वॉर बुक में उत्तराखंड प्रमुखता से शामिल है, ये बताने के लिए केंद्र सरकार में जगह दी जा सकती है।

लोचा सिर्फ इस पर हो सकता है कि उत्तराखंड जितना अहम भी क्यों न हो, यहाँ से 3 मंत्री कभी नहीं बनाए जाएंगे। त्रिवेन्द्र-अनिल को एक साथ टीम मोदी में जगह एक ही शर्त पर मिल सकती है। अगर निशंक को उनके लिए जगह खाली करने के लिए कहा जाता है। निशंक शिक्षा मंत्री हैं और उत्तराखंड के सीएम रह चुके हैं। उनकी उम्र भी त्रिवेन्द्र के आसपास है। लंबा सियासी जीवन सामने है। वह मोदी मंत्रिमंडल से तभी हटाए जा सकते हैं, जब उनको उत्तराखंड की सियासत में प्रमुख भूमिका सौंपने पर फैसला होगा। मोदी-शाह-संघ अच्छे से जानते हैं कि उत्तराखंड को दुबारा फतह करने के लिए यहाँ के लोगों में अतिरिक्त विश्वास जगाना होगा। इसके लिए मंत्री अधिक बनाना और स्पेशल पैकेज राज्य के लिए दो उपाय प्रमुख हो सकते हैं।    

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