PWD::हरिओम के बिना गुजारा नहीं! तो सायोनारा Fundamental Rules-Financial Handbook!!

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सेवा विस्तार का तो प्रावधान ही नहीं सरकार में!Rule पर भारी पड़ गया GO!

तीरथ जी क्या Zero टालरेंस की पॉलिसी त्रिवेन्द्र संग विदा हो गई?

Chetan Gurung

PWD के प्रमुख अभियंता हरिओम शर्मा के बिना तीरथ सरकार का गुजारा नहीं हो रहा होगा, मान लेते हैं, लेकिन इतने महान इंजीनियर को सेवा विस्तार देने के साथ ही सरकार ने सेवा विस्तार से जुड़े अपने कायदे-कानून और उसके कील-कांटे भी दुरुस्त किए कि नहीं? या यूं ही सरकार के अनिवार्य रिटायरमेंट रूल को दरकिनार कर महज GO (शासनादेश) के सहारे इतना बड़ा लाभ दे दिया गया? सरकार लाख कागजी पेट भरे कि ये GO दृष्टांत नहीं बनेगा लेकिन जब भी भविष्य में भी सरकार को अपने किसी लाडले या विश्वासपात्र को रिटायरमेंट के बावजूद Cadre पोस्ट पर बनाए रखना होगा, ये फॉर्मूला सदा ही हथियार बनेगा।

हरिओम कल यानि 30 जून को रिटायर हो रहे थे। 60 साल हो रहे। सरकार है कि उनकी काबिलियत-योग्यता और न जाने किस-किस गुण पर फिदा-मेहरबान हो गई। उनके लिए GO निकाल डाला कि राज्य सेक्टर की कई परियोजनाएं इस वक्त चल रहीं। केंद्र की भी All Weather Road-CRF संचालित हो रही हैं। उनको वक्त पर पूरा करने में कोरोना LockDown आड़े आ गया। इन परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए हरिओम की काबिलियत और अनुभव की जरूरत है। इसलिए उनको 3 महीने का सेवा विस्तार दिया जाता है। हकीकात ये है कि उत्तराखंड में सेवा विस्तार की व्यवस्था को UP से अलग होते ही शायद मधुकर गुप्ता के मुख्य सचिव रहने के दौरान (2002-03) खत्म कर दिया गया था। ऐसा इसमें चलने वाले मोटे खेल को न होने देने के लिए तभी सोच-समझ के किया गया था।

हरिओम को सेवा विस्तार का मामला महज 3 महीने का भी नहीं है। इसको आगे भी बढ़ाया जाता रहे तो ताज्जुब नहीं। GO में कहने को तो ये बिन्दु भी डाला है कि सेवा विस्तार को 1 महीने का वेतन दे के पहले भी समाप्त किया जा सकता है लेकिन चतुराई तो इस बिन्दु पर है, जिसमें कहा गया है कि सेवा विस्तार को 3 महीने से अन्यून (यानि बढ़ाना) भी किया जा सकता है। एक पुछल्ला भी लगा दिया कि ये सेवा विस्तार विशेष हालात में किया जा रहा है। इसको नजीर नहीं माना जाएगा। शायद सरकार भूल गई कि बेहद चर्चित किस्म के एक अफसर SD Sharma कभी दिल्ली में हुआ करते थे। ARC का जिम्मा हुआ करता था। सरकार में पकड़ के मामले में हरिओम जैसे ही हुआ करते थे।

SD को भी सेवा विस्तार दिया गया था। देते समय तब भी इसको नजीर नहीं समझा जाएगा ही कहा गया था। 5-6 साल पुरानी बात है ये। सरकार की कायदे-कानून-प्रावधानों को ढंग से जानने और समझने वालों के मुताबिक न SD का सेवा विस्तार सही था न हरिओम का। हरिओम अगर वाकई इस कदर काबिल हैं तो फिर LockDown के दौरान तो निर्माण कार्यों पर रोक थी नहीं। बल्कि गाड़ियों का आना-जाना तकरीबन बंद था। प्रोजेक्ट तो और दुगुनी रफ्तार से पूरे होने चाहिए थे। हरिओम ये मौका कैसे चूक गए! सरकार ने इस कोण पर कभी सोचा? अगर वाकई हरिओम इस कदर जबर्दस्त-काबिल शख्सियत हैं। अभी ये साफ नहीं हुआ है कि PWD के प्रमुख अभियंता की कैडर पोस्ट पर रिटायर हो रहे हरिओम को बनाए रखने के लिए वित्त विभाग की मंजूरी-अनुमोदन लिया गया है कि नहीं।

Financial Handbook और Fundamental Rules से जुड़ा मामला होने और सरकार में सेवा विस्तार का कोई प्रावधान न होने से ये एक किस्म से अवैधानिक फैसला कहा जा सकता है। इस तरह के प्रस्तावों की फाइल बनाई जानी होती है जिसको वित्त विभाग जांच-परख के अनुमोदन देता है। विशेषज्ञों की राय में आने वाले विधानसभा चुनाव में ये मामला भी प्रमुख मुद्दा बन सकता है। PWD में ऐसी मलाईदार-रसूख वाली कुर्सी पर बिना किसी प्रावधान के अपनी मर्जी से सेवा विस्तार दे दिया जाना Audit Objection तो बनेगा ही। नहीं बनता है तो फिर Audit वालों की ही ACR खराब की जानी चाहिए। खतरा तो महालेखा नियंत्रक (AG) का पैरा बनने का भी रहेगा। विपक्ष ने इस मुद्दे को ढंग से उठा लिया तो इसका जवाब देते सरकार से विधानसभा सत्र के दौरान सदन के भीतर-बाहर शायद ही बनेगा।

सरकार का रूल है-`60 साल की उम्र पूरी होने पर अनिवार्य सेवा निवृत्ति होगी’। इसमें सेवा विस्तार का कोई विकल्प या खिड़की खोलने का प्रावधान ही नहीं है। तो फिर किस बिना पर सेवा विस्तार हो गया? Doctors-शिक्षकों का सेवा विस्तार होता है लेकिन वह अलग ही किस्म का मसला है। उनमें भी शर्तें हैं। सेवा निवृत्ति के बाद सेवा विस्तार का प्रावधान सिर्फ IAS-IPS Cadre (All India Service) में है। इसमें भारत सरकार की भूमिका अहम होती है। PWD के इंजीनियरों के सेवा विस्तार का मामला तो राज्य सरकार से खालिस ढंग से जुड़ा है। नृप सिंह नपल्च्याल-सुभाष कुमार को Chief Secretary रहने के दौरान सेवा विस्तार केंद्र के अनुमोदन के बाद राज्य सरकार ने दिया था। या राज्य सरकार की सिफ़ारिश पर केंद्र ने दिया था। ऐसा भी कह सकते हैं।

सरकार ने हरिओम को सेवा विस्तार साधारण सा शासनादेश भर जारी कर के किया है। अभी ये साफ नहीं हुआ है कि क्या सरकार ने रिटायरमेंट रूल को बदल के रिटायरमेंट उम्र के बाद भी सेवा में बनाए रखने का प्रावधान कर दिया है? ऐसा नहीं किया गया है तो फिर ये एकदम ही Challangeable फैसला माना जाएगा। रूल में संशोधन के बिना सेवा विस्तार पूरी तरह गैर कानूनी माना जाएगा। वाजिब सा सवाल है। कानून पर आखिर एक GO कैसे भारी हो सकता है? ये GO प्रमुख सचिव (PWD) RK Sudhanshu ने जारी किया है। एक पूर्व नौकरशाह के मुताबिक अगर सरकार ने अनिवार्य रिटायरमेंट संबंधी नियम बदला नहीं है तो हरिओम को सिर्फ Re-Employment का लाभ दिया जा सकता है।

कैडर पोस्ट पर उनको बनाए रखना, PWD के उन आला इंजीनियरों के साथ भी ना-इंसाफ़ी है, जों उनकी जगह लेने के लिए काबिल हैं। इस नजीर के बाद अब ये सवाल भी दिन भर उछलता रहा कि क्या पिछली त्रिवेन्द्र की अगुवाई वाली BJP सरकार की भ्रष्टाचार या अनियमिताओं-मनमाने फैसलों के प्रति Zero टालरेंस की नीति BJP की ही तीरथ सरकार ने मिटा डाली है?अनुभव की भूमिका इतनी ही अहम है तो फिर तो हर HoD को नियम तोड़ के सिर्फ GO के सहारे सेवा विस्तार मिलते रहना चाहिए।

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