CM तीरथ का उपचुनाव::EC को भी वक्त देंगे कि नहीं!

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एक महीना लगता है चुनाव कराने में:6 महीने केलिए सवा दो महीने बच गए बस

Chetan Gurung

CM तीरथ सिंह रावत के उपचुनाव को ले के पहेलियाँ बुझ ही नहीं रही। उनके CM बने रहने के लिए रास्ता निकालना पड़ रहा। सल्ट से वह लड़े नहीं और बाकी कहीं से लड़ने के लिए उनके सामने लोक प्रतिनिधित्व की धारा-151 A की बाधा आड़े आ रही। कोई रास्ता निकल भी आता है तो आखिर वह सीट कौन सी होगी, जिस पर वह लड़ेंगे। सीट को रिक्त घोषित कब किया जाएगा। ये काम Election Commission को करना है। तीरथ आखिर EC को कब सूचित करेंगे? आयोग को भी चुनावी व्यवस्थाएँ करनी होती हैं। तीरथ के पास अब सिर्फ सवा दो महीने बच गए हैं। एक महीना तो आयोग को ही चुनाव कराने के लिए चाहिए। ये ऐलान कब करेंगे कि फलां सीट से चुनाव लड़ने के लिए वह तैयार हैं।

ये माना जा रहा है कि चाहे कुछ भी करना पड़े, BJP और मोदी-शाह की जोड़ी तीरथ के उपचुनाव की राह निकाल ही लेंगे। मान लिया कि उपचुनाव कराने में कोई दिक्कत नहीं। फिर भी चुनाव आयोग को आखिर एक महीना तो कम से कम देना ही होगा। चुनाव की प्रक्रिया इससे कम अवधि में पूर्ण नहीं होती है। चुनाव की घोषणा के बाद नामांकन (7 दिन)-पर्चों की जांच (1 दिन)-नाम वापसी (2 दिन)-चुनाव प्रचार (15 दिन)-वोटिंग और नतीजों के बीच 3 दिन और फिर Recounting की संभावनाओं के मद्देनजर 2 और दिन की दरकार आयोग को होती है।

विश्लेषक भी हैरान हैं कि वक्त बहुत कम रह जाने के बावजूद अभी तक यही साफ नहीं हो पाया है कि तीरथ लड़ रहे हैं तो कहाँ से। मोटा-मोटा अनुमान भर लगाया जा रहा है कि वह गंगोत्री की खाली सीट से लड़ेंगे। BJP के ही गोपाल रावत के निधन के बाद ये सीट खाली है। CM के सलाहकार RBS Rawat ने वहाँ काफी वक्त जायजा लेने के लिए गुजारा भी है। सीट हल्द्वानी की भी खाली है, लेकिन वहाँ से तीरथ के लड़ने के आसार दूर-दूर तक नहीं हैं। काँग्रेस नेता इन्दिरा हृदयेश के निधन के बाद ये सीट खाली है। इसको आम तौर पर काँग्रेस का गढ़ कहा जाता है। इंदिरा यहाँ की बहुत बड़ी-लोकप्रिय नेता थीं।

एक आसार ये भी हवा भी है कि शायद Ex CM त्रिवेन्द्र सिंह रावत की मोदी मंत्रिमंडल में जगह बनाई जा सकती है। ऐसा होता है तो उनकी डोईवाला सीट पर तीरथ लड़ सकते हैं। इसमें एक ही बाधा है। मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार तत्काल होता है तो त्रिवेन्द्र की बारी आ सकती है। तभी वह डोईवाला सीट छोड़ेंगे। अभी इस बारे में कुछ भी अता-पता नहीं लग रहा कि मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल आखिर कब होगा। ऐसे में अधिक संभावना गंगोत्री सीट से चुनाव के मैदाने जंग में उतरने की ही है।

ऐसा न हो कि तीरथ चुनाव लड़ने के लिए इतनी देर कर दे कि आयोग भी चुनाव अफरा-तफरी में कराने के लिए मजबूर हो जाए या फिर चुनाव करा पाने में हाथ खड़े कर दें। ये किसी की समझ में नहीं आ रहा कि आखिर मुख्यमंत्री और बीजेपी के सामने कौन सी मजबूरी या दहशत है। क्यों तीरथ उपचुनाव में फटाफट उतर के जीत हासिल करने जा रहे। ऐसा जितनी जल्दी कर पाएंगे, उतनी जल्दी तीरथ विधानसभा के आम चुनाव के लिए खुल के जुट सकेंगे। मुख्यमंत्री के अचानक दिल्ली जाने से ना-ना किस्म की चर्चाएँ उठने लगी हैं। उन पर यकीन न भी करें तो उपचुनाव की तैयारियों में दिख रही देरी तो नजर आ ही रही।        

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