CM in Action::पुष्कर सरीखी रफ्तार-अंदाज सिर्फ फिल्मों में दिखता है

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मोदी-शाह से मिले Free Hand का भरपूर इस्तेमाल:आनंदबर्द्धन अब CMO के Boss

सुखबीर को चंद घंटों में CS के लिए केंद्र से ले आना नहीं था हंसी-खेल

The Corner View

Chetan Gurung

CM पुष्कर सिंह धामी फैसले लेने और अमल पर कमाल की हैरत अंगेज़ रफ्तार दिखा रहे। ये इसलिए अहम है कि ऐसा तूफानी अंदाज 21 साल के उत्तराखंड के इतिहास में कभी किसी मुख्यमंत्री ने नहीं दिखाया। इसकी एक वजह ये हो सकती है कि PM नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने उनको न सिर्फ Free Hand दिया है, बल्कि Mission-2022 (विधानसभा चुनाव) फतह करने का बहुत बड़ा और कठिन लक्ष्य उनको बहुत यकीन के साथ सौंपा है। हाँ, Bollywood-South की फिल्मों में जरूर नायक को ऐसा करते देखा जा सकता है। मंत्रियों को अपने कोटे से अहम महकमे सौंपना और CS की कुर्सी पर सुखबीर सिंह संधु को ले आना कोई हंसी खेल नहीं। बेहतरीन छवि वाले ACS आनंदबर्द्धन को CMO का Boss बना के लाना भी उनका एक और जोरदार कदम है।

Chetan Gurung

युवा CM की लोकप्रियता BJP के चुनिन्दा लोगों को छोड़ दिया जाए तो बाकियों से कहीं ऊपर है। उनके शपथ ग्रहण समारोह में जैसी भीड़ उमड़ी थी, वह उनकी जमीन से जुड़े रहने और आम आदमी वाली छवि का प्रभावशाली प्रदर्शन था। इसमें शक नहीं कि उनींदी या सो गई-उदास-निराश दिखने लगी BJP में नए मुख्यमंत्री नई ऊर्जा-जोश-उत्साह ले आए दिख रहे। इस मूड और माहौल को वह आगे और जितना बेहतर कर पाएंगे, उतना फायदा मिशन-2022 में पार्टी को मिलेगा। पार्टी के Senior लोगों का भी मानना है कि कार्यकर्ताओं और आम लोगों की सोच-माहौल में फर्क आएगा।

उत्तराखंड भले छोटा और पहाड़ी राज्य है, लेकिन BJP और मोदी-शाह के लिए यहाँ अपना प्रभुत्व कायम रखना किसी भी तरह UP फतह से कम अहम नहीं। एक तो वे अपने राज वाले राज्य को हाथ से कभी छिनने नहीं देना चाहेंगे। दूसरी बड़ी वजह केदारनाथ धाम के प्रति मोदी की जबर्दस्त आस्था-विश्वास है। उनको जब लगा कि त्रिवेन्द्र सिंह रावत शायद नैया पार नहीं लगा पाएंगे तो तीरथ सिंह रावत को उनकी जगह CM ले आए। ये सिर्फ बहाना कहा जा सकता है कि उपचुनाव न लड़ पाने की मजबूरी के कारण तीरथ हटाए गए। हकीकत ये है कि तीरथ अपने चर्चित बयानों और कोरोना Deaths के कारण विवादों में आ गए थे। ऐसे में युवा-उत्साही-भविष्य के चेहरे के तौर पर मोदी-शाह की खोज पुष्कर पर आ के खत्म हुई।

राज्य के अब तक के सबसे कम उम्र के लेकिन सबसे परिपक्व दिख रहे CM ने अपनी पारी का आगाज जिस अंदाज में किया है, वह गज़ब का है। ओमप्रकाश को मुख्य सचिव की कुर्सी से हटाने और उनकी जगह सभी को चौंकाते हुए सुखबीर को ले आना, हंसी-ठट्टा तो कहीं से नहीं था। सुखबीर NHAI के अध्यक्ष जैसी Prize Posting पर थे। भारत सरकार के सचिव के लिए सुयोग्य हो चुके थे। उनको चंद घंटों में ही केंद्र से कार्यमुक्त करा के उत्तराखंड में CS बना देना मोदी-शाह की मदद के बिना शायद ही मुमकिन हुआ होगा। देश चला रही इस शक्तिशाली जोड़ी का भरोसा जीतना भी हर CM के वश की बात नहीं है।

CMO ही पूरे सरकारी तंत्र पर नजर रखता है और उसको संचालित करता है। कम वक्त को देखते हुए पुष्कर ने CMO के मुखिया के तौर पर 1992 बैच के IAS आनंदबर्द्धन को कमान सौंप दी। उनके साथ अनुभवी और बेहतरीन सचिव अमित सिंह नेगी-शैलेश बगौली हैं। अभी तक ये साफ नहीं हुआ है कि सुखबीर के बैच की ACS राधा रतूड़ी का क्या इस्तेमाल किया जाएगा। CMO में वह अब शायद ही रहेंगी, ऐसा तय लग रहा। आनंदबर्द्धन आज शाम को CM के साथ बीजापुर गेस्ट हाउस में घंटों बैठे। उनके साथ 1996 बैच के IPS अभिनव कुमार भी थे। कुछ और नौकरशाह भी आते रहे और CM से मिल के जाते रहे। बीच-बीच में मुख्यमंत्री मुलाक़ात करने आए लोगों से भी बैठक से निकल के मिल रहे थे।

2-3 दिनों के भीतर IAS-IPS कैडर में कई जबर्दस्त और चौंकाने वाले फैसले होने तय हैं। इसको ले के दोनों कैडर के अफसरों की धड़कन बढ़ी हुई है। ऐसे नौकरशाह मुख्यधारा में लाए जाने तय हैं,जो काबिलियत के बावजूद दरकिनार थे। अलोकप्रिय और सिर्फ अन्य गुणों से सरकार में अहमियत रखने वालों को निराशा हो सकती है। पुष्कर को फैसले करने की ताकत आला कमान से मिली हुई है। ऐसे में वह पार्टी के ही किसी नाम की सिफ़ारिश या दबाव में आए बगैर नौकरशाहों को अपने हिसाब से खांचे में बिठा और उठा सकते हैं। ऐसा हर स्तर के अफसरों के साथ मुमकिन दिख रहा। नए मुख्यमंत्री को आला कमान ने कितनी और किस किस्म की शक्तियाँ दी हुई है, इसे आज मंत्रियों को दिए गए महकमों को देख के आसानी से समझा जा सकता है।

पुष्कर ने खाँटी भाजपाई मंत्रियों से अधिक काँग्रेस पृष्ठभूमि वाले तुनकमिजाज लेकिन सियासी प्रभाव रखने वाले मंत्रियों को ऐसे-ऐसे महकमे सौंप दिए, जिसकी वे कल्पना भी नहीं कर सकते थे। सतपाल महाराज (PWD)-हरक सिंह रावत (ऊर्जा) और यशपाल आर्य (आबकारी) को अतिरिक्त रूप से वो मलाईदार महकमे मिले, जिसमें लक्ष्मी बसती हैं। कद जाहिर होता है। तीनों को ये महकमे सौंप के पुष्कर ने सियासी परिपक्वता की मिसाल पेश की है। क्षत्रपों को नाराज रख के मिशन-2022 को फतह करना आसान नहीं हो सकता था। खास तौर पर जिनकी पार्टी के प्रति सत्यनिष्ठा को ले के अंगुली उठाई जा रही थी। ये कहा जा रहा था कि वे बगावत कर पार्टी न छोड़ दें।

पुष्कर ने उनको ऐसे अहम महकमे सौंप के शांत कर दिया। वह भी जानते हैं कि महकमे जिसके पास भी हों, मुख्यमंत्री के पास हर मंत्री के फैसले को संशोधित या पलटने का पूरा अधिकार है। ये सच है कि बीजेपी के कुछ मंत्रियों को सतपाल-हरक-यशपाल को इतनी तरजीह दिया जाना अखर रहा होगा। पहली ही कैबिनेट बैठक में पुष्कर ने जो भी फैसले लिए और संकल्प जताया, वह न सिर्फ लोगों-कर्मचारी तबके से सीधे वास्ता रखते हैं बल्कि ज्वलंत मुद्दे भी हैं। ये प्रशासनिक क्षमताओं और सोच को दर्शाता है। पुष्कर के पास भले वक्त कम हैं लेकिन वह भाग्यशाली हैं कि महामारी कोरोना अब तकरीबन निबटान पर है। ऐसे में वह अपने एजेंडे पर स्वाभाविक और प्रभावशाली तरीके से काम कर सकते हैं।    

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