Big News::महाराष्ट्र के Governor कोश्यारी King Maker !

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CM पुष्कर बेहद करीबी:निशंक के इस्तीफे के बाद अजय भट्ट की शपथ तय!

Chetan Gurung

पहले पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड के CM बने और अब नैनीताल से सांसद अजय भट्ट का मोदी मंत्रिपरिषद में शामिल होना तय। दोनों में समानता आखिर क्या है? अगर तलाशें तो पुष्कर और अजय एक ही सियासी गुरु के शिष्य हैं। यानि, दोनों ने सियासत का ककहरा उस भगत सिंह कोश्यारी की छत्रछाया में सीखा, जो इन दिनों महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं। रमेश पोखरियाल निशंक के मंत्री पद से इस्तीफे के बाद ये साफ हो गया है कि अजय केंद्र में मंत्री बनेंगे। चर्चा ये भी है कि क्या गढ़वाल से भी अनिल बलूनी या तीरथ सिंह रावत के नाम पर अभी भी मंत्री बनाने के बाबत विचार हो सकता है?

Ajay Bhatt:CM पुष्कर सिंह धामी की तरह कोश्यारी के करीबी हैं

पुष्कर तब से महाराष्ट्र के राज्यपाल के साथ दिखे, जब उत्तराखंड राज्य गठन के बाद नित्यानन्द स्वामी मंत्रिपरिषद में कोश्यारी ऊर्जा मंत्री फिर मुख्यमंत्री थे। मूल रूप से दोनों पिथौरागढ़ से ताल्लुक रखते हैं। कम उम्र के बावजूद पुष्कर की परिपक्वता सियासत के शुरुआती दिनों में भी बाखूबी झलकती थी। कोश्यारी का आशीर्वाद उन पर हमेशा बना रहा है। बाद में उन्होंने अपना भविष्य सियासत में देखना शुरू किया। इसके बाद खुद का सियासी अस्तित्व तैयार किया। आज वह मुख्यमंत्री हैं, तो इसमें उनकी कड़ी मेहनत-लगन-पार्टी प्रति अद्भुत निष्ठा संग कोश्यारी का उन पर वरदहस्त-आशीर्वाद ने भी अहम भूमिका निभाई।  

कोश्यारी की BJP के हवा-पानी और शक्ति केन्द्र PM नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से बहुत विश्वास वाले मजबूत रिश्ते हैं। संघ के लोग तो उनका सम्मान करते ही हैं। ऐसे में उनके लिए आज की तारीख में अपनी कुछ बातें मनवा पाना बहुत मुश्किल नहीं कहा जा सकता है। निशंक को कोश्यारी लॉबी का कुछ वक्त के लिए तब माना गया था, जब साल 2009 में उस वक्त के CM BC खंडूड़ी को हटाने के लिए बीजेपी के भीतर उत्तराखंड में जबर्दस्त मुहिम छिड़ी थी, जो तत्काल आंतरिक विद्रोह में तब्दील हो गई थी।

पार्टी के आदेश पर BCK को मजबूरी में हटना पड़ा था लेकिन कोश्यारी-निशंक रिश्तों में खटास पड़ गई थी। कोश्यारी की जगह निशंक मुख्यमंत्री बन गए थे। ये माना गया कि कोश्यारी को निशंक ने झांसे में रखा। पाना खेल कर गए। फिर दोनों ने कभी एक साथ किसी मुहिम में काम नहीं किया। अजय के लिए भी कोश्यारी की कोशिशें लगातार चलती रही हैं। ऐसा शीर्ष सूत्र बताते हैं। ये सिर्फ वक्त की बात रह गई है कि उनको अब टीम मोदी में जगह मिलने वाली है। शाम को शपथ ग्रहण समारोह में उनका नाम पुकारा जाना तय माना जा रहा।

अजय के लिए भी लॉबिंग अगर किसी ने की होगी तो वह कोश्यारी होंगे। वह वास्तव में King Maker बन के उभर रहे हैं। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के नजरिए से देखा जाए तो अगर तीरथ और बलूनी में से भी किसी एक को मंत्री बनाया जाता है तो ताज्जुब नहीं होगा। मुख्यमंत्री के बाद केन्द्रीय मंत्री भी कुमायूं से बनाए जाने से गढ़वाल में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में नकारात्मक संदेश जा सकता है। संगठन में भी गढ़वाल से न राज्य न ही राष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ा प्रतिनिधित्व यहाँ से है।

अनिल की अपनी क्षमताएँ हैं। मोदी-शाह के भरोसेमंद हैं। एक कांटा ये है कि वह ब्राह्मण हैं। भट्ट-बलूनी को एक साथ शायद ही मंत्रिपरिषद में लिया जाए। ऐसे में तीरथ जो कि ठाकुर हैं, उनके नाम पर भी विचार हो सकता है। शाम तक सब कुछ साफ हो जाएगा। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव एक साल से भी कम समय में होने हैं। ऐसे में इस राज्य को केंद्र में प्रतिनिधित्व देने से मोदी-शाह-बीजेपी-संघ बच नहीं सकते।

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