मंत्रिपरिषद विस्तार::ये तो उत्तराखंड को घाटा हो गया:मंत्री निशंक हटाया-राज्यमंत्री अजय भट्ट दिया

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विधानसभा चुनाव हैं-हालात भी कठिन हैं:मंत्रिमंडल में देवभूमि को प्रतिनिधित्व देना ही होगा मोदी जी

Chetan Gurung

मोदी मंत्रिपरिषद विस्तार और फेरबदल में UP को जबर्दस्त फायदा पहुंचा लेकिन उत्तराखंड को नुक्सान हो गया। मंत्रिमंडल सहयोगी रमेश पोखरियाल निशंक को बाहर करने के साथ ही राज्य का प्रतिनिधित्व भी खत्म कर दिया। अजय भट्ट को राज्यमंत्री ही बनाया, जबकि ऐसी उम्मीद थी कि या तो देवभूमि से दो लोगों को मंत्रिपरिषद में जगह मिलेगी या फिर हालात को देख अजय भट्ट भी कैबिनेट में शामिल किए जाएंगे।

उत्तराखंड और केदारनाथ के प्रति PM नरेंद्र मोदी का विशेष लगाव और आस्था है लेकिन जब देने की बारी आई तो राज्य को सिर्फ राज्यमंत्री दिया और कैबिनेट सहयोगी को हटा दिया
रमेश पोखरियाल निशंक को वाकई खराब स्वास्थ्य कारणों से हटाया गया या कोई और वजह रही?

PM नरेंद्र मोदी यूं हो उत्तराखंड को बहुत अहमियत देते हैं लेकिन मंत्रिमंडल-मंत्रिपरिषद में फेरबदल और विस्तार में इस छोटे से हिमालयी राज्य से इंसाफ नहीं किया। जिस निशंक की मंत्री की कुर्सी छीन ली, वह मंत्रिमंडल में थे और शिक्षा मंत्री जैसी अहम ज़िम्मेदारी संभाल रहे थे। ये शायद उनकी खराब तकदीर का नतीजा रहा जो उनको दो बार Covid हो गया और इस बीच उनका मंत्रिमंडल से ही पत्ता साफ हो गया।

निशंक को क्यों हटाया गया, पता नहीं चल पाया है लेकिन उनके दो-दो बार कोविड के शिकार हो जाने से उनकी पकड़ इस कठिन दौर में हाई कमान पर ढीली पड़ गई थी। ये शोर तगड़ा मच चुका था कि उनको मोदी हटा रहे हैं,लेकिन ये भी संभावना जतलाई जा रही थी कि उत्तराखंड से हो सकता है अजय भट्ट के साथ ही अनिल बलूनी या फिर हाल ही में CM की ज़िम्मेदारी से हटे तीरथ सिंह रावत को भी मंत्रिमंडल या परिषद में जगह मिल सकती है। भट्ट को भले केंद्र की सत्ता का अनुभव नहीं है लेकिन ऐसी कई मिसालें हैं, जब एकदम नए चेहरे को केन्द्रीय मंत्रिमंडल में लाया गया। खुद मोदी पहली बार केंद्र में सीधे PM बन के आए हैं।

गढ़वाल के हिस्से में अब सियासी तौर पर देखा जाए तो कुछ नहीं रह गया है। BJP प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक भले गढ़वाल मण्डल के अंग हरिद्वार से हैं, लेकिन पहाड़ का प्रतिनिधित्व साफ हो गया है। CM कुर्सी कुमायूं के खाते में गई और अब केन्द्रीय मंत्री भी कुमायूं से ही बनाए गए हैं। केंद्र में गढ़वाल का प्रतिनिधित्व निशंक कर रहे थे, भले वह हरिद्वार लोकसभा से सांसद हैं। पहले कुमायूं के साथ संतुलन कायम करने में बीजेपी आला कमान नाकाम रहा था। अब गढ़वाल के हाथ रीते रह गए हैं।

भट्ट पहली बार केंद्र में और दूसरी बार जिंदगी में मंत्री बने हैं। पहली बार मंत्री वह नित्यानन्द स्वामी और भगत सिंह कोश्यारी की अन्तरिम सरकार में बने थे। उनका कार्यकाल तब नवंबर 2000 से 2002 तक रहा था। इसके बाद विधानसभा चुनाव ही उनको धोखा देते रहे। उनको हालांकि मुख्यमंत्री का दावेदार सदा माना गया। पार्टी भी इसके लिए राजी दिखती रही। बस तकदीर हर बार उनके साथ दगाबाजी करती रही। लोकसभा चुनाव में नैनीताल सीट से पिछली बार उन्होंने तकदीर आजमाई और संसद पहुँच गए।

7-8 महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में BJP के लिए हालात बहुत कठिन रह सकते हैं। उत्साही और ऊर्जावान-लोकप्रिय युवा CM पुष्कर सिंह धामी के हाथों में चुनावी महाभारत को विजित करने का ध्वज सौंपा गया है। उनको इस अभियान में लेकिन केन्द्रीय कमान की मदद हासिल होनी ही होगी। इसके बिना उनके लिए ये लक्ष्य आसान नहीं रहने वाला है। अगर भट्ट को मंत्रिमंडल में लिया जाता है या फिर उत्तराखंड (अब गढ़वाल) से एक और मंत्री बनाया जाता है तो पुष्कर और उत्तराखंड बीजेपी के लिए चुनाव रूपी मछ्ली की आँख को भेदना नामुमकिन कहीं से नहीं होगा।  

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