CMO में नौकरशाहों की तैनाती:CM पुष्कर ने रखा संतुलन का खास ख्याल:शासन में रह गई कुछ कसर

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अगली सूची में सचिव-प्रमुख सचिवों के महकमों को और दुरुस्त किया जाना मुमकिन

25 के बाद आ सकती है DM’s के तबादलों की बारी:एसेम्बली चुनाव के मद्देनजर होंगे तबादले

Chetan Gurung

CM पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री सचिवालय (CMO) में नौकरशाहों की तैनाती में जातीय-क्षेत्रीय संतुलन का खास ख्याल रखा हुआ है। शासन में कल हुए धमाकेदार तबादलों में अलबत्ता, कुछ कसक रह गई। मुमकिन है कि बची-खुची सूची में इसको भी दुरुस्त कर लिया जाएगा। अब असली बारी DM’s के तबादलों की आएगी। 25 जुलाई के बाद ये भी हो जाने की संभावना है।

काफी वक्त बाद CMO में संतुलन काफी बेहतर दिख रहा है। गढ़वाल-कुमायूं के साथ ही मैदानी मूल और ठाकुर-ब्राह्मण अफसरों के समीकरण की भी अनदेखी नहीं की गई है। गढ़वाल से सचिव अमित सिंह नेगी और अपर सचिव एसएस सेमवाल को और कुमायूं से सचिव शैलेश बगौली को CMO में तैनाती दी गई है। CMO की लगाम ACS आनंदबर्द्धन के हाथों सौंपी गई है। सभी के पास अपने महकमे भी अलग से हैं।

खास पहलू इन नौकरशाहों को ले के ये है कि सभी निर्विवाद और शानदार अफसर वाली छवि-प्रतिष्ठा रखते हैं। इसका असर निश्चित रूप से मुख्यमंत्री की साख और छवि पर भी पड़ेगा। यही ख्याल रखते हुए पुष्कर ने इनकी तैनाती अपने यहाँ की है। ये सभी अपने कामकाज में भी बेहतरीन माने जाते हैं। वरिष्ठ IPS अफसर अभिनव कुमार को भी मुख्यमंत्री सचिवालय में Ex Cadre पोस्ट Additional Principal Secretary पर बिठाया है। IAS लॉबी के असंतोष से बचने के लिए Ex Cadre वाला रास्ता तलाशा गया है। ये सभी अफसर तपे-तपाए ही नहीं बल्कि मुख्यमंत्री की छलनी से छने हुए हैं।

CS सुखबीर सिंह संधु और CMO में तैनात नौकरशाहों के रेकॉर्ड देख के आसानी से कहा जा सकता है कि पुष्कर विधानसभा चुनाव तक न सिर्फ विकास कार्यों और योजनाओं को रफ्तार देने के लिए सुयोग्य नौकरशाह तलाश रहे थे बल्कि सरकार पर कोई दाग भी नहीं आने देना चाहते हैं। सचिवालय बैठने वाले आला नौकरशाहों के ताजा फेरबदल में उन्होंने गज़ब की धमक दिखाई पर किसी को भी बेकार कर दिया गया हो, ऐसा नहीं है। जिन लोगों को ले के अंगुली उठती रही, उनको भी काम दिया गया है, लेकिन उनके महकमों को इधर-उधर कर ये संदेश जरूर दे गए कि वह शासन में ढंग से सफाई चाहते हैं।

कुछ नौकरशाह जरूर जीवन की कुछ बूंद इस कठोर परीक्षा की घड़ी में भी पा गए। CM के इतने मजबूत वार के बावजूद खुद को सफाई से बचाने में वे सफल रहे तो कुछ आश्चर्य जताया जाना स्वाभाविक है। इसलिए भी कि CM के तौर पर खुल के बिना किसी दबाव के कार्य करने की आजादी PM नरेंद्र मोदी से पुष्कर को मिली हुई है। खुद पुष्कर बिना दबाव में काम करने का ईरादा जतला चुके हैं। ऐसे में कुछ ऐसे नौकरशाहों का बच जाना इसलिए भी हैरान करता है कि अधिकांश राजनेता और खुद BJP के लोग भी उनके हक में नहीं हैं।

कुछ नौकरशाह इतने स्मार्ट निकले कि अपने बेकार के महकमे दिखावे के लिए हटवाने में सफल हो गए। कुछ ने मलाईदार महकमे को रखे रहने के लिए कम अहम महकमे छोड़ दिए। कुछ अपने जूनियर सचिव को ही हटवा के अपनी राह निष्कंटक कर गए। पुष्कर को विधानसभा चुनाव में एक बार फिर BJP को विजय दिला के सरकार बनाने का ऐसा अभूतपूर्व लक्ष्य दिया गया है, जिसको आज तक न BJP न Congress ही हासिल कर सकी है। मुख्यमंत्री के सामने छह महीने बनाम 5 साल का लक्ष्य है।

6 महीने तक कस के और बिना पक्षपात-अपना-पराया कर नौकरशाहों और मंत्रियों से काम लें और फिर चुनाव फतह कर अगले 5 साल भी अपने और पार्टी के नाम करें। इसमें दो राय नहीं कि पुष्कर असंभव सा साबित होते रहे लक्ष्य को हासिल कर लेते हैं तो अगली बार भी उनकी CM बनने की राह कोई नहीं रोक पाएगा। 25 जुलाई तक दौरों के कारण मुख्यमंत्री देहरादून में नहीं हैं लेकिन DM’s के तबादलों को भी बेहद गंभीरता और सोच-समझ के अंजाम देने की तैयारी चल रही है।

इसके बाद IPS और खास तौर पर SSP’s-SP के तबादलों पर काम होगा। विधानसभा चुनाव से पहले फिर शायद ही किसी DM या SSP को हटाया जाएगा। यही वजह है कि सरकार बहुत ठोंक-बजा के ही इन ओहदों पर अफसरों की तैनाती की कोशिश कर रही है। सचिव-प्रमुख सचिव स्तर पर हो सकता है कि सरकार एक बार फिर गृह कार्य करे और बची-खुची कमी ठीक कर लें।

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