Big Breaking::लो बिठा दी सरकार ने उच्च स्तरीय जांच:श्रीदेव सुमन विवि में 700 अवैध Students के Exam पर उच्च शिक्षा मंत्री खफा

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खफा उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह ने दो हफ्ते में तलब की रिपोर्ट: `Newsspace’ –शाह टाइम्स की स्टोरी पर एक्शन में सरकार

ऐलान किया-बख्शे नहीं जाएंगे दोषी पर छात्रों के हितों का ख्याल रखा जाएगा

कुलपति ध्यानी की मुसीबतें बढ़ेंगी:अन्य किस्म के आरोप भी उछल रहे

Chetan Gurung  

श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय से सम्बद्ध निजी कॉलेजों में 700 छात्र-छात्राओं को अवैध प्रवेश दिए जाने और उनको परीक्षा में भी बिठा दिए जाने का Newsspace’-`शाह टाइम्स’ में ढंग से खुलासा होने के बाद उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज सख्त रुख अख़्तियार करते हुए शासन स्तर पर उच्च स्तरीय जांच बिठा दी। जांच समिति को 2 हफ्ते के भीतर रिपोर्ट देनी होगी। शासन सूत्रों के मुताबिक इस मामले में कुलपति पीताम्बर ध्यानी की परेशानी बढ़नी तय दिख रही।

VC Pitambar Dhyani

देहरादून और हरिद्वार के 14 निजी कॉलेजों (चमनलाल (मंगलोर रोड, हरिद्वार), हरीओम सरस्वती (धनौरी, हरिद्वार), विद्या विकासनी (नारसन,रूड़की),आशादेवी (भोगपुर, हरिद्वार),राघोमल ओमप्रकाश गोयल (रूड़की),स्वामी विवेकानंद (रूड़की),डीडी कॉलेज (निम्बुवाला गढ़ी कैंट, देहरादून),एपेक्स इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट और टेक्नॉलॉजी, रूबराज इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज़,फोनिक्स ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट (रूड़की),भारतीय महाविद्यालय (रूड़की),सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एवं टेक्नॉलॉजी (रूड़की),हरीश चन्द्र रामकली (लक्सर, हरिद्वार) और एचईसी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स (जगजीतपुर,हरिद्वार) में तय सीट से ज्यादा (700) छात्र-छात्राओं को प्रवेश दे दिया गया था।

`Newsspace’-Daily Shah Times ने सबसे पहले इस खबर को ब्रेक कर खलबली मचा दी थी। इसके बाद तकरीबन सभी बड़े अखबारों ने इस उच्च शिक्षा में काले खेल से जुड़ी खबर को हाथों-हाथ ले लिया। आज उच्च शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत ने सचिवालय में बैठक के दौरान एसडीएस विवि की इस करतूत को बहुत गंभीरता से लेते हुए शासन स्तर पर जांच समिति गठित कर दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने की हिदायत सचिव दीपेंद्र चौधरी को दी। मंत्री ने कहा कि इस मामले में जो भी और जितना बड़ा नाम भी दोषी पाया जाएगा, बख्शा नहीं जाएगा।

डा. धन सिंह ने कहा कि श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय से सम्बद्ध निजी कॉलेजों में तय सीमा से अधिक छात्र-छात्राओं को प्रवेश देना नियम विरूद्ध है। जांच में विश्वविद्यालय के जो भी अधिकारी एवं कर्मचारी दोषी पाए जाएंगे, उनके विरूद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने वाले निजी कॉलेजों खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई होगी। उनकी संबद्धता रद्द भी की जाएगी। छात्र हितों का ख्याल जरूर रखा जाएगा। उनके परीक्षा नतीजे घोषित किए जाएंगे।

सरकार के जांच कराने के फैसले से विवि के कुलपति ध्यानी के लिए मुसीबतें बढ़नी तय है। उनसे पूछा जा सकता है कि इतना बड़ा और संगीन मामला कैसे पकड़ा नहीं गया। अगर संज्ञान में ये धांधली आ गई थी तो कोई कार्रवाई इतने महीनों तक भी क्यों नहीं की। जब मामला Newsspace’-`शाह टाइम्स’ में उछला तब जा के रजिस्ट्रार को आंतरिक जांच अधिकारी नियुक्त किया। जिस मामले में कुलपति खुद शक के दायरे में हो, उसमें प्रतिनियुक्ति वाला रजिस्ट्रार एमएस रावत भला क्या जांच कर सकेगा। कुलपति खुद की नियुक्ति को ले के पहले से सवालों के घेरे में हैं।

उनके बारे में आरोप है कि वह कुलपति की अर्हता ही नहीं रखते हैं। नियमानुसार 10 साल की सेवा 10 हजार ग्रेड पे में होनी चाहिए, लेकिन वह 89,00 ग्रेड पे में थे। ताज्जुब की बात है कि उनको उत्तराखंड तकनीकी विवि के भी कुलपति का अतिरिक्त जिम्मा सौंपा गया है। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर एसआईटी जांच भी बिठाने पर सरकार के स्तर पर विचार चल रहा है। ऐसे ही मामले में एचएनबी गढ़वाल विवि के पूर्व कुलपति के खिलाफ सीबीआई जांच चलने के मद्देनजर एसआईटी जांच पर गौर किया जा रहा है।  

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