हे श्रीदेव सुमन, आपका नाम खराब करने के लिए इन गुनहगारों को माफ न करना

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संकट में कुलपति ध्यानी:विवि कैंपस के पद ऋषिकेश ट्रान्सफर कर दिए

वित्त की मंजूरी बिना 85 पदों पर भर्तियाँ निकाल दी:आरक्षण रोस्टर भी ढंग से लागू नहीं कर पा रहे

अवैध भर्ती धांधली की जांच कुलपति OPS नेगी की अगुवाई में

Chetan Gurung

Minister (Higher Education) Dr. Dhan Singh Rawat

जिस श्रीदेव सुमन का नाम उत्तराखंड में बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है, उस नाम को उनके नाम पर बने विवि ने खराब कर डाला है। विवि से सम्बद्ध 14 कॉलेजों में 700 छात्र-छात्राओं के अवैध प्रवेश और उनकी  परीक्षा भी करा दिए जाने के मामले की जांच Open विवि के कुलपति OPS नेगी की अगुवाई वाली 4 सदस्यीय समित करेगी। विवि के कुलपति PP ध्यानी पदों की निरंतरता को बनाए रखने के लिए वित्त विभाग की मंजूरी के बिना ही उनकी भर्ती करने के गंभीर आरोप में भी घिर रहे हैं। विवि के भाऊवाला कैंपस के पदों (85) को ऋषिकेश के ललित मोहन राजकीय PG कॉलेज ट्रान्सफर कर देने और उन पर भर्ती निकालने के साथ ही आरक्षण का रोस्टर भी ढंग से लागू न कर पाने के कारण उन पर अंगुलियाँ उठ रही।

अवैध प्रवेश और परीक्षा के मामले में उच्च शिक्षा सचिव दीपेंद्र चौधरी ने `Newsspace’ से कहा कि मामले में कुलपति से भी पूछताछ की संभावनाओं को देखते हुए जांच समिति में मुक्त विवि के कुलपति डॉ. नेगी को भी शामिल किया गया है। सरकार की नजर बनी रहे, इसके लिए एक उप सचिव को भी जांच समिति में शामिल किया गया है। इसके साथ ही उच्च शिक्षा निदेशालय से भी सदस्य शामिल हैं। इस मामले में सरकार बहुत गंभीर है। जांच समिति की सिफ़ारिश हुई तो एसआईटी जांच भी कराई जा सकती है।

Secretary (Higher Education) Deependra Kumar Chaudhary

सरकार के कठोर तेवर से श्रीदेव सुमन विवि में अवैध प्रवेश और संबद्धता देखने वाले विभाग में खलबली मची पड़ी है। ये मामला तब उछला, जब कुलपति पीताम्बर ध्यानी पहले ही दो बार कैंपस के लिए 85 पदों की भर्ती निकालने को ले के विवादों में हैं। ये पद भाऊवाला में विवि के कैंपस के लिए शासन ने मंजूर किए थे। 3 साल गुजर जाने के कारण अब ये पद अस्तित्व में नियमानुसार नहीं हैं। मंजूर पद अगर तय अवधि तक भरे नहीं जाते हैं तो उनको बनाए रखने के लिए वित्त विभाग की मंजूरी लेने की बाध्यता होती है।

ये पद (45 शैक्षणिक-41 शिक्षणेत्तर) 2018 में सृजित किए गए थे। इसको भरने के लिए 18-8-2020 को पहली बार और 11-11-2020 को दूसरी बार विज्ञापन निकाला गया था। दोनों बार भर्ती रद्द करनी पड़ी। आरक्षण में रोस्टर सही न लगाए जाने के कारण ऐसा करना पड़ा। रोस्टर लगाना न आने के कारण विवि प्रशासन की खूब छिछालेदर हो रही। रोस्टर में गड़बड़ी को ले के भी अंगुली उठ रही कि वास्तव में इसके पीछे खास अभ्यर्थियों को नियुक्त करने की मंशा थी। इसके फेर में आरक्षण का रोस्टर ही गड़बड़ हो गया।

बार-बार भर्तियाँ रद्द होने से सबसे बड़ी दिक्कत उन युवाओं को हो रही जो भर्ती की आस लगाए बैठे थे। उनसे नौकरी के फार्म तो भरवाए गए, लेकिन भर्ती की प्रक्रिया ही शुरू नहीं हो पाई। इस बीच 3 साल निकल गए। हजारों के पैसे बर्बाद हुए तो कईयों की आवेदन करने की अंतिम आयु सीमा ही निकल गई। दोनों बार आरक्षण रोस्टर की गड़बड़ी और पदों की निरंतरता बनाए रखे बिना भर्तियाँ निकाल देने की प्रक्रिया कुलपति ध्यानी के कार्यकाल में हुई। अहम पहलू ये है कि उनके पास सरकार की एक और एफीलियेटिंग विवि यूटीयू का भी अतिरिक्त जिम्मा है।

ध्यानी श्रीदेव सुमन विवि की कार्यकारी परिषद की बैठक के मिनट्स महीनों बाद भी जारी न करने के चलते सवालों के घेरे में हैं। ये भी माना जाता है कि शासन के साथ उनके रिश्ते कभी अच्छे नहीं रहे। खुद उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत उनको ले के तल्ख रुख जताते रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक एक बार आज के एसीएस (सीएम) आनंदबर्द्धन के साथ भी उनकी बैठक में कुलपति पर शासन के नियंत्रण को ले के तीखी बहस हो गई थी। उनका कहना था कि शासन को उनके खिलाफ कार्रवाई करना तो दूर स्पष्टीकरण मागने तक का भी हक नहीं है। तब एसीएस उच्च शिक्षा के प्रमुख सचिव थे।  

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