CM से ले के PM तक गुहार! कोई मायने है भी!आखिर प्रो अरविंद को इंसाफ कब मिलेगा!

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धनाभाव के चलते ईलाज न होने से पत्नी कोरोना ने छीन ली:बच्चों के स्कूल से निकाले जाने की नौबत

High Court की भी नहीं सुन रहा सड़ा-गला सिस्टम:CM साहब चाबुक उठाइए:कर दीजिए शायं-शायं

ACS को चिट्ठी लिख डेढ़ साल की तनख्वाह जल्द जारी करने-THDC-IHET प्रबंधन पर कार्रवाई की मांग

Chetan Gurung

एक प्रोफेसर को कॉलेज प्रबंधन 3 बार बर्खास्त करे और तीनों बार हाई कोर्ट से वह जीत जाए फिर भी उनको न तनख्वाह दी जाए और न ही अन्य संबन्धित लाभी तो साफ है कि उनके साथ जान बूझ के साजिश हो रही। ना-इंसाफ़ी हो रही। आपराधिक कृत्य हो रहा। अपने साथ हो रहे अन्याय-बर्ताव पर जब CM से ले के PM और राष्ट्रपति-CJ तक लिखित गुहार की जाए और कोई कार्रवाई न हो तो मायने क्या निकाला जाए? यही न कि सिस्टम को सिर्फ दीमक नहीं लगा है। वह धराशाई हो चुका है। इसके केन्द्रीय पात्र प्रो. अरविंद कुमार सिंह ने अब एक और लिखित गुहार ACS (तकनीकी शिक्षा) राधा रतूड़ी से की है और धनाभाव के कारण कोरोना से पत्नी की मृत्यु और फीस न दे पाने की नौबत के कारण बच्चों को स्कूल से निकाले जाने की नौबत का जिक्र करते हुए कॉलेज प्रबंधन से जुड़ जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की गुजारिश की गई है।

CM पुष्कर सिंह धामी प्रो.अरविंद कुमार सिंह के मामले में सकारात्मक दिखे हैं लेकिन नौकरशाही उनको भी घुमाने में लगी है

IIT-वाराणसी के Topper प्रो. अरविंद CM पुष्कर सिंह धामी को भी अपनी आपबीती वाली चिट्ठी दे के इंसाफ की गुहार कर चुके हैं। अंदरखाने की खबर ये है कि CM ने उनके साथ हो रहे अन्याय के बारे में जानकारी मिलने पर उनका वेतन तत्काल देने और साथ ही कॉलेज में प्रभारी निदेशक भी किसी वरिष्ठतम शिक्षक को बनाने का निर्देश दिया है। ये नौकरशाही और लाल फीताशाही की निर्लज्जता की मिसाल है कि इसके बावजूद अरविंद दर-दर भटक रहे हैं। उनको अपना ही पैसा लेने के लिए भीख मांगने जैसी हालत में पहुंचा दिया है।

कॉलेज की Board of Governor (टेकुइप वाली, जो कायदे से वैध भी नहीं है) की बैठक में भी इस मसले पर ACS ने कार्रवाई और अन्य जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए। न CM की न ही ACS के निर्देशों पर कोई कार्रवाई हो रही। कॉलेज का निदेशक कोई नहीं होने के कारण DM-Tehri को अतिरिक्त जिम्मा इसका भी दिया गया है। अरविंद के अनुसार जब ACS के निर्देश के बावजूद DM उनका वेतन नहीं दे रहीं तो फिर खुद मेरे उनसे मिलने से क्या होगा। ये विडम्बना है कि एक तरफ अधिकांश विवि के कुलपतियों पर कोई न कोई गंभीर आरोप हैं, वहीं एक IITian प्रोफेसर के पास अपना और बच्चों का पालन-पोषण और पढ़ाई के लिए फीस देने के लिए भी पैसे नहीं हैं।

अरविंद के मुताबिक उनके पास अब साहस और धैर्य दोनों खत्म सा हो गया है। न ही फिर अदालत जा के अपने साथ हो रहे अत्याचार के खिलाफ लड़ने की हिम्मत है। वकील को देने के लिए न उनके पास पैसे हैं न ही हाई कोर्ट से बार-बार जीतने का भी कोई मायने निकल रहा। सिस्टम ने उनकी हिम्मत तोड़ दी है। राष्ट्रपति-PM-CM और CJI तक से वह चिट्ठी लिख के गुहार कर चुके हैं। सचिवालय के धक्के खा-खा के उनके जूते घिस गए हैं लेकिन उनको इंसाफ दिलाने के मामले में एक इंच की भी प्रगति नहीं हुई है। CM पुष्कर से बहुत उम्मीदें हैं लेकिन लगता है कि नौकरशाही और सिस्टम उनको भी फेल करने पर तुली है।

इस प्रोफेसर को तीसरी बार जब बर्खास्त किया गया था तो एक बार फिर HC ने उनके हक में फैसला देते हुए उनको उनका पिछला वेतन और सभी जुड़े हुए लाभ देने के आदेश दिए थे। उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच एक महीने के भीतर कर के HC को देने के भी आदेश थे। दोनों ही आदेशों का पालन नहीं हुआ। प्रो.अरविंद का सहारा और मददगार टिहरी के ही कुछ युवा बने हुए हैं। वही उनकी रोटी का बंदोबस्त कर रहे लेकिन अब बच्चों की फीस भी महीनों से न दे पाने के कारण वह संकट में हैं। बच्चों को स्कूल से निकाले जाने का नोटिस आ गया है।

ये सिस्टम की निर्ममता की बदतरीन मिसाल है कि उनकी पत्नी ने कोरोना को लील लिया लेकिन प्रबंधन के माथे पर शिकन तक नहीं आई। वेतन नहीं देना था तो नहीं दिया। पिछले अप्रैल से उनको चवन्नी बतौर वेतन मिला है। अहम पहलू ये है कि प्रो. अरविंद कभी संघ के भी मुरीद हुआ करते थे और उसकी मदद करने से भी पीछे नहीं रहा करते थे। संघ इस आड़े वक्त पर उनके साथ नैतिक रूप से तो खड़ा है लेकिन अपने ही आनुषंगिक संगठन BJP की सरकार में उनको इंसाफ दिलाने में अभी तक नाकामयाब ही साबित हुआ है। सिस्टम के कारण ये मसला पुष्कर सरकार की छवि पर नकारात्मक ढंग से असर डाल सकता है। खास तौर पर टिहरी और आसपास के ईलाकों के साथ ही बुद्धिजीवी तबके के बीच। CM ही तकनीकी शिक्षा के मंत्री भी हैं। अब उनको ही इस मामले में चाबुक उठा के सिस्टम सुधारना होगा।

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