सियासत::हमले की कोशिश में दरकता काँग्रेस का Defence!!BJP ने तैयार किया चक्रव्यूह

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अपने MLA राजकुमार को BJP जाने से रोक नहीं सके हरीश-गणेश

Lt Gen गुरमीत सिंह को Governor बना के किसान-फौजी-Ex फ़ौजियों पर निशाना

Chetan Gurung

उत्तराखंड Congress हाल के दिनों तक अच्छा करती दिख रही थी। उसके दिग्गज हरीश रावत एक के बाद एक कटाक्ष-व्यंग्य बाणों-परिपक्व बयानों से सत्तारूढ़ BJP पर प्रहार कर रहे थे। नए PCC अध्यक्ष गणेश गोदियाल अपनी Leadership से छाप छोड़ रहे थे। पार्टी नई उमंग-जोश-आक्रामक तेवरों में दिख रही थी। अचानक ही BJP ने ऐसा जवाबी हमला बोल दिया है कि काँग्रेस में खलबली-हड़बड़ी का आलम नजर आने लगा है। उसको अपने MLA-बड़े नामों को विधानसभा चुनाव तक बचाए रखने में बहुत दम लगाना पड़ रहा।

BJP ने पहले तो Independent धनोल्टी MLA प्रीतम पँवार को खींच के Congress को चौंकाया। फिर Congress को उसके ही पुरोला MLA राजकुमार के हाथों में कमल का फूल थमा के हिला डाला। राजकुमार 9 साल बाद फिर से BJP लौटे। बेबी रानी मौर्य के स्थान पर Governor के तौर पर Lt General गुरमीत सिंह को उत्तराखंड ला के BJP हाई कमान ने नाराज किसानों और Ex फ़ौजियों व फ़ौजियों-वर्दी सेवा वालों को प्रभावित करने का जोरदार कदम भी साथ-साथ उठा दिया है। काँग्रेस लगता है कि BJP की चालों को या तो समझ नहीं पा रही या फिर उसके पास न तो BJP जैसे व्यूह रचनाकार हैं न ही वैसे संसाधन, जो केंद्र और उत्तराखंड में सत्तारूढ़ पार्टी के पास प्रचुर संख्या में हैं।

हरीश रावत (दाएँ) और गणेश गोदियाल (बाएँ) को विधानसभा चुनाव जीतना है तो अपने MLA-नेताओं को बीजेपी जाने से रोकना ही होगा।

काँग्रेस की कोशिश शुरुआत में CM चेहरे के तौर पर BJP को अपनी चालों की धरती पर ला के उलझाने की दिख रही थी। ये चाल उल्टी पड़ गई। पुष्कर सिंह धामी को फिर CM बनाने का ऐलान BJP की तरफ से कई बार हो गए। खुद काँग्रेस आला कमान इस मुद्दे पर खामोशी अख़्तियार किए हुए है। सूरते हाल ये है कि इस बिन्दु पर खुद काँग्रेस उलझ गई है। पार्टी में एक खेमे के लोग चाहते हैं कि चुनाव में CM Candidate के तौर पर हरीश रावत को पेश किया जाए। नेता विधायक दल प्रीतम सिंह लॉबी इसके हक में नहीं है। ये पार्टी के कई बड़े नेता साफ कहते हैं। उनका कहना है कि CM कौन होगा ये चुनाव के बाद विधायक दल तय करे, वही बेहतर है।

PCC अध्यक्ष गणेश हरीश के ही खेमे के हैं लेकिन वह बाखूबी जानते हैं कि सत्ता में पार्टी आई तो उनके भी CM बनने के मौके सुनहरे होंगे। ऐसे में वह हरीश को CM चेहरा बनाने के लिए जी जान लगा देंगे, ऐसा सोचना अतिश्योक्ति होगी। आखिर CM बनने की ख़्वाहिश हर किसी की होती है। अपनी उलझनों में घिरे काँग्रेस को अभी और भी झटके लग सकते हैं। उसके कुछ और MLA कमल के फूल को निहार रहे हैं। ऐसा BJP सूत्र ही नहीं कह रहे। खुद कुछ काँग्रेसी भी अंदेशा जता रहे हैं। चर्चाओं के दायरे में विजयपाल सिंह सजवान और कुछ MLAs हैं। ये तय है कि काँग्रेस का सत्ता में आने का ख्वाब तभी पूरा हो सकता है जब वह BJP के खिलाफ Anti Incumbency लहर उत्पन्न कर सके।

अब तक इसी समीकरण ने हर सत्तारूढ़ पार्टी को आम चुनावों में धराशाई कर उनके लगातार दूसरी बार सरकार बनाने की तमन्ना को चकनाचूर किया है। सत्ता विरोधी लहर बनाने के बजाए ऐसा लग रहा है कि काँग्रेस को सारा ध्यान अब अपने लोगों को बीजेपी में जाने से रोकने की तरफ लगाना पड़ेगा। इससे उसके आगे के चुनाव अभियानों की रफ्तार पर निश्चित रूप से असर पड़ सकता है। इसमें शक नहीं कि BJP के पास कहीं बेहतर रणनीति और योजनाकार हैं। हाई कमान खुद मोर्चों पर जुटा है। काँग्रेस को देख के लगता है कि उसने सिर्फ हरीश-गणेश-प्रीतम के भरोसे उत्तराखंड को अभी तक छोड़ा हुआ है।

BJP हाई कमान ने राज्यपाल बेबी रानी मौर्य को भले किसी शिकायत के कारण हटाया हो, लेकिन ये सच है कि साफ-सुथरी प्रतिष्ठा वाले और दिल्ली के द्वारिका में छोटे से सामान्य से घर में रह रहे गुरमीत सिंह को उत्तराखंड का राज्यपाल बना के `एक पंथ-दो काज’ कर दिया। सिखों और किसानों की बहुलता वाले उधम सिंह नगर में BJP की स्थिति इससे बेहतर होने की वह उम्मीद करेगी। फ़ौजियों-पूर्व फ़ौजियों को लुभाना भी उसकी रणनीति का हिस्सा है, जो नए राज्यपाल के चलते काफी हद तक सफल हो सकता है।

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