सियासी तीर::पंजाब में ऐसे उलझे हरीश कि नहीं भाँप पाए घर उजड़ने का खतरा:फिर संकटकाल

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पुष्कर-BJP की खुफिया सेंधमारी से काँग्रेस में जबर्दस्त खलबली:इम्तिहान की भट्टी पर PCC अध्यक्ष गणेश

Chetan Gurung

युवा CM पुष्कर सिंह धामी की अगुवाई में BJP ने काँग्रेस के लिए बड़ा सिर दर्द पैदा कर डाला है

पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच की अहं की लड़ाई को काफी हद तक शांत करने में उत्तराखंड के Ex CM और काँग्रेस के बचे-खुचे दिग्गज पुराने खुर्राण्ट में शामिल हरीश रावत का खासा रोल रहा। वहाँ तो काँग्रेस को लगता है सुकून मिल गया है लेकिन जो उत्तराखंड हरीश की कर्म भूमि है, वहाँ एक बार फिर शायद हरीश गफलत का शिकार हो गए। यहाँ उनको BJP तथा CM पुष्कर सिंह धामी काँग्रेस विधायकों में तोड़-फोड़ कर Tension दे रहे। ये तब हो रहा जब वह ये मान चुके थे कि हालात उनके और काँग्रेस के मुफीद तथा बाखूबी काबू में हैं।

हरीश जब तकरीबन पाँच साल पहले तब अति आत्मविश्वास का शिकार हुए थे, जब वह CM थे और उनके  पूर्ववर्ती विजय बहुगुणा ने एक दिन अचानक काँग्रेस के कई MLAs और मंत्रियों के साथ काँग्रेस छोड़ दी। छोड़ ही नहीं दी थी बल्कि सरकार गिरा डाली थी। भले बाद में Supreme Court से सरकार वापिस मिली। उस वक्त हरीश को शायद ये यकीन नहीं था कि BJP इतना बड़ी साजिश उनकी सरकार के खिलाफ रच सकती है। इससे भी ज्यादा उनको चौंकाया था पार्टी छोड़ के गए यशपाल आर्य-हरक सिंह रावत ने जो उनकी सरकार में मंत्री थे।

इस बार फिर पुष्कर के CM बनने के कुछ हफ्तों बाद से ही BJP ने अपनी कूटनीतिक चालों से काँग्रेस को हिलाना शुरू कर दिया है। हरीश को लग रहा होगा कि उत्तराखण्ड तो जेब में है। बस पंजाब संकट निबटा लूँ। पार्टी हाई कमान उन पर फिदा हो जाएगा। उनका निशाना CM की कुर्सी ही है। ये सभी जानते हैं। इसमें शक नहीं कि हरीश ने पंजाब में अनुभव और परिपक्वता दिखाते हुए अपनी पार्टी को राहत दिला दी, लेकिन इस फेर में वह इतने व्यस्त भी हो गए शायद कि अपने घर में कब सेंधमारी हो गई, ये ही पता नहीं चल पाया। निर्दलीय MLA प्रीतम पँवार के BJP में शामिल होने से काँग्रेस के कान खड़े तो हो गए थे। बस हालात का अंदाज शायद नहीं लगा पाई।   

खुद के MLA राजकुमार के भी BJP में चले जाने और अब अन्य कईयों के भी BJP के संपर्क में होने की सुगबुगाहट ने ऐन विधानसभा चुनाव से पहले हरीश-गणेश-LoP प्रीतम सिंह और काँग्रेस की नींद उड़ा डाली है। काँग्रेस की तरफ से भी कहा तो जा रहा है कि BJP के कई नेता उनके यहाँ आने के लिए संपर्क कर रहे हैं। ये नामुमकिन नहीं लेकिन जब तक कोई बड़ा या प्रमुख नाम उसके यहाँ आ नहीं जाता, तब तक इसको सियासी माहौल बनाने की कोशिश और विपक्ष पर दबाव बनाने की कोशिश से अधिक नहीं माना जाएगा।

ये लड़ाई पुष्कर बनाम हरीश-गणेश दिखती है लेकिन वास्तव में ऐसा है नहीं। पुष्कर के साथ पूरा BJP Think Tank-हाई कमान-संघ है। सच तो ये है कि युवा CM को मैदान संभालने और सरकार को बेहतर ढंग से चलाने का इशारा ऊपर से है। रणनीतिक सियासी लड़ाई संभालने के लिए पुष्कर के पास बहुत भारी-भरकम अदृश्य फौज-सेनापतियों का शक्तिशाली दस्ता है। हरीश-गणेश-प्रीतम पर बीजेपी-पुष्कर ने सेंधमारी से ऐसा दबाव बना दिया है कि तीनों अब BJP अपना CM चेहरा बताए पर ज़ोर देने के बजाए हाई कमान के सामने अपना चेहरा बचाने की कोशिश में जुटे हैं।

दूसरों के विधायकों को खींचने और अपने पाले में लाने का जो हुनर BJP के पास है, उसको काँग्रेस शायद भूल गई थी। अब जब उसको ये खतरा सिर पर मँडराता दिख रहा कि उसके अन्य MLAs और बड़े नेता भी कमल के फूल के प्रति आसक्ति दिखा सकते हैं। वह अचानक नींद से जागी दिख रही। सूत्रों के मुताबिक वह अपने सभी बड़े नामों से लगातार संपर्क में है। ये सुनिश्चित रोज कर रही कि उनका मन भटक तो नहीं रहा या कमल वाले उनको भटकाने की कोशिश तो नहीं कर रहे!

पुष्कर और गणेश के लिए ये विधानसभा चुनाव फतह करना सियासी नजरिए से बेहद जरूरी है। BJP चुनाव जीत जाती है तो पुष्कर का कद पार्टी के भीतर कहीं अधिक बढ़ जाएगा। CM तो वही बनेंगे, इसमें अगर-मगर नहीं। कभी भी कोई सत्तारूढ़ पार्टी कभी विधानसभा का आम चुनाव नहीं जीती है। काँग्रेस जीत जाती है तो गणेश को प्रीतम-हरीश के बीच के Cold War का फायदा जरूर मिल सकता है। हो सकता है तब CM वह बनेंगे। उनका हर धड़े में उसी तरह सम्मान है जैसा पुष्कर का अपनी पार्टी में।

काँग्रेस अगर हार गई तो गणेश ऐसे पहले PCC अध्यक्ष होंगे, जो विपक्ष में रहते हुए चुनाव नहीं जिता पाए। इसका नुक्सान उनको भविष्य में पार्टी में अपनी अहमियत खो के चुकानी पड़ सकती है। ये भी अलबत्ता सच है कि सोए-अघाए से दिख रही काँग्रेस में नई ऊर्जा और फुर्ती गणेश के ऊर्जावान नेतृत्व के बाद ही दिख रही थी। हरीश लगातार सक्रिय तो रहे लेकिन वह पार्टी में ऐसा जोश नहीं भर नहीं पा रहे थे, जैसा अभी दिख रहा। इसके बावजूद इसमें दो राय नहीं कि हरीश-गणेश-प्रीतम और काँग्रेस बीजेपी के सेंधमारी वार और आगे और तगड़े हमलों की आशंका से हिल उठी है।  

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