जिनकी खुद की डिग्री पर अंगुली वह VC चुनेंगे!UTU VC की स्क्रीनिंग कमेटी में अमित अग्रवाल भी शामिल

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टनकपुर के APJ अब्दुल कलाम Engineering कॉलेज के Director की कुर्सी पर भी काबिज

पेट्रोलियम University के Associate प्रोफेसर भी हैं:मद्रास HC ने डिस्टेनेंस लर्निंग वालों को शिक्षक के लिए भी अपात्र माना है

Chetan Gurung

उम्मीद है LT General (Ret) गुरमीत सिंह के राज्यपाल बनने से विश्वविद्यालयों और सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में खेल खत्म होंगे

उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति के चयन के लिए बनी सरकार की Screening Committee में टनकपुर के APJ अब्दुल कलाम इंजीनियरिंग कॉलेज के Director अमित अग्रवाल को भी शामिल किया है। इसमें खास बात ये है कि खुद उनकी MTech डिग्री को ले के सवाल है, जो डिस्टेन्स लर्निंग वाली है। मद्रास हाई कोर्ट ने इस डिग्री वाले को शिक्षक के लिए भी अपात्र घोषित किया है। खुद सरकार ने उनके खिलाफ DM (अल्मोड़ा) को जांच सौंपी थी, जो कहाँ छिपी है, पता नहीं।  

ये तो साफ है कि उत्तराखंड के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों के Directors और विश्वविद्यालयों में बैठे कुलपतियों के ट्रैक रेकॉर्ड न सिर्फ बहुत दागदार हैं बल्कि उनके खिलाफ आरोप और जांच बैठना सामान्य बात हो गई है। श्रीदेव सुमन और UTU के कुलपति की दोहरी ज़िम्मेदारी संभाल रहे पीताम्बर ध्यानी भी सरकार की जांच का सामना कर रहे हैं। उन पर कई प्राइवेट कॉलेजों के साथ उदार और नरम रुख अपनाने तथा उनके गंभीर कृत्यों की भी अनदेखी करने के आरोप हैं।

अमित अग्रवाल की MTech डिग्री पर सवाल है

ये उत्तराखंड में ही मुमकिन हो सकता है कि सरकार के स्तर पर जांच के बावजूद वह दोनों कुर्सियों पर आज भी बैठे हुए हैं। शासन के अफसर भले उनसे खुश या संतुष्ट नहीं हैं, लेकिन वे अब तक कुछ बिगाड़ भी नहीं पाए। इसकी एक वजह डॉ.पीताम्बर का राजभवन में अच्छी पकड़ को माना जा रहा था। अब राज्यपाल बेबी रानी मौर्य के हट जाने और बेहद साफ-सुथरी प्रतिष्ठा वाले नए राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रि) गुरमीत सिंह के आने से कुलपतियों के खेलों पर अंकुश लगने की संभावना जतलाई जा रही है। 

डॉ. पीताम्बर को UTU से हटाने की तैयारी हो गई है लेकिन नए कुलपति के लिए जो स्क्रीनिंग कमेटी सरकार ने बनाई है वह गज़ब की है। इसमें अपर सचिव (IAS) डॉ.इकबाल अहमद के साथ टनकपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक अमित अग्रवाल और SPIU के परियोजना प्रशासक (Teqip-3) के डॉ. मनोज पांडा को शामिल किया गया है। अमित को उनके खिलाफ तमाम आरोपों और उनकी डिस्टेन्स लर्निंग वाली डिग्री के बावजूद UTU VC की स्क्रीनिंग कमेटी में शामिल किया जाना हैरत में डालता है।

इस समिति के फैसले पर कल कोई भी शख्स अदालत जा के Stay ला सकता है। इसमें कोई बड़ी बात नहीं होगी। स्क्रीनिंग कमेटी के गठन का आदेश ACS (तकनीकी शिक्षा) राधा रतूड़ी की तरफ से जारी हुआ है। इस तरह के फैसले और कदम पुष्कर सरकार को विवादों में डाल सकते हैं। अभी तो ये भी साफ नहीं हो पाया है कि त्रिवेन्द्र सरकार के वक्त अमित के खिलाफ जो जांच DM स्तर पर बिठाई गई थी, उसका क्या हुआ। रिपोर्ट क्या आई और क्या कार्रवाई हुई, किसी को नहीं पता।

अमित अभी भी UPES (प्राइवेट विवि) के प्रोफेसर हैं। छुट्टी ले के टनकपुर कॉलेज में डाइरेक्टर बने हुए हैं। वह उत्तराखंड की Affilating विवि के VC के चयन करने वालों में शामिल किए गए हैं, ये विडम्बना है। तकनीकी शिक्षा के विशेषज्ञों के मुताबिक डिस्टेन्स लर्निग किस्म की डिग्री को मान्यता नहीं है। ताज्जुब तो इस पर भी जताया जा रहा है कि आखिर इस किस्म के निदेशकों की नियुक्ति भला सरकार ने क्या देख के सरकारी कॉलेज में बतौर Director कर दी थी। THDC-IHET के Director की कुर्सी से भी गीतम सिंह तोमर की विदाई फर्जी दस्तावेजों के चलते की गई थी।

पिथौरागढ़ के नन्हीं परी इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक अंबरीष विद्यार्थी भी फर्जी दस्तावेजों के मामले में फंसे। शासन के अफसरों ने `Newsspace’ से कहा, `अमित के बारे में भी कई शिकायतें मिली हैं। उस पर परीक्षण किया जाएगा’। ये सब खेल तब हो रहे जब THDC-IHET (टिहरी) के Associate प्रोफेसर डॉ. अरविंद कुमार सिंह को हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पिछले 5 महीने से तनख्वाह तक नहीं मिली है। वह शासन तक के धक्के खा चुके हैं।

शासन को उनकी और HC तक की फिक्र नहीं है लेकिन संदिग्ध डिग्री वालों पर पूरी नजरें इनायत है। किसी को इसकी फिक्र नहीं है कि कोरोना काल में प्रो अरविंद धनाभाव में पत्नी का ईलाज नहीं करा सके और वह महामारी का शिकार हो चल बसीं। उनके दोनों बच्चों को उनके स्कूल फीस न दे पाने के कारण निकालने का नोटिस दे चुके हैं।

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