
नई दिल्ली: युगपुरुष स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि पर आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश के कई शीर्ष केंद्रीय मंत्रियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। नेताओं ने भारतीय संस्कृति, अध्यात्म की अलख जगाने और राष्ट्र निर्माण में उनके ऐतिहासिक योगदान को याद किया। उन्होंने एक सुर में कहा कि स्वामी जी के ओजस्वी विचार आज सदियों बाद भी हमारे युवाओं के दिलों में धड़क रहे हैं और एक ‘विकसित भारत’ के सपने को सच करने के लिए नई ऊर्जा फूंक रहे हैं।
‘वैश्विक मंच पर भारतीय चेतना को दिलाई पहचान’ — पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर अपने संदेश में स्वामी विवेकानंद को याद करते हुए लिखा कि उन्होंने भारतीय संस्कृति, हमारी पावन आध्यात्मिक विरासत और राष्ट्र चेतना को वैश्विक स्तर पर एक नई और अमिट पहचान दिलाई। पीएम मोदी ने कहा:
‘मजबूत चरित्र और आत्मविश्वास की दी प्रेरणा’ — राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्वामी जी के चरणों में शीश नवाते हुए कहा कि उन्होंने सनातन विचारधारा, अध्यात्म और भारतीय मूल्यों को विश्व पटल पर बड़े गौरव के साथ स्थापित किया। राजनाथ सिंह ने रेखांकित किया कि स्वामी विवेकानंद ने केवल उपदेश नहीं दिए, बल्कि देशभक्ति, निस्वार्थ समाज सेवा, नैतिक मूल्यों और चरित्र निर्माण का वो व्यावहारिक रास्ता दिखाया जो एक मजबूत और आत्मविश्वासी नागरिक तैयार करता है—और ऐसे ही नागरिक किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं।
‘उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको’ — शिवराज सिंह चौहान
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वामी विवेकानंद को युवाओं का सबसे बड़ा रोल मॉडल बताते हुए एक बेहद निजी और आत्मीय बात साझा की। उन्होंने कहा कि स्वामी जी के विचार बचपन से ही उनके खुद के जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा रहे हैं। स्वामी विवेकानंद के उस कालजयी और विश्वप्रसिद्ध संदेश “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए” को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उनके ये शब्द आज भी युवाओं के भीतर सोया हुआ आत्मविश्वास जगा देते हैं और उन्हें राष्ट्र सेवा व समाज के नवनिर्माण के लिए दौड़ने की शक्ति देते हैं।
ज्ञान और राष्ट्रवादी चिंतन की अनमोल विरासत — जेपी नड्डा और धर्मेंद्र प्रधान
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी स्वामी विवेकानंद को नमन करते हुए देश के प्रति उनके दृष्टिकोण को याद किया। दोनों नेताओं ने कहा कि स्वामी जी ने अपने अगाध ज्ञान, ओजस्वी व्यक्तित्व और राष्ट्रवादी चिंतन के दम पर पूरी दुनिया में भारत का सिर फख्र से ऊंचा किया। उन्होंने युवाओं की रगों में आत्मविश्वास, सच्ची राष्ट्रभक्ति और मानव सेवा की भावना को नए सिरे से जीवित किया।
सनातन संस्कृति के वो ऐतिहासिक पल
स्वामी विवेकानंद, जिनका मूल नाम नरेंद्रनाथ दत्त था, उन्होंने ही रामकृष्ण मिशन की स्थापना कर मानव सेवा को भगवान की सेवा का दर्जा दिया था। वर्ष 1893 में अमेरिका के शिकागो विश्व धर्म संसद में जब उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत “अमेरिका के भाइयों और बहनों…” कहकर की थी, तो उस ऐतिहासिक संबोधन ने पूरी दुनिया को भारत के आगे नतमस्तक होने पर मजबूर कर दिया था और उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई थी। उनका संपूर्ण जीवन-दर्शन और मानव सेवा का संदेश आज भी हमारे समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरणा का सबसे पवित्र स्रोत है।



