
उत्तरकाशी : सेवा, सुरक्षा और सहयोग उत्तराखंड पुलिस का यह ध्येय वाक्य उत्तरकाशी में चरितार्थ होता दिखाई दिया। जहां एक ओर खाकी वर्दी को अक्सर कठोरता का प्रतीक माना जाता है, वहीं उत्तरकाशी पुलिस ने एक अज्ञात महिला के शव को पूरे विधि विधान से अंतिम संस्कार मानवता की एक अनूठी मिसाल पेश की है।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही मे उत्तरकाशी जनपद के अंतर्गत एक अज्ञात महिला का शव बरामद हुआ था। पुलिस द्वारा काफी प्रयासों के बावजूद महिला के शिनाख्त नहीं हो सकी और ना ही कोई वारिस सामने आया। नियमअनुसार, शिनाख्त के लिए आवश्यक समय बीत जाने के बाद अक्सर ऐसे मामलों में केवल औपचारिक कार्रवाई की जाती है, लेकिन यहां पुलिस का एक अलग ही रूप देखने को मिला।
खाकी ने निभाया बेटे का फर्ज
जब महिला का कोई अपना नहीं मिला, तो पुलिसकर्मियों ने ही आगे बढ़कर उनके अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई। पुलिस टीम ने न केवल शव को कंधा दिया, बल्कि भागीरथी के तट पर हिंदू रीति रिवाज के साथ महिला का अंतिम संस्कार संपन्न कराया।
सम्मानजनक विदाई: पुलिस ने सुनिश्चित किया कि लावारिस होने के बावजूद महिला को एक गरिमापूर्ण विदाई मिले।
विधि-विधान : मंत्रउच्चारण और पारंपरिक पदयात्रा के साथ मुख्यअग्नि दी गई।
सोशल मीडिया पर सरहना की लहर
इस घटना की तस्वीरे और जानकारी जैसे ही सार्वजनिक हुई, लोगों ने पुलिस के इस कार्य की जमकर प्रशंसा की। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पुलिस के इस संवेदनशीलता भरे कदम से जनता का पुलिस पर विश्वास और मजबूत होता है।
पुलिस का काम सिर्फ अपराध रोकना नहीं बल्कि समाज में मानवीय संवेदनाओं को जीवित रखना भी है। उत्तरकाशी पुलिस ने आज यह साबित कर दिया।
वर्दी के पीछे की इंसानियत
उत्तरकाशी पुलिस का यह कार्य उन लोगों के लिए एक बड़ा संदेश है जो पुलिस को केवल कानूनी मशीन समझते हैं। यह घटना याद दिलाती है की वर्दी के कि वर्दी के भीतर भी एक संवेदनशील इंसान होता है, जो जरूरत पढ़ने पर लावारिसों का वारिस बनने से पीछे नहीं हटता।



