
होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) संकट के कारण सऊदी अरामको का एलपीजी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (CP) फरवरी से अब तक लगभग 46% बढ़ा। वेस्ट एशिया संकट के चलते घरेलू एलपीजी सिलिंडर के दामों में ₹29 की बढ़ोतरी की गई है। PMUY ग्राहकों को ₹300 की अतिरिक्त सब्सिडी के बाद सिलिंडर केवल ₹642 में मिल रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक कुल घाटा (अंडर-रिकवरी) ₹60,000 करोड़ तक पहुंचा; कैबिनेट ने तेल कंपनियों के लिए ₹30,000 करोड़ के मुआवजे को मंजूरी दी।
वैश्विक संकट और लागत में भारी उछाल
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट में उत्पन्न हुए भू-राजनीतिक तनाव और रुकावटों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में आग लगी हुई है। मिडिल ईस्ट गल्फ से होने वाले एक्सपोर्ट पर सख्ती के कारण सऊदी अरामको का कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (CP) रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है:
फरवरी 2026: प्रोपेन-ब्यूटेन के 50:50 मिक्स के लिए ब्लेंडेड सऊदी CP 542.50 अमेरिकी डॉलर प्रति टन था। अप्रैल 2026: यह बढ़कर 775 अमेरिकी डॉलर प्रति टन हुआ। जून 2026: यह और ज्यादा बढ़कर 790 अमेरिकी डॉलर प्रति टन के स्तर पर पहुंच गया है। इस वैश्विक तेजी के कारण भारत में आयात होने वाले मॉलिक्यूल की ‘लैंडेड कॉस्ट’ बहुत बढ़ गई है, जिससे एक घरेलू सिलिंडर की सप्लाई लागत ₹1,600 से अधिक हो चुकी है।
तेल कंपनियों और सरकार पर ₹60,000 करोड़ का बोझ
वास्तविक लागत ₹1,600 से अधिक होने और बाजार में इसे कम कीमत पर बेचने के कारण सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को प्रति सिलिंडर लगभग ₹700 का भारी नुकसान (अंडर-रिकवरी) उठाना पड़ रहा है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि घरेलू एलपीजी पर कुल अंडर-रिकवरी का आंकड़ा वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक बढ़कर ₹60,000 करोड़ तक पहुंच गया है, जो पिछले साल ₹41,338 करोड़ था। इस भारी वित्तीय अंतर की भरपाई के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने तेल कंपनियों को ₹30,000 करोड़ का एकमुश्त मुआवजा देने की मंजूरी दी है। इसी वित्तीय दबाव के कारण हाल ही में कीमतों में ₹29 की मामूली बढ़ोतरी करनी पड़ी है।
दुनिया भर में सबसे सस्ती रसोई गैस भारत में (तुलनात्मक आंकड़े)
सरकार ने डेटा जारी कर बताया कि इतनी विपरीत वैश्विक परिस्थितियों के बाद भी भारत में एलपीजी की कीमतें पड़ोसी देशों और विकसित अर्थव्यवस्थाओं (विकसित देशों) की तुलना में काफी कम हैं।
देश सिलिंडर की अनुमानित कीमत (₹ में)
कनाडा ₹2,411
ऑस्ट्रेलिया ₹1,765
अमेरिका ₹1,755
श्रीलंका ₹1,241
बांग्लादेश ₹1,225
नेपाल ₹1,207
पाकिस्तान ₹1,046
भारत (सामान्य उपभोक्ता – दिल्ली) ₹942
भारत (उज्ज्वला लाभार्थी) ₹642
उज्ज्वला योजना: 10.58 करोड़ परिवारों को सुरक्षा कवच
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के 10.58 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को इस वैश्विक महंगाई से बचाने के लिए सरकार हर साल पहले चार रिफिल पर ₹300 प्रति सिलिंडर का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) दे रही है। इस तरह उन्हें एक सिलिंडर के लिए केवल ₹642 चुकाने पड़ते हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार मूल्य से लगभग 60% कम है। यह कीमत एक उज्ज्वला परिवार की सालाना औसत खपत के लिए पर्याप्त है।
सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने के लिए भारत के रणनीतिक कदम
होर्मुज स्ट्रेट में गतिरोध के बावजूद भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल रहा, जिसने अपने देश में एनर्जी कार्गो की सप्लाई को बाधित नहीं होने दिया। इसके लिए सरकार ने बहुआयामी रणनीति अपनाई:
आयात पर निर्भरता और उसकी कमी को पाटने के लिए घरेलू एलपीजी उत्पादन को 60% से अधिक बढ़ाकर 52 TMT किया गया। नए देशों से साझेदारी: केवल मिडिल ईस्ट पर निर्भर न रहते हुए अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे नए देशों से एलपीजी का आयात शुरू किया गया। घरेलू सब्सिडी वाले सिलिंडरों का कमर्शियल मार्केट में दुरुपयोग रोकने के लिए OTP-आधारित डिलीवरी वेरिफिकेशन और डायवर्जन-रोधी उपायों को 90% तक बढ़ा दिया गया है। सरकार ने अंत में देश के उपभोक्ताओं से अपील की है कि एलपीजी एक बहुमूल्य और सब्सिडी युक्त संसाधन है, इसलिए ईंधन और ऊर्जा की बचत करने वाले खाना पकाने के तरीकों को अपनाएं।



