
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए उपराज्यपाल (LG) ने दिल्ली पुलिस आयुक्त (Police Commissioner) को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) की धारा 3(2) के तहत किसी भी व्यक्ति को एहतियातन हिरासत (Precautionary Detention) में लेने के अधिकार को 18 अक्तूबर 2026 तक के लिए बढ़ा दिया है।
दिल्ली सरकार के गृह विभाग द्वारा 15 जुलाई को जारी अधिसूचना के बाद इस कदम को लेकर चर्चाएं गर्म हो गई थीं। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह एक सामान्य और नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया (Routine Administrative Order) है, जिसे हर तीन महीने में नवीनीकृत (Renew) किया जाता है।
दिल्ली पुलिस की सफाई: ‘सीजेपी प्रदर्शनों से नहीं कोई संबंध’
छात्रों और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के चल रहे प्रदर्शनों के बीच इस फैसले को लेकर उठ रहे सवालों का दिल्ली पुलिस ने खंडन किया है:
- नियमित प्रक्रिया: पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एनएसए के तहत हिरासत की शक्तियों को 1980 के दशक से ही हर तीन महीने में नियमित रूप से बढ़ाया जाता रहा है। इसके लिए कोई विशेष प्रस्ताव या नया अनुरोध नहीं भेजा गया था।
- भ्रम दूर किया: पुलिस ने साफ किया कि दिल्ली में चल रहे पेपर लीक विरोधी प्रदर्शनों या किसी विशेष आंदोलन से निपटने के लिए कोई नई या विशेष शक्ति लागू नहीं की गई है।
क्यों चर्चा में आया यह फैसला?
यह आदेश ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुई थीं:
20 जुलाई की हिंसा और आरोप-प्रत्यारोप:
- प्रदर्शनकारियों का आरोप: 20 जुलाई को संसद कूच के दौरान पुलिस ने निर्दोष छात्रों पर बर्बर लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े, जिससे कई छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए।
- पुलिस का पक्ष: दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारी उग्र हो गए थे और उन्होंने सुरक्षाकर्मियों पर पथराव व गाड़ियों में तोड़फोड़ की। इस हिंसक झड़प में 2 वरिष्ठ एसीपी (ACP) समेत 118 पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
क्या है राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA)?
राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) एक सख्त कानून है, जो सरकार और पुलिस को किसी भी व्यक्ति को राष्ट्र की सुरक्षा या कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बनने से रोकने के लिए पहले ही हिरासत में लेने का अधिकार देता है:
- हिरासत की अवधि: NSA के तहत किसी व्यक्ति को 3 महीने से लेकर 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है।
- एहतियाती कदम: यह एक निवारक निरोध (Preventive Detention) है, जिसमें तत्काल आधार पर जमानत की प्रक्रिया लागू नहीं होती।



