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कॉर्बेट में घड़ियाल संरक्षण का बड़ा अभियान

रामनगर: विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में अब बाघों के साथ-साथ संकटग्रस्त घड़ियालों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) और भारत सरकार के सहयोग से घड़ियालों के संरक्षण के लिए ढाई वर्ष की वैज्ञानिक शोध परियोजना शुरू की गई है।

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने बताया कि इस परियोजना के तहत घड़ियालों के प्राकृतिक आवास की मैपिंग, उनकी वास्तविक आबादी का आकलन और नेस्टिंग साइट्स का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि घड़ियाल किन स्थानों पर अंडे देते हैं और उनके संरक्षण के लिए किन उपायों की आवश्यकता है।

उन्होंने बताया कि हाल ही में हुए सर्वेक्षण में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में करीब 150 से 200 घड़ियाल दर्ज किए गए हैं। वहीं उपलब्ध नवीनतम आंकड़ों के अनुसार क्षेत्र में 197 मगरमच्छ, 183 घड़ियाल और 161 ओटर्स मौजूद हैं, जो यहां की समृद्ध जलीय जैव विविधता को दर्शाते हैं।

डॉ. बडोला ने बताया कि परियोजना के तहत मानसून से पहले पहला सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है, जबकि दूसरा सर्वेक्षण बारिश समाप्त होने के बाद किया जाएगा। करीब दो से ढाई वर्षों तक चलने वाली इस रिसर्च के निष्कर्ष भविष्य में घड़ियाल संरक्षण की प्रभावी रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से होकर बहने वाली रामगंगा नदी घड़ियाल, मगरमच्छ और ओटर्स जैसे दुर्लभ जलीय जीवों का प्रमुख आवास है। ऐसे में यह परियोजना न केवल कॉर्बेट बल्कि पूरे देश में जलीय जैव विविधता और संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.

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