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राज्यसभा में क्या है ‘नियम 267’, जिस पर अड़ा है विपक्ष? 36 सालों में केवल 11 बार मिली है मंजूरी

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में जारी गतिरोध के केंद्र में इस समय ‘नियम 267’ (Rule 267) है। विपक्षी दल 20 जुलाई को छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर नियम 267 के तहत कार्यस्थगन कर तुरंत चर्चा कराने की मांग पर अड़े हुए हैं। वहीं, सभापति द्वारा इन नोटिसों को स्वीकार न किए जाने के कारण सदन में लगातार हंगामा देखने को मिल रहा है।

आइए समझते हैं कि आखिर क्या है संसदीय कार्यवाही का यह ‘नियम 267’ और विपक्ष केवल इसी नियम के तहत बहस कराने के लिए क्यों अड़ा हुआ है।

क्या है नियम 267 और यह इतना विशेष क्यों है?

राज्यसभा की संचालन नियमावली का ‘नियम 267’ एक बेहद असाधारण संसदीय प्रावधान है:

  • संपूर्ण कामकाज का स्थगन: यदि सभापति इस नियम के तहत नोटिस स्वीकार कर लेते हैं, तो उस दिन के लिए सूचीबद्ध सभी सरकारी, विधायी और अन्य कार्य स्थगित कर दिए जाते हैं और पूरे दिन केवल उसी एक विषय पर चर्चा होती है।
  • नियम 176 से भिन्नता: वहीं, दूसरी ओर ‘नियम 176’ के तहत केवल ढाई घंटे की अल्पकालिक (Short-Duration) चर्चा की जा सकती है, जिससे सदन का बाकी सामान्य कामकाज प्रभावित नहीं होता।
  • विपक्ष का तर्क: विपक्ष का मानना है कि छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मामला देश के लोकतांत्रिक अधिकारों और गंभीर राष्ट्रीय सरोकार से जुड़ा है, इसलिए इस पर ढाई घंटे की सामान्य बहस पर्याप्त नहीं है। इसे “दुर्लभ से दुर्लभतम” स्थिति मानते हुए पूरे दिन चर्चा कराई जानी चाहिए।

36 वर्षों का इतिहास: केवल 11 बार मिली है अनुमति

राज्यसभा के इतिहास में नियम 267 के तहत बहुत ही कम मौकों पर चर्चा की अनुमति दी गई है। पिछले 36 सालों में केवल 11 बार इस प्रावधान का इस्तेमाल हुआ है:

कार्यकालसभापतिअनुमति की संख्या
1990 – 1992डॉ. शंकर दयाल शर्मा4 बार
2002 – 2007भैरों सिंह शेखावत3 बार
2007 – 2017एम. हामिद अंसारी4 बार

किन प्रमुख मुद्दों पर हो चुकी है बहस?

  1. 2016 (आखिरी बार): नोटबंदी (Demonetisation) के मुद्दे पर पूर्व सभापति हामिद अंसारी ने अनुमति दी थी।
  2. 2015: बेमौसम बारिश और कृषि संकट पर चर्चा।
  3. 2013: निर्भया कांड के बाद देशभर में महिलाओं की सुरक्षा पर बहस।
  4. 2012: विदेशों में जमा काला धन।
  5. 2004: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और खाद्य तेल आयात में अनियमितताएं।
  6. 1990: खाड़ी युद्ध (Gulf War) से उपजे वैश्विक परिस्थितियों पर चर्चा।

सभापति का रुख

जहां विपक्ष इस नियम के तहत तुरंत चर्चा की मांग कर रहा है, वहीं सभापति का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियां इतनी असाधारण नहीं हैं कि सूचीबद्ध संपूर्ण विधायी कार्य को रोककर नियम 267 का सहारा लिया जाए। यही कारण है कि दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है।

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