Friday, July 3, 2020
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अच्छी खबर:कोरोना एक्टिव मरीजों का आंकड़ा 500 से नीचे आया

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आज 64 नए मरीज, देहरादून में सबसे ज्यादा 21

2481 ठीक हो के घर पहुंचे, डबलिंग रेट में सुधार जारी  

Chetan Gurung

उत्तराखंड के लिए अच्छी खबर है। राज्य भर में कोविड-19 के ईलाज करा रहे मरीजों की तादाद गिर के 500 से नीचे 498 पर आ गई है। आज 64 नए केस सामने आए, लेकिन डबलिंग रेट में भी सुधार जारी है।

राज्य में रिकवरी रेट बहुत अच्छा है। 2481 लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि पॉज़िटिव की कुल तादाद अभी तक 3048 हो चुकी है। 42 मौतें भी कोविड-19 के खाते में गई हैं, फिर भी सक्रिय केसों की गिरती तादाद से राहत महसूस की जा रही है। खास तौर पर ये देखते हुए कि सैंपल की तादाद बढ़ गई है। बजार और दफ्तर खोल दिए गए हैं।

डबलिंग रेट 53.8 दिन का हो गया है। अभी 5753 सैंपल की रिपोर्ट आनी है। आज की रिपोर्ट में सबसे ज्यादा 21 कोरोना पॉज़िटिव केस देहरादून में सामने आए। नैनीताल में 13 और उधम सिंह नगर में 12 केस मिले। जो केस सामने आ रहे हैं, उनकी ट्रेवल हिस्ट्री है और कई ऐसे केस हैं, जो किसी पॉज़िटिव के कॉन्टेक्ट में आए थे।

हरिद्वार हॉट स्पॉट और कंटेनमेंट जोन के मामले में सबसे आगे (68) है। भले कोरोना पॉज़िटिव मामले में वह 317 केसों के साथ चौथे नंबर पर है। उससे ऊपर देहरादून (734), नैनीताल (526) और टिहरी (420) हैं। देहरादून में 10 कंटेनमेंट जोन हैं। वाह दूसरे नंबर पर है।

मेडिकल कॉलेज:PG नॉन क्लिनिकल में बॉन्ड सिस्टम खत्म

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सभी के लिए फीस 1 लाख हुई तय  

Chetan Gurung

त्रिवेन्द्र सरकार ने सरकारी कॉलेजों में PG नॉन क्लीनिकल कोर्स में बॉन्ड सिस्टम को खत्म कर दिया है। अब समान रूप से सभी के लिए फीस 1 लाख रुपए कर दी गई है।

वित्त और चिकित्सा-स्वास्थ्य सचिव अमित सिंह नेगी ने आदेश जारी कर ये सिस्टम लागू किया। इससे पहले PG कोर्स में पहले बॉन्ड न भरने वालों के लिए फीस 5 लाख और बॉन्ड भरने वालों की फीस 50 हजार रुपए थी।

एनोटॉमी, बोयोकेमिस्ट्री, फिजियोलॉजी, फार्माकोलॉजी, फारेनसिक मेडिसिन, माइक्रो बायलॉजी, कम्यूनिटी मेडिसिन में अब कोर्स की फीस एक जैसी एक लाख रुपए कर दी गई है। आदेश के मुताबिक सीटें खाली रहने और युवाओं में इन कोर्स के प्रति दिलचस्पी न रहने के कारण सरकार ने ये फैसला किया।

भ्रष्टाचार पर प्रहार:ट्रैपिंग-विजिलेन्स-इंटेलिजेंस-इंवेस्टिगेशन होगी और असरदार

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CM ने समीक्षा में दिए सिस्टम को और बेहतर करने के निर्देश

शासन की मंजूरी ले के आरोपियों पर विजिलेन्स छापों को मंजूरी

सोशल मीडिया की भी सख्त मॉनिटरिंग होगी

Chetan Gurung

सरकार ने भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए ट्रैपिंग-विजिलेन्स-इंटेलिजेंस पर फोकस रखने का फैसला किया है। तीनों महकमों की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शुक्रवार को साफ कहा कि अपनी ज़िम्मेदारी और फर्ज के निर्वहन में बिना हिचके-डरे कार्रवाई होनी चाहिए। इंवेस्टिगेशन पर भी उन्होंने खास तौर पर ज़ोर दिया।

भष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस (यानि भ्रष्टाचार कतई बर्दाश्त नहीं) का ऐलान करने वाली त्रिवेन्द्र सरकार विधानसभा चुनाव से पहले अपने सभी किस्म के दाग-धब्बे मिटा डालना चाहती है। इसके लिए वह भ्रष्टाचार उन्मूलन से जुड़े हर महकमे के कील वील दुरुस्त कर लेना चाहती है। आज की बैठक में उन्होंने माना कि सतर्कता अधिष्ठान को ट्रैप एवं  अन्वेषण सिस्टम को मजबूत करने की जरूरत है।

उन्होंने ट्रैपिंग सिस्टम में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए। शासन स्तर से महत्वपूर्ण प्रकरणों पर उन्होंने कहा कि गोपनीय जांच के बजाय खुली जांच एवं FIR दर्ज कर कार्रवाई की जाए। बैठक में निदेशक (सतर्कता) को हक दिया गया कि अभिसूचना संकलन एवं संदिग्ध मामलों में स्वतः संज्ञान लें। फिर इसके आधार पर आरोपी के आवासों या अन्य स्थानों पर छापे मारे जाएँ। इसके लिए सिर्फ अपर मुख्य सचिव (सतर्कता) के अनुमोदन की जरूरत होगी।

मुख्यमंत्री इस पर नाराज हुए कि कई महकमे लम्बी अवधि के बाद जांच विजिलेंस को देते हैं। उन्होंने कहा कि यदि विभाग को प्रकरण विजिलेंस को ट्रांसफर करना है तो यह कार्रवाई एक साल के अन्दर पूर्ण कर जी जाय। प्रत्येक विभाग में विजिलेंस नोडल अफसर एक माह के भीतर अपेक्षित सूचना सतर्कता विभाग को उपलब्ध कराने के लिए उत्तरदायी होंगे। बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रत्येक राज्य कर्मचारियों को हर साल प्रॉपर्टी रिटर्न अनिवार्य रूप से ऑनलाइन दाखिल करना होगा।

त्रिवेन्द्र ने कहा कि अभिसूचना तंत्र को और अधिक मजबूत किया जाए। इसके लिए थाना स्तर पर निरंतर समन्वय स्थापित किए जाएँ। राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दें। सीमांत क्षेत्रों के लोगों से निरंतर समन्वय स्थापित किया जाय। सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की मूलभूत आवश्यकताओं और वहां इन्फ्रास्टक्चर को विकसित किए जाने को प्राथमिकता दी जाय।

साथ ही केन्द्र सरकार की सीमांत क्षेत्र विकास परियोजना एवं राज्य सरकार की मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास योजना पर फोकस करने पर भी बल दिया गया। सोशल मीडिया की मॉनिटरिंग के लिए भी सिस्टम को मजबूत बनाने पर ज़ोर दिया गया। लॉ एवं आर्डर की दृष्टि से दुष्प्रचार करने वाले लोगों को चिन्हित कर उनके विरूद्ध कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक में अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव न्याय प्रेम सिंह खिमाल, सचिव गृह नितेश झा, डीजीपी अनिल कुमार रतूड़ी, डीजीपी कानून एवं व्यवस्था अशोक कुमार, एडीजी सतर्कता वी विनय कुमार, आईजी अमित सिन्हा उपस्थित थे।

अलर्ट रहें:आज रात से 5 जुलाई तक भारी बारिश

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मौसम विभाग ने 3 जुलाई की रात से ले के 5 जुलाई तक देहरादून में भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। ये अनुमान सही साबित हुआ तो अगले 36 घटने तक राजधानी में जन-जीवन ठप होने के आसार हैं। भारतीय मौसम विभाग के निदेशक बिक्रम सिंह ने रिपोर्ट जारी की है।

वैसे 22 मई से 25 मई तक भारी बारिश का मौसम विभाग का पूर्वानुमान गलत साबित हुआ था। इस अवधि में सिर्फ मामूली बारिश ही हुई थी।

अच्छी बात:हरीश रावत ने त्रिवेन्द्र की सुनी और पाई तारीफ

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पूर्व CM ने किया CM की गुजारिश पर कार्यक्रम स्थगित

Chetan Gurung

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने आज पूर्व सीएम और काँग्रेस के आला नेताओं में शुमार हरीश रावत का आभार जताया कि उनकी गुजारिश पर उन्होंने अपने सियासी कार्यक्रम स्थगित कर दिए। सियासत में ऐसे पल विरले ही आते हैं जब सरकार के मुखिया और विपक्ष के सबसे बड़े नेता एक-दूसरे की बातों को सम्मान दें।

हरीश विधानसभा चुनाव में दो सीटों पर लड़ने के बावजूद विधायक नहीं बन सके। फिर भी इसमें कोई शक नहीं है कि उनका कद आज भी कहीं से कम नहीं हुआ है। उनको आज भी काँग्रेस के सबसे लोकप्रिय और बड़े नेता जैसी तवज्जो और वजन मिलता है। सरकार के खिलाफ काँग्रेस के राज्य के शीर्ष नेता जहां खामोश से दिखते हैं, हरीश कहीं अधिक सक्रिय और आक्रामकता प्रदर्शित कर रहे हैं।

सरकार को काँग्रेस से नहीं बल्कि सिर्फ हरीश के हमलों से झटके लगते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री न सिर्फ आम लोगों और अवाम की नब्ज जानते हैं बल्कि अपने तड़ातड़ कार्यक्रमों से इन दिनों ऑनलाइन और ऑफलाइन छाए हुए हैं। अखबारों-चैनलों और सोशल मीडिया की सुर्खियां लूट रहे हैं। मुख्यमंत्री ने उनसे गुजारिश की थी कि कोरोना सरीखे संकट को देखते हुए उनके सरीखे आला काँग्रेस नेता को फिलहाल सियासी कार्यक्रमों से दूरी बनानी चाहिए। इससे प्रदेश का भला होगा। सरकार को कोरोना से लड़ने में अपना ध्यान केन्द्रित करने का अवसर मिलेगा।

हरीश ने त्रिवेन्द्र की बातों का सम्मान करते हुए सारे कार्यक्रम स्थगित कर सभी को चौंका दिया। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने आज इस पर पूर्व मुख्यमंट्री का आभार जताया तथा धन्यवाद किया कि आखिर सभी का मकसद फिलहाल कोरोना से लड़ना है। उन्होंने हरीश को सुलझा हुआ नेता करार भी दिया। दो घनी दुश्मन पार्टी के दिग्गजों के इस रवैये को हैरानी से देखा जा रहा है। साथ ही इसको साफ-सुथरी-वैमनस्यता विहीन सियासत भी करार दिया जा रहा है।

दोनों के मध्य वैसे आपसी रिश्ते निजी तौर पर अच्छे समझे जाते हैं। दोनों एक-दूसरे पर कभी भी निजी स्तर पर जा के आरोप लगाने से बचे हैं। हरीश रावत को आम की दावतें देने का शौक है। त्रिवेन्द्र को जब भी बुलाया गया वह उनकी आम पार्टी में जरूर गए। भले इसके लिए उनको पार्टी के अंदर से भी विरोध का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद वह किसी की परवाह न कर हरीश के बुलावे को सदा सम्मान देते रहे हैं।

Big Story:हेली कंपनियों से आसमान के भी पैसे वसूल रहा `UCADA’:HC पहुंचा मामला

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हर सेक्टर से 25 हजार की रॉयल्टी पर बिफरे बिजनेस एयरक्राफ्ट ऑपरेटर्स

लॉक डाउन से आई मंदी को देख सरकार से पॉज़िटिव रुख की थी उम्मीद

UCADA को अपने खर्च निकालने हैं, रॉयल्टी जरूरी:CA सचिव जावलकर

टेलरमेड़ टेंडर को ले के भी विवादों में है प्राधिकरण

Chetan Gurung

उत्तराखंड में हेली सेवा देने वाली कंपनियों की ताबूत में सरकार ने एक किस्म से कील ठोंक दी है। रॉयल्टी के नाम पर हर सेक्टर के 25 हजार रुपए की वसूली कर रही। वायुमंडल को अपना बता के भी वह शुल्क ले रही। मामला अब हाई कोर्ट में पहुँच गया है। सरकार बहरहाल अपने फैसले को सही ठहरा रही। नागरिक उड्डयन सचिव दिलीप जावलकर ने `Newsspace’ से कहा, `UCADA’ ही इन सब मामलों को देख और संभाल रहा है। रॉयल्टी नहीं लेंगे तो उसके अपने खर्च कैसे निकलेंगे।

नैनीताल हाईकोर्ट में बिजनेस एयरक्राफ्ट ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने रॉयल्टी के खिलाफ याचिका दायर कर दी है

बिजनेस हेली ऑपरेटर्स एसोसिएशन को उम्मीद थी कि लॉक डाउन और कोरोना के कारण बैठे बाजार को उठाने के लिए उत्तराखंड सरकार उसको राहत जरूर देगी। उसको सबसे ज्यादा एतराज रॉयल्टी की दर को ले कर है। इसमें उसको कोई राहत नहीं मिली। एसोसिएशन ने आखिर अदालत की शरण ले ली है। एसोसिएशन के अध्यक्ष ग्रुप कैप्टन (वे) राजेश कुमार बाली ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सरकार के कदमों को गलत करार देते हुए राहत की गुहार की है।

नागरिक उड्डयन सचिव दिलीप जावलकर:रॉयल्टी लेना गलत नहीं

ऑपरेटर्स के मुताबिक उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण न सिर्फ उत्तराखंड भू-भाग के वायुमंडल पर अपना दावा कर रही है बल्कि रॉयल्टी की दर भी बहुत अधिक रखी है। इससे उनके कारोबार पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। आगे लॉक डाउन-कोरोना के चलते ये और भी बदहाल रहने की आशंका है। उनका तर्क है कि प्रदेश में पर्यटन और अन्य कारोबार को बढ़ावा देने के लिए हेली सेवाएँ अहम भूमिका निभा सकती हैं।

इस सेक्टर के साथ सौतेला बर्ताव सरकार और उसकी योजनाओं को भी झटका देगा। अधिक रॉयल्टी पर उनका कहना है कि इससे प्रदेश को भी नुकसान ही होगा। उनके मुताबिक चार धाम के लिए हेलीकॉप्टर चार्टर्ड करने की सूरत में पर्यटक और श्रद्धालु की जेब में तो असर पड़ता ही है। ऑपरेटर्स को भी कारोबारी झटका झेलना पड़ता है। किराया अधिक होने पर पर्यटकों की तादाद में गिरावट आती है। उनका तर्क है कि पहाड़ों में 6 सीटर हेलिकॉप्टर को भी 5 पर्यटकों से अधिक ले जाने की इजाजत नहीं होती है।  

सरकार ने एक सेक्टर के लिए बतौर रॉयल्टी 25 हजार रुपए तय की है। इसको ऐसे समझा जा सकता है। किसी ने चारों धामों (बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री,यमुनोत्री) के लिए हेलिकॉप्टर बुक किया है तो 1 लाख रुपए सिर्फ रॉयल्टी लगेगी। इसमें भी विसंगति है। हेलिकॉप्टर देहरादून से हरिद्वार जाएगा तब भी यही शुल्क लिया जाएगा और किसी धाम जाएगा तब भी शुल्क यही रहेगा। ऑपरेटर्स का कहना है कि रॉयल्टी कम हो तो पर्यटकों को राहत मिलेगी। हेली सेवा कारोबार भी उठेगा।

UCADA के इस फैसले पर इसलिए भी आपत्ति जताई जा रही है कि वह लैंडिंग और पार्किंग शुल्क ले ही रहा है। लैंडिंग शुल्क 5 से 10 हजार रुपए तक है। ऑपरेटर्स का कहना है कि वायुमंडल इस्तेमाल पर पूरे देश में कहीं भी राज्य सरकार शुल्क नहीं लेती है। सिर्फ उत्तराखंड में ये शुल्क लिया जा रहा है। राज्य में काम कर रहे ऑपरेटर्स की तादाद 15-16 के करीब हैं। इनमें 9 तो केदारनाथ धाम में ही सेवा देती हैं। 7-8 कंपनियाँ चार्टर्ड सेवाएँ देती हैं।

एसोसिएशन का कहना है कि उत्तराखंड सरकार को वाकई पर्यटन और विकास की फिक्र है तो उसको रॉयल्टी पर व्यावहारिक फैसला लेना होगा। सरकार हालांकि हेली सेवा प्रदाताओं की तर्कों से सहमत या संतुष्ट नहीं दिखाई देती है। नागरिक उड्डयन सचिव दिलीप जावलकर का कहना है, `अगर रॉयल्टी नहीं लेंगे तो UCADA के संचालन से जुड़े खर्च कैसे निकलेंगे। फिर चार्टर्ड हेली सेवा लेने वाले बेहद सम्पन्न लोग हैं। वे इस खर्च को उठा सकते हैं। एसोसिएशन की रॉयल्टी वाली मांग जायज-वाजिब नहीं है’।

UCADA इस साल टेंडर को ले कर भी विवादों में है। आरोप है कि खास कंपनियों को टेंडर दिलाने और कुछ कंपनियों को बाहर करने के लिए उसने टेलरमेड टेंडर निकाले। इस शिकायत पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह से रिपोर्ट तलब की है। जिन कंपनियों को टेंडर से बाहर किया गया, उन पर कोई गंभीर आरोप भी नहीं थे।

BIG मुद्दा:तो क्या RTO की कुर्सी बिकती है? फर्जी ट्रांसफर ऑर्डर का मास्टर माइंड अरेस्ट

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परिवहन उपायुक्त और पूर्व RTO सुधांशु गर्ग पर कस सकता है सरकार का फंदा

रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करेगी सरकार:परिवहन सचिव शैलेश बगौली

`Newsspace’ ने ब्रेक की थी स्टोरी

Chetan Gurung

देहरादून के RTO दिनेश पठोई की जगह परिवहन उपायुक्त सुधांशु गर्ग की पोस्टिंग के फर्जी ऑर्डर जारी होने के मामले में मास्टर माइंड युवक की गिरफ्तारी और तबादले के लिए मोटी रकम के लेन-देन का खुलासा होने से शासन में हड़कंप है। पुलिस पूछताछ में जो कुछ खुलासा हुआ है, उसके मुताबिक RTO की कुर्सी में इतनी मलाई है कि इसको खाने के लिए कोई भी कीमत लगाई जा सकती है। गिरफ्तार मुल्जिम ने फर्जी ऑर्डर सुधांशु से तबादले की एवज में मोटा नगद माल एंठने के मकसद से तैयार किया था। उसकी बदकिस्मती थी कि साजिश का खुलासा जल्दी हो गया। परिवहन सचिव शैलेश बगौली ने `Newsspace’ से कहा, `इस बारे में उपायुक्त सुधांशु पर कोई भी कार्रवाई का फैसला पुलिस रिपोर्ट को देखने के बाद ही किया जा सकता है’।

कुलदीप ने जो बताया उसके मुताबिक सुधांशु से उसकी पुरानी वाकफियत थी। जब सुधांशु देहरादून में RTO थे तो उसकी मुलाक़ात उनसे हुई थी। फिर उसने गर्ग पर ये असर पैदा कर दिया कि उसकी सियासी और शासन स्तर पर प्रभावी पकड़ है। उसने गर्ग को झांसे में लिया कि वह उसका तबादला देहरादून RTO की कुर्सी पर फिर करा देगा। इसके लिए ही उसने कंप्यूटर के जरिये फर्जी तबादला आदेश बना के उसको थमा दिया।

ये था वह फर्जी तबादला आदेश

आरोपी चकराता रोड में कैपरी ट्रेड सेंटर में मोबाइल की दुकान में काम करता था। टिहरी के चंबा से उसने स्नातक की पढ़ाई की है। DIG (कप्तान) अरुण मोहन जोशी ने कहा कि इस बारे में अब परिवहन उपायुक्त गर्ग से भी पूछताछ की जाएगी। परिवहन सचिव शैलेश ने पूछे जाने पर कहा कि उनके पास पुलिस कार्रवाई की रिपोर्ट नहीं आई है। वह इस बारे में पूरी जानकारी लेने के बाद ही बता सकेंगे कि गर्ग के खिलाफ क्या और किस तरह की विभागीय कार्रवाई बनती है। या फिर किस तरह की जांच बिठाई जा सकती है।

फर्जी तबादला आदेश प्रकरण से साफ हो गया कि RTO की कुर्सी के लिए परिवहन महकमे के अफसर आखिर किस स्तर तक दांव खेलने को राजी हैं। पुलिस के दावे के अनुसार मुल्जिम को गर्ग से इस फर्जी तबादला आदेश के बदले में मोटी रकम मिलने की उम्मीद थी। साथ ही ये भी तय हुआ था कि RTO बनने पर गर्ग उसके कहने पर बसों के परमिट जारी करेंगे। ये समझने वाली बात है कि कोई अफसर आखिर RTO की कुर्सी के लिए कुछ भी दांव पर लगा रहा है तो उसके पीछे आखिर क्या माजरा छिपा होगा।

ये सवाल तो उठता ही है कि RTO की कुर्सी क्या बिकती है? ऐसा है तो फिर ये खेल किस स्तर पर होता है? हालांकि आरोपी ने ये कहा कि उसने सिर्फ गर्ग को RTO बनाने और परमिट के लालच में इस साजिश को अंजाम दिया। इस फर्जी तबादला आदेश की खबर `Newsspace’ ने ब्रेक कर के खलबली मचाई थी। परिवहन सचिव के आदेश पर ही पुलिस मुकदमा दर्ज हुआ था। अभी ये कहना मुश्किल है कि फर्जी आदेश तैयार किए जाने में क्या सुधांशु का भी हाथ था? ये जांच से ही साफ हो पाएगा।

कोविड-19 टेस्ट में 8 फौजी समेत 66 कोरोना पॉज़िटिव

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ज़्यादातर की ट्रेवल हिस्ट्री, डबलिंग रेट में सुधार

Chetan Gurung

8 फ़ौजियों समेत आज 66 लोग कोरोना पॉज़िटिव पाए गए। सबसे ज्यादा 22 नैनीताल और 20 केस देहरादून में सामने आए। पॉज़िटिव लोगों में अधिकांश की ट्रेवल हिस्ट्री है। अच्छी बात ये है कि डबलिंग रेट में सुधार नजर आ रहा है।

देहरादून में जो फौजी पॉज़िटिव पाए गए वे चेन्नई, कर्नाटक, राजस्थान,जबलपुर, पश्चिम बंगाल और हरियाणा से आए हैं। एक एम्स की स्वास्थ्यकर्मी है। उत्तरकाशी से भी आज 9 लोग पॉज़िटिव निकले। नैनीताल में पॉज़िटिव पाए गए लोगों में 14 वे हैं, जो पूर्व में कोरोना पॉज़िटिव मरीजों के संपर्क में आए थे।

प्रदेश में अब तक 41 मौतें कोरोना के खाते में जा चुकी हैं। 562 लोग कुल ऐसे हैं, जो कोरोना मरीज हैं। बाकी सभी ठीक हो गए। अब तक राज्य में 2947 केस पॉज़िटिव पाए गए हैं। पौड़ी सैंपल टेस्टिंग में सबसे आगे आ चुका है। आज भी सबसे ज्यादा 720 सैंपल पौड़ी में लिए गए। सबसे ज्यादा पॉज़िटिव केस देहरादून में हैं। देहरादून में अब तक 712 पॉज़िटिव केस आए हैं, जबकि नैनीताल में 496 पॉज़िटिव केस निकले हैं।  

कमाल के बाबा:तथाकथित मिर्गी रोग वाला आरके गुप्ता जेल गया, रामदेव को सिर्फ नसीहत

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कोरोना दवा पर पतंजलि का दावा `ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज़ एक्ट-1954’ का उल्लंघन

न नरेंद्र न त्रिवेन्द्र सरकार कर पाई कार्रवाई का हौसला

Chetan Gurung

THE DRUGS AND MAGIC REMEDIES (OBJECTIONABLE ADVERTISEMENTS) ACT, 1954 ACT को शायद नरेंद्र या त्रिवेन्द्र सरकार ने गौर से नहीं पढ़ा या फिर पढ़ना नहीं चाहती हैं। इसमें साफ लिखा है। किसी भी दवा का प्रचार या इस्तेमाल गलत ढंग से और रोग का निदान करने के तौर पर नहीं किया जा सकता है। इसके बावजूद दिव्य योग फार्मेसी और इस पर पूर्ण नियंत्रण रखने वाले बाबा रामदेव और बालकृष्ण को केंद्र और राज्य सरकार ने सिर्फ नसीहत दे के छोड़ दिया। बाबा ने दावा किया था कि महामारी कोरोना को हफ्ते भर में पूरी तरह ठीक करने वाली दवा कोरोनिल पतंजलि ने बना ली है। इसका भरपूर प्रचार और विश्वव्यापी दावा किया गया। इसी कानून के उल्लंघन में ऋषिकेश वाले कथित मशहूर मिर्गी रोग विशेषज्ञ आरके गुप्ता ने सालों जेल में गुजारे थे।

इस कानून में उन रोगों के नाम भी हैं, जो इसके दायरे में आते हैं। उसमें कोरोना का नाम भले नहीं है लेकिन ये लिखा है कि ईलाज के लिए गलत ढंग से कोई भी प्रचार या दावा नहीं किया जा सकता है। रामदेव-बालकृष्ण के दावे को खुद केंद्र और राज्य सरकार ने खारिज कर दिया है। उत्तराखंड सरकार ने कहा कि पतंजलि ने उससे कोरोना बनाने की दवा के नाम से मंजूरी-लाइसेन्स लिया ही नहीं। उसको ये कहा गया था कि वह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवा बनाना चाहती है।

राज्य सरकार तब हैरत में पड़ गई जब अचानक बाबा-आचार्य-पतंजलि ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कोरोना की दवा बनाने का दावा कर दिया। दवा बनाने का लाइसेन्स देने का अधिकार संबन्धित राज्य सरकारों को है। ऐसे में त्रिवेन्द्र सरकार पर तत्काल अंगुली उठना स्वाभाविक था। उसने फटाफट बोल दिया कि उसको इस बारे में पतंजलि ने धोखे में रखा। केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने भी इसके प्रचार और बिक्री पर तत्काल ही रोक लगा दी।

इससे ये साफ हो गया कि पतंजलि-रामदेव और बालकृष्ण ने भ्रामक प्रचार किया और निर्माण का लाइसेन्स न ले के कानून का उल्लंघन भी किया। इसके बाद बाबा-पतंजलि बैकफुट पर आए। इस दवा को बनाने में जयपुर के NIMS ने भी सहयोगी की भूमिका निभाई। उसने भी ये कहते हुए इस मामले से हाथ खींच लिए कि क्लीनिकल ट्रायल उसके यहाँ सिर्फ उन 100 लोगों के हुए, जिनमें कोई लक्षण नहीं पाए गए थे।

कानून (द ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज़-1954) का उल्लंघन होने के बावजूद केंद्र और राज्य सरकार की हिम्मत नहीं हुई कि कोई वैधानिक कार्रवाई इस मामले में की जाए। इसी कानून का उल्लंघन करने के कारण ऋषिकेश में नीरज क्लीनिक चला कर मिर्गी का ईलाज करने का दावा करने वाले गुप्ता को 14 अगस्त 2004 को जेल भेज दिया गया था। उसको 5 साल की सजा हुई थी।

खास बात ये है कि पत्रकारों और न्यूज़ चैनलों के सामने बाबा ने साफ कहा कि उनकी दवा कोरोना को 3 दिनों में ही ठीक कर देती है। ज्यादा से ज्यादा 7 दिन लगते हैं। अब वह भले कुछ भी सफाई दे कि ठीक हुआ तो बोला। उनके दावे से दुनिया में हंगामे से ज्यादा भारत पर अधिक अंगुली उठी है। विडम्बना है कि इसके बावजूद न तो पतंजलि और न ही इसके कर्ता-धर्ताओं पर कोई कानूनी कार्रवाई करने का हौसला सरकार कर पाई।

इसके बजाए कोरोनिल की बिक्री को मंजूरी दे दी। ये शर्त लगा के कि वह इस दवा को कोरोना की दवा बोल के नहीं बेचेंगे न ही इस नाम का इस्तेमाल करेंगे। केंद्र-राज्य सरकारों ने सिर्फ खानापूर्ति की है। हकीकत ये है कि सिर्फ इस दुष्प्रचार भर से पतंजलि ने देश-दुनिया में अपना जबर्दस्त प्रचार मुफ्त में तो किया ही खुद के वजूद में भी इजाफा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कर लिया। कोरोनिल को लोग कोरोना की दवा के तौर पर ही लेंगे, भले नाम लिखा हो या न लिखा हो।

—नीचे एक्ट के बारे में पढ़ें।

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THE DRUGS AND MAGIC REMEDIES (OBJECTIONABLE ADVERTISEMENTS) ACT, 1954 ACT NO. 21 OF 19541 An Act to control the advertisement of drugs in certain cases, to prohibit the advertisement for certain purposes of remedies alleged to possess magic qualities and to provide for matters connected therewith. BE it enacted by Parliament as follows:— 1. Short title, extent and commencement.—(1) This Act may be called the Drugs and Magic Remedies (Objectionable Advertisement) Act, 1954. (2) It extends to the whole of India except the State of Jammu and Kashmir, and applies also to persons domiciled in the territories to which this Act extends who are outside the said territories. (3) It shall come into force on such date2 as the Central Government may, by Notification in the Official Gazette, appoint. 2. Definitions.—In this Act, unless the context otherwise requires,— (a) „advertisement‟ includes any notice, circular, label, wrapper or other document, and any announcement made orally or by any means of producing or transmitting light, sound or smoke; (b) „drug‟ includes—

(i) a medicine for the internal or external use of human beings or animals; (ii) any substance intended to be used for or in the diagnosis, cure, mitigation, treatment or prevention of disease in human beings or animals; (iii) any article, other than food, intended to affect or influence in any way the structure or any organic function of the body of human beings or animals; (iv) any article intended for use as a component of any medicine, substance or article, referred to in sub-clauses (i), (ii) and (iii); (c) „magic remedy‟ includes a talisman, mantra, kavacha, and any other charm of any kind which is alleged to possess miraculous powers for or in the diagnosis, cure, mitigation, treatment or prevention of any disease in human beings or animals or for affecting or influencing in any way the structure or any organic function of the body of human beings or animals; 3 [(cc) „registered medical practitioner‟ means any person,— (i) who holds a qualification granted by an authority specified in, or notified under section 3 of the Indian Medical Degrees Act, 1916 (7 of 1916) specified in the Schedules to the Indian Medical Council Act, 1956 (102 of 1956); or (ii) who is entitled to be registered as a medical practitioner under any law for the time being in force in any State to which this Act extends relating to the registration of medical practitioner;] (d) „taking any part in the publication of any advertisement‟ includes— (i) the printing of the advertisement

(ii) the publication of any advertisement outside the territories to which this Act extends by or at the instance of a person residing within the said territories; 1 * * * * * * 3. Prohibition of advertisement of certain drugs for treatment of certain diseases and disorders.—Subject to the provisions of this Act, no person shall take any part in the publication of any advertisement referring to any drug in terms which suggest or are calculated to lead to the use of that drug for— (a) the procurement of miscarriage in women or prevention of conception in women; or (b) the maintenance or improvement of the capacity of human beings for sexual pleasure; or (c) the correction of menstrual disorder in women; or 2 [(d) the diagnosis, cure, mitigation, treatment or prevention of any disease, disorder or condition specified in the Schedule, or any other disease, disorder or condition (by whatsoever name called) which may be specified in the rules made under this Act: Provided that no such rule shall be made except—

  • in respect of any disease, disorder or condition which requires timely treatment in consultation with a registered medical practitioner or for which there are normally no accepted remedies; and (ii) after consultation with the Drugs Technical Advisory Board constituted under the Drugs and Cosmetics Act, 1940 (23 of 1940), and if the Central Government considers necessary, with such other persons having special knowledge or practical experience in respect of Ayurvedic or Unani systems of medicines as that Government deems fit.] 4. Prohibition of misleading advertisements relating to drugs.—Subject to the provisions of this Act, no person shall take any part in the publication of any advertisement relating to a drug if the advertisement contains any matters which— (a) directly or indirectly gives a false impression regarding the true character of the drug; or (b) makes a false claim for the drug; or (c) is otherwise false or misleading in any material particular. 5. Prohibition of advertisement of magic remedies for treatment of certain diseases and disorders.—No person carrying on or purporting to carry on the profession of administering magic remedies shall take any part in the publication of any advertisement referring to any magic remedy which directly or indirectly claims to be efficacious for any of the purposes specified in section 3. 6. Prohibition of import into, and export from, India of certain advertisements.—
  • No person shall import into, or export from, the territories to which this Act extends any documents containing an advertisement of the nature referred to in section 3 or in section 4 or section 5, and any document containing any such advertisements shall be deemed to be goods of which the import or export has been prohibited under section 19 of the Sea Customs Act, 1878 (8 of 1878), and all the provisions of that Act shall have effect accordingly, except that section 183 thereof shall have effect as if for the word „shall‟ therein the word „may‟ were substituted. 7. Penalty.—Whoever contravenes any of the provisions of this Act 3 [or the rules made thereunder] shall, on conviction, be punishable— (a) in the case of the first conviction, with imprisonment which may extend to six months, or with fine, or with both;

Offences by companies.—(1) If the person contravening any of the provisions of this Act is a company, every person who, at the time the offence was committed, was in charge of, and was responsible to, the company for the conduct of the business of the company as well as the company shall be deemed to be guilty of the contravention and shall be liable to be proceeded against, and punished accordingly: Provided that nothing contained in this sub-section shall render any such person liable to any punishment provided in this act if he proves that the offence was committed without his knowledge or that he exercised all due diligence to prevent the commission of such offence.

(2) Notwithstanding anything contained in sub-section (1) where an offence under this Act has been committed by a company and it is proved that the offence was committed with the consent or connivance of, or is attributable to any neglect on the part of, any director or manager, secretary or other officer of the company, such director, manager, secretary or other officer of the company, shall also be deemed to be guilty of that offence and shall be liable to be proceeded against and punished accordingly. Explanation.—For the purposes of this section,— (a) „company‟ means any body corporate and includes a firm or other association of individuals; and (b) „director‟ in relation to a firm means a partner in the firm. 2 [9A. Offences to be cognizable.—Notwithstanding anything contained in the Code of Criminal Procedure, 1898 (5 of 1898), an offence punishable under this Act shall be cognizable.]

अवैध भू-कब्जे:रंग लाएगा नए IGP-DM का आक्रामक अंदाज!

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सख्ती के लिए मशहूर हैं गढ़वाल रेंज के नए पुलिस प्रमुख अभिनव

Chetan Gurung

राजधानी में भूमि और अन्य सम्पत्तियों पर अवैध कब्जों के खिलाफ गढ़वाल रेंज के नए IGP अभिनव कुमार और DM डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने आज एक साथ कमर कसते हुए इसके दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का संकल्प जताया।

DM डॉ. आशीष श्रीवास्तव

ये संयोग है कि एक ही दिन में अहम कुर्सियों पर बैठे दो अफसरों ने एक साथ अवैध कब्जों के खिलाफ एक जैसी बोली का इस्तेमाल किया। आक्रामकता और सख्ती के लिए मशहूर रहे अभिनव ने शाम को नई ज़िम्मेदारी संभालने के बाद कहा, `अवैध कब्जों के खिलाफ पुलिस सख्त रुख अपनाएगी। जो भी इसके लिए जिम्मेदार होंगे, उनको बख्शा नहीं जाएगा’। अभिनव ने अजय रौतेला की जगह ली, जिनको कुमायूं का IGP बना दिया गया है। CBI से प्रतिनियुक्ति पर लौटे वी मुरुगेशन को IG (पुलिस मोडर्नाइजेशन) बनाया गया है।

अभिनव देहरादून, हरिद्वार, उधम सिंह नगर और पौड़ी के SSP रह चुके हैं। उस दौरान उनको जुर्म के उस्तादों के खिलाफ गज़ब की सख्ती के लिए जाना जाता था। उन्होंने कहा कि जहां उनकी जरूरत होगी वह मौजूद रहेंगे। ऐसा नहीं कि फोटो खिंचवाने के लिए पहुँच जाए। भ्रष्टाचार और गरीब-कमजोरों का शोषण भी वह नहीं होने देंगे। अभिनव ने कहा कि उनके पास अच्छे और अनुभवी लोगों की फोर्स है। इसलिए दिक्कत नहीं आएगी।  

नए IGP का ये अंदाज इसलिए भी अहम है कि मंगलवार को ही DM डॉ. आशीष ने भी सार्वजनिक और निजी भूमि पर अवैध कब्जों को रोकने के आदेश उप जिलाधिकारियों तथा सम्बन्धित विभागीय अधिकारियों को दिए। बंजारावाला कारगी रोड पर स्थित जमीन अनाधिकृत तौर पर कब्जाने, हरिद्वार बाईपास रोड ब्राह्मणवाला में राष्ट्रीय राजमार्ग की भूमि पर अतिक्रमण, दून विहार जाखन में सरकारी पार्क पर अवैध निर्माण, माण्डूवाला,पछवादून में ग्राम समाज व रिजर्व फारेस्ट भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत DM को मिली। वह जनसुनवाई कर रहे थे तो ये मामले सामने आए।

जिलाधिकारी ने सम्बन्धित अधिकारियों को दूरभाष पर समयसीमा के भीतर अवैध कब्जे हटवाने तथा सम्बन्धित प्रकरणों पर उचित कार्यवाही करने के निर्देश दिए। आईजीपी और डीएम के अवैध कब्जों पर कड़क रुख की अहमियत इसलिए अधिक है कि देहरादून में इस किस्म के अपराध बहुत तेजी से पनपे हैं। माफिया किस्म के लोग किसी की भी जमीन या फिर सरकारी जमीन पर बलपूर्वक या फिर शातिराना अंदाज में कब्जा कर ले रहे हैं।

इसके बाद उनको अदालतों के चक्कर कटवाते हैं। फिर सुलहनामे के नाम पर मोटी कमाई करने के आरोप हैं। सेना के नियंत्रण वाले डाकरा-गढ़ी कैंट तक में भी भूमि पर अवैध कब्जों के मामले बहुत अधिक हो चुके हैं। इन कब्जों को न कैंट बोर्ड, न MEO और न ही जिला प्रशासन रोक पाया है। नॉन जेड-ए की जमीन पर कब्जा स्थानीय माफिया तंत्र के लिए सबसे प्रिय शगल बन चुका है।

नाले-खालों पर माफिया तत्वों के खुले आम अवैध कब्जे हो चुके हैं। उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाया है। पुलिस-कैंट बोर्ड-तहसील की इसमें उनके साथ मिलीभगत साफ दिखाई देती है। IGP-DM की जुगलबंदी इस पर कितना रंग लाएगी, ये देखने वाली बात होगी।

Unlock-2 में सहूलियतें खूब पर कोरोना को ले के सतर्क रहे:CM

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48 घंटे पहले का कोरोना नेगेटिव टेस्ट पर होटल में ठहरने की सुविधा

Chetan Gurung

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने आज PM नरेंद्र मोदी के सम्बोधन के बाद कहा कि कोरोना काल के बावजूद अनलॉक-2 में राज्य सरकार ने काफी सहूलियतें दे दी हैं। प्रदेशवासियों के लिये चारधाम यात्रा खोल दी गई है। होटल व्यवसाय को गति देने के लिये पर्यटकों को होटल में ठहरने की सुविधा दे दी गई है। इसके लिये उनका 48 घंटे पूर्व का कोरोना टेस्ट नेगेटिव होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कोरोना संकट से प्रदेश में उत्पन्न हालात का आंकलन किया जा रहा है। इस महामारी के कारण सामाजिक आर्थिक एवं मानसिक दिक्कतें भी उत्पन्न हुई है। हम सबको इसका सतर्कता से सामना करना होगा। अच्छी बात ये है कि पिछले दो दिनों में प्रदेश में कोरोना के मामलों में ठहराव व गिरावट आई है। सरकार सचेत है। राज्य में आने वालों की सघन चेकिंग की जा रही है। उनकी ट्रेवल हिस्ट्री देखी जा रही है। हमारे डाक्टर तथा फ्रंट लाइन वर्कर सजगता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।

त्रिवेन्द्र ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को नवम्बर माह तक बढ़ाए जाने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि आने वाला समय त्यौहारों का है। इस घोषणा से गरीब भाई-बहन, खुशी के साथ त्यौहार मना सकेंगे। योजना में अप्रैल-मई और जून माह में हर महीने 80 करोड़ गरीबों को प्रति व्यक्ति 5 किलो गेहूं या 5 किलो चावल जबकि प्रति परिवार 1 किलो दाल प्रति माह निशुल्क उपलब्ध कराई गई। अब इस योजना को जुलाई से नवम्बर तक बढ़ा दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कोरोना को लेकर तमाम सावधानियां बरतने की जरूरत भी जताई। मास्क का अनिवार्य प्रयोग और दो गज की दूरी के साथ ही हाथों को नियमित रूप से धोने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि जब तक कोरोना की वेक्सीन तैयार नहीं होती तब तक यही इसका ईलाज है।

Top Story:उत्तराखंड क्रिकेट में भूचाल:अध्यक्ष गुनसोला के खिलाफ बगावत

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BCCI से शिकायत करेंगे CaU-Apex सदस्य-ओहदेदार,रिसीवर बिठाने की सरकार से मांग

एसोसिएशन में मनमानी-असंवैधानिक आदेश-सचिव संग मिलीभगत के आरोप

फौरन जनरल मीटिंग-एपेक्स काउंसिल बैठक बुलाने की मांग

घोटालों-विवादों-खराब प्रदर्शन पर सरकार से रिसीवर बिठाने की मांग

SBI-Deputy AG पर भी भुगतानों को ले के लापरवाही के आरोप

Chetan Gurung

क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड में अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला के खिलाफ भी बगावत हो गई है। उन पर मनमानी करने, सचिव माहिम वर्मा के प्रभाव में असंवैधानिक कृत्य करने का आरोप लगाते हुए कई ओहदेदारों-सदस्यों ने फौरन एपेक्स काउंसिल की बैठक और जनरल मीटिंग बुलाने की जरूरत जताई है। उन्होंने सारे मामलों की शिकायत BCCI से भी करने की जरूरत जताई है। अध्यक्ष को लिखे गए खत में साफ कहा गया है कि वह CaU में व्याप्त वित्तीय अनियमितताओं को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए वह अपने अधिकार क्षेत्र का भी उल्लंघन कर रहे हैं।

बगावत के केंद्र में अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला:काँग्रेस सियासत में जो कमाया, क्रिकेट में गंवा रहे

गुनसोला पर खास लॉबी के असर में काम करने के आरोप शुरू से लगते रहे हैं। ताजा बवंडर उनके 22 मई को एपेक्स काउंसिल सदस्यों को जारी निर्देश से उठा। इसमें उन्होंने कोरोना को आधार बना के CEO अमृत माथुर और स्टाफ का कांट्रैक्ट खुद ही बढ़ा दिया। साथ ही पेशेवर खिलाड़ियों-स्टाफ और अन्य किस्म के सभी भुगतान करने के निर्देश दिए थे।

सचिव माहिम वर्मा को ले के लगातार विवाद CaU में उठ रहे। अध्यक्ष गुनसोला पर सचिव के ही असर में काम करने के आरोप हैं।

काउंसिल और CaU के कई सदस्यों को इसी पर तगड़ा एतराज है। उन्होंने संयुक्त पत्र अध्यक्ष को लिख के कई आरोप साफ-साफ लगाए हैं। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष का आदेश मनमाना, असंवैधानिक और अधिकार क्षेत्र से बाहर जा के दिया गया है। पत्र में कहा गया है कि नियम 7 (1) में साफ कहा गया है कि अध्यक्ष सिर्फ आम सभा या फिर एपेक्स काउंसिल से मिले अधिकारों का ही इस्तेमाल कर सकता है। उसके पास इसके इतर कोई अधिकार नहीं है। इसके बावजूद अध्यक्ष भुगतानों के बारे में निर्देश जारी कर रहे और अहम फैसले कर रहे हैं।

कोषाध्यक्ष पृथ्वी सिंह नेगी:जो भी बोलूँगा एपेक्स काउंसिल में बोलूँगा

पत्र में गुनसोला पर निहित स्वार्थों के आधीन और CaU में अनियमितता को छुपाने के लिए काम करने के आरोप लगे हैं। ये भी कहा गया है कि कोषाध्यक्ष की तरफ से गड़बड़ियों के बारे में बताए जाने के बावजूद अध्यक्ष ने कोई जरूरी कदम इस बाबत नहीं उठाए। इसके बजाए वह इस तरह के स्वेच्छाकारी आदेश जारी कर रहे हैं, जो बर्दाश्त नहीं होगा। इससे एसोसिएशन की कामकाज पर शक पैदा हो रहा है।

अध्यक्ष गुनसोला ने ये पत्र जारी किया था, जिस पर बवाल उठा हुआ है।

पत्र में कहा गया है कि उनको पेशेवरों-स्टाफ और अन्य के भुगतानों पर कोई एतराज नहीं है, अगर सब कुछ सही है। अगर स्थापित सिद्धांतों और नियमों के खिलाफ कुछ हो रहा है तो फिर उनको हक है कि गलत कार्यों को सामने लाया जाए। CaU के पास जो भी फंड हैं, वह BCCI ने क्रिकेट के विकास और प्रोत्साहन के लिए दिया है। इसमें पारदर्शिता होनी चाहिए। वे इस बारे में BCCI का ध्यान खींचेंगे।

अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला को भेजा गया CaU-एपेक्स काउंसिल सदस्यों का संयुक्त पत्र

पत्र लिखने वालों ने कहा है कि CaU अभी शिशु है। उन सभी का फर्ज है कि इसको बेहतर ढंग से संचालित कर आदर्श कायम किया जाए। खुद भी एसोसिएशन में अच्छा माहौल बनाएँ। CaU में भुगतानों को ले के बहुत अंगुलियाँ उठ रही हैं। SBI में उसका खाता है। डिप्टी AG को खातों के सही संचालन के बारे में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर देखने की ज़िम्मेदारी दी गई है। इसके बावजूद जिस तरह CaU में वित्तीय घोटालों के आरोप लगातार भीतर से ही उठ रहे हैं, उससे बैंक और AG ऑफिस दोनों ही शक के दायरे में हैं।

भुगतानों को ले के विवादों में:SBI main branch देहरादून

सूत्रों के मुताबिक SBI की देहरादून स्थित मुख्य शाखा ने फिलहाल कुछ भुगतानों को तकनीकी कारणों से रोक दिया है। अध्यक्ष गुनसोला ने इस पर भी बैंक को चिट्ठी लिख के भुगतान करने को कहा है। कोषाध्यक्ष पृथ्वी सिंह नेगी से इस बारे में `Newsspace’ ने जानना चाहा कि बैंक से भुगतान क्या उनकी आपत्तियों के बावजूद भी हो रहे या हो रहे, तो उन्होंने कहा कि इस बारे में सिर्फ अध्यक्ष या सचिव माहिम से ही बात करना उचित होगा। उनको जो कहना है वह एपेक्स काउंसिल में कहेंगे।

नेगी CaU में हर विधि या नियम विरुद्ध प्रक्रियाओं के खिलाफ मुखर ओहदेदारों में शुमार होते हैं। कुछ भुगतान उनकी इच्छा के बगैर भी हुए हैं। एसोसिएशन के बाइलॉज में कोषाध्यक्ष के दस्तखत किसी भी भुगतान के लिए जरूरी हैं। अध्यक्ष और सचिव में से एक के दस्तखत हो सकते हैं। CaU में घोटालों-गड़बड़ियों पर सरकार की भी नजर है। BCCI ने सिर्फ सरकार की सिफ़ारिश पर UCA (उत्तरांचल और उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन) की मजबूत दावेदारी को नजर अंदाज कर CaU को मान्यता दी है।

इसके बावजूद कि एसोसिएशन के सदस्यों और असत्य सूचनाओं की शिकायत BCCI के साथ ही कई अन्य जगहों पर पहले से जा चुकी हैं। हैरानी की बात ये भी है कि दो सीजन पहले जब सिर्फ कोनसेनसेस समिति थी तो उत्तराखंड रणजी टीम ने नॉक आउट दौर में जगह बनाई। जब एसोसिएशन का गठन हुआ तो बदतरीन प्रदर्शन कर टीम प्लेट ग्रुप में लौट आई। चयन और चयनकर्ताओं के साथ ही प्रशिक्षकों-CEO की नियुक्तियों को ले के उठा बवाल आज तक कायम ही नहीं है, रोज आग तेजी पकड़ रही।

खुद मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अपनी एसोसिएशन भंग कर CaU की मदद की थी। एसोसिएशन के भीतर और बाहर अब फिर से ये मांग उठ रही है कि विवादों और घोटालों की आरोपों को देख सरकार CaU में रिसीवर बिठाने का रास्ता देखे। राज्य के युवा और प्रतिभावान क्रिकेटरों को मौका और इंसाफ दिलाने तथा देश भर में उत्तराखंड की बदनामी को रोकने के लिए सरकार को सामने आना होगा।  

Unlock-2: देहरादून में मॉल-धार्मिक स्थल खुले,बुजुर्ग-बच्चों-मानसिक रूप से परेशानों को संस्थागत क्वेरेंटिन की छूट:त्रिवेन्द्र सरकार का फैसला

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केंद्र का फैसला:चीन के App बैन लेकिन आयात पर कोई बंदिश नहीं!

स्कूल्स-कॉलेज-कोचिंग-विवि 31 जुलाई तक तो बंद

सलून-शराब की दुकान-बाजार खोल दिए पर जिम से फिर परहेज

राज्य के भीतर और अन्य राज्यों में आने-जाने की खुली छूट

Chetan Gurung

त्रिवेन्द्र सरकार ने Unlock-2 में देहरादून नगर निगम के सभी रेस्तरां और शॉपिंग मॉल को खोलने को आखिर मंजूरी दे दी। बाजार और धार्मिक स्थल सुबह 7 से रात 8 बजे तक खोले जा सकेंगे। संस्थागत क्वेरेंटिन में भी बुजुर्गों-बच्चों और अवसाद के शिकार लोगों को छूट दी है। दूसरी तरफ मोदी सरकार ने Unlock-2 में चीन के आयात पर कोई बंदिश नहीं लगाई है। कल ही भारत सरकार ने चीन के टिक-टॉक समेत 58 एप पर रोक लगाई है। उन पड़ोसी देशों से कारोबार करने की छूट भी दी गई है, जिनके साथ करार हैं। स्कूल्स 31 जुलाई तक बंद करने का फैसला अच्छा है लेकिन जिम को खोलने से फिर परहेज किया है। लोगों को राज्य के भीतर-बाहर आने-जाने की छूट बगैर E-Pass के दे दी गई है।

लोगों और सामान ढोने वाले वाहनों के आने-जाने की छूट देने के साथ ही ये भी सुविधा दे दी गई है कि इसके लिए न तो परमिट और मंजूरी न ही E-Pass जरूरी होगा। इसी पैरा में ये भी लिखा है कि जिन पड़ोसी देशों के साथ करार हैं ये सुविधा वहाँ भी लागू है। ये कहीं नहीं लिखा है कि चीन से आयात पर रोक लगाई जाती है। सड़क मार्ग से नेपाल और बांग्लादेश से सामान आता और जाता है। नेपाल के साथ रिश्तों में बढ़ी तल्खी के मद्देनजर केंद्र सरकार का ये फैसला अहम है।

स्कूल ही नहीं, कोचिंग इंस्टीट्यूट, कॉलेज,विवि भी 31 जुलाई तक बंद ही रखे गए हैं। हैरानी की बात ये है कि शरीर को स्वस्थ बनाने के लिए जरूरी जिम खोलने का फैसला फिर नहीं लिया गया है। थियेटर और बार-मनोरंजन पार्क पर रोक समझ में आता है लेकिन जिम को सोशल डिस्टेन्सिंग के साथ खोला जा सकता है। कुछ एक्सररसाइज़ पर रोक लगाई जा सकती है, जो सीधे सोशल डिस्टेन्सिंग के फार्मूले के खिलाफ हों। नाई और शराब की दुकान-स्पा खोले जा चुके हैं।

देहरादून में ही पल्टन बाजार खुले हैं। वहाँ भीड़ देख लें तो कमजोर कलेजे वालों के होश उड़ जाए। स्विमिंग पूल, असेंबली हाल, ऑडिटोरियम खोलने पर भी रोक है। केंद्र और राज्य सरकार के ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट खोल दिए गए हैं। अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों और मेट्रो रेल पर प्रतिबंध जारी हैं। घरेलू उड़ानों और रेलों को सीमित तादाद में मंजूरी दी गई है। कुछ छूट के साथ रात का कर्फ़्यू (रात 10 से सुबह 5 बजे तक) लगाया गया है।

कंटेनमेंट जोन को इनमें से कोई सुविधा हासिल नहीं हैं। राज्य सरकारों को छूट दी गई है कि वे अपने स्तर पर भी वे सख्त कदम उठा सकते हैं, जो कोरोना को रोकने में सफल हो सकते हों। खेलों के आयोजन पर रोक लगाई गई है। बिना दर्शकों के आयोजन को पूर्व में केंद्र सरकार मंजूरी दे चुकी है। 65 साल से अधिक और 10 साल से कम उम्र वालों को घर में ही रहने की ताकीद केन्द्रीय गृह मंत्रालय की इस एड्वाइजरी में दी गई है।

राज्य सरकार ने शॉपिंग मॉल और रेस्तरां खोलने की मंजूरी दी है। बुजुर्ग, बच्चों और मानसिक तौर पर परेशान लोगों को भी संस्थागत क्वेरेंटिन से छूट दी गई है। कोई भी छूट कंटेनमेंट जोन में लागू नहीं होगी।

कोरोना सुकून:सिर्फ 8 पॉज़िटिव पाए, एक्टिव केस (659) भी लुढ़के

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डबलिंग रेट हुआ बेहतर, रिकवरी में भी सुधार

Chetan Gurung

कोरोना (Covid-19) के मोर्चे पर आज लंबे समय बाद थोड़ी राहत शाम तक मिली। ताजी रिपोर्ट में पॉज़िटिव की तादाद सिर्फ 8 थी तो एक्टिव केस भी गिर के 659 पर आ गए। सुकून की बात ये है कि डबलिंग रेट बेहतर हो गया है और रिकवरी में भी सुधार आया है।

देर रात तक आने वाली अगली रिपोर्ट तय करेगी कि आज का दिन आखिर में कैसा गया। देर शाम तक की रिपोर्ट के मुताबिक 2111 पॉज़िटिव केस वाले ठीक हो चुके हैं। डबलिंग रेट 44 दिनों के करीब पहुँच गया है। जो काफी संतोषजनक है। सैंपल लेने और भेजने की गति भी बढ़ी है। आज 1400 के करीब सैंपल लैब में भेजे गए।

देहरादून (4), नैनीताल और उधम सिंह नगर (2-2) में ही आज शाम तक की रिपोर्ट में कोरोना पॉज़िटिव पाए गए। देहरादून में अब तक सबसे अधिक पॉज़िटिव केस (681) सामने आए हैं। नैनीताल में 470, टिहरी में 416 और हरिद्वार में 313 पॉज़िटिव केस मिले हैं।

फैसलों पर समय से हो कार्रवाई,पत्राचार में ही न लटकाए योजनाएँ:CM

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वन्य जीव सलाहकार बोर्ड की बैठक में सख्त अंदाज में दिखे त्रिवेन्द्र

Chetan Gurung

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अल्टिमेटम वाले लहजे में सोमवार को अफसरों को चेताया कि बैठकों में जो फैसले किए जाते हैं, उन पर तय समयसीमा में अनुपालन भी हो जाना चाहिए। सिर्फ पत्राचार तक ही कार्यवाही सीमित न रख के नतीजे भी दें।

मुख्यमंत्री ने सचिवालय में उत्तराखण्ड राज्य वन्य जीव सलाहकार बोर्ड की अध्यक्षता के दौरान कठोर भाव से ये भी कहा कि किसी भी बैठक का कार्यवृत्त उसी दिन बन जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एनएच 72-ए उत्तराखण्ड के लिए बहुत अधिक महत्व का है। इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दें। स्वीकृतियों के लिए आवश्यक औपचारिकताओं में किसी प्रकार की देरी न हो। कार्बेट रिजर्व व राजाजी टाईगर रिजर्व में गैण्डे के रिइन्ट्रोडक्शन का काम समयबद्धता के साथ हो।

उन्होंने निर्देश दिए कि राजाजी टाईगर रिजर्व के अंतर्गत चैरासी कुटिया का विकास इंटीग्रेटेड एप्रोच के आधार पर किया जाए। इसकी कार्ययोजना में वन्यजीवन, आध्यात्मिकता, संस्कृति सहित सभी पहलुओं का समावेश किया जाए। गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान में स्थित गरतांग गली ट्रेल के मार्ग का पुनरूद्धार, इसकी मौलिकता को ध्यान में रखते हुए किया जाए। आरक्षित वन क्षेत्रों में टोंगिया ग्रामों को राजस्व ग्रामों का दर्जा देने और संरक्षित क्षेत्रों से ग्रामों के विस्थापन के बाद वन भूमि पर बसाये गए नए स्थलों के नवीनीकरण और डिनोटिफिकेशन का काम शीघ्र किया जाए।

बैठक में गंगोत्री राष्ट्रीय पार्क के अंतर्गत राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण विभिन्न मार्गों के निर्माण के लिए प्रस्तावों को अनुमति के लिए राष्ट्रीय वन्य जीव बोर्ड को भेजे जाने पर सहमति दी गई। सौंग बांध परियोजना के निर्माण और जौलीग्रान्ट हवाई अड्डे के विस्तारीकरण के लिए वन भूमि हस्तांतरण के लिए अनुमति का प्रस्ताव भी राष्ट्रीय वन्य जीव बोर्ड को भेजने पर निर्णय हुआ।

बैठक में बताया गया कि कार्बेट टाईगर रिजर्व व राजाजी टाईगर रिजर्व में बाघों और जंगली हाथियों की धारण क्षमता का अध्ययन भारतीय वन्यजीव संस्थान से कराने के लिए प्रस्ताव प्राप्त हो गया है। इसी प्रकार गैण्डे के रिइन्ट्रोडक्शन के लिए साईट सूटेबिलिटी रिपेार्ट मिल गई है। राजाजी राष्ट्रीय उद्यान की सीमा के रैशनलाईजेशन के लिए संबंधित जिलाधिकारियों, प्रभागीय वनाधिकारियों और भारतीय वन्यजीव संस्थान के प्रतिनिधि की एक समिति का गठन कर लिया गया है।

बैठक में जानकारी दी गई कि 6 जून से 8 जून की गणना के मुताबिक राज्य में 2026 हाथी हैं। वर्ष 2012 में 1559 जबकि 2017 में 1839 हाथी थे। वर्ष 2017 से हाथियों की संख्या में 10.17 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

22 से 24 फरवरी 2020 में जलीय जीवों की गणना की गई। इसमें पाया गया कि राज्य में 451 मगरमच्छ, 77 घड़ियाल और 194 ऊदबिलाव हैं। वर्ष 2020 से 2022 तक राज्य में स्नो-लैपर्ड की जनसंख्या का आंकलन भी किया जाएगा। राज्य के 23 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र में स्नो-लैपर्ड हैं।

बैठक में वन मंत्री डा. हरक सिंह रावत, विधायक धन सिंह नेगी, दीवान सिंह बिष्ट, सुरेश राठौर, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश, प्रमुख सचिव आनंदबर्द्धन, प्रमुख वन संरक्षक जयराज, सचिव दिलीप जावलकर, सौजन्या, डीजी एलओ अशोक कुमार भी उपस्थित थे।  

दिलचस्प:BJP विधायक कर्णवाल को अब चमार साहब भी कहना होगा

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भारत सरकार-विधानसभा गज़ट में नाम बदलवाया

Chetan Gurung

जाति सूचक शब्द का इस्तेमाल कानूनन जेल भेज देता है। झबरेड़ा के बीजेपी विधायक देशराज कर्णवाल ने अपना नाम ही अब बदल कर देशराज कर्णवाल चमार साहब कर दिया है।

भारतीय दंड संहिता के मुताबिक किसी भी शख्स को खास तौर पर दलित समुदाय वाले को उसकी जाति से संबोधित करना अपराध है। इसके बावजूद कर्णवाल ने खुद का नाम ही चमार रख के सभी को हैरत में डाल दिया। उनकी खास गुजारिश पर भारत सरकार के गज़ट में भी उनका नाम बदल दिया गया है।

विधानसभा सचिव जगदीश चन्द्र ने कहा कि भारत सरकार के साथ ही विधानसभा के प्रपत्रों में भी कर्णवाल का नाम बदल दिया गया है। कर्णवाल ने कहा कि उन्होंने सामाजिक और सियासी वजह से नाम को बदलने का फैसला किया। नामकरण के लिए वह संत रविदास मंदिर (नई दिल्ली) गए हैं। विधिवत अनुष्ठान के साथ नया नामकरण वहीं होगा।

कर्णवाल को बीजेपी से ही निलंबित विधायक प्रणव सिंह चैंपियन के साथ टकराव और विवादों के लिए भी प्रदेश के लोग जानते हैं। उनके नामकरण की वजह के पीछे दलित वोटों की सियासत को और मजबूती से लड़ना माना जा रहा है।

अच्छी खबर:चार धाम दर्शन कर सकेंगे उत्तराखंडी:E-Pass भरें

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देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड की 1 जुलाई से दर्शन को मिली मंजूरी

न मूर्ति छू सकेंगे न प्रसाद ले के जा सकेंगे

Chetan Gurung

चार धाम दर्शन की इच्छा उत्तराखंड निवासी अब श्रद्धालु पूरी कर सकेंगे। इसके लिए उनको सामान्य E-Pass को भरना होगा। उत्तराखंड चार धाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड ने 1 जुलाई से दर्शन की सुविधा दे दी। दर्शनार्थियों को कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करना होगा। पहले सिर्फ उन्हीं लोगों को दर्शन की सुविधा थी, जो धाम (बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री) वाले जिले में रहते हैं।

चार धाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के CEO और गढ़वाल के आयुक्त रमन रविनाथ

बोर्ड के सीईओ और गढ़वाल के आयुक्त रमन रविनाथ ने आदेश जारी कर ताकीद की कि कोरोना का एक भी लक्षण अगर किसी में दिखाई देता है तो उसको रोक लिया जाएगा। राज्य में बाहर से आए उत्तराखंडियों को दर्शन की सुविधा नहीं होगी। उनको पहले नियमानुसार क्वेरेंटिन के नियमों को पूरा करना होगा। तभी दर्शन के लिए पात्र हो सकेंगे। दर्शन के दौरान किसी को भी न तो मूर्ति छूने और न ही बाहर से प्रसाद अथवा चढ़ावा लाने की अनुमति होगी।

इसके साथ ही कोई भी व्यक्ति पुजारियों-रावलों या फिर गर्भ गृह के करीब नहीं जा सकेगा। धाम स्थल पर सिर्फ एक रात तक ही विश्राम किया जा सकेगा। विशेष परिस्थितियों में स्थानीय प्रशासन की मंजूरी से रुक सकेंगे। होटल, रेस्तरां, पेयजल, बिजली, धर्मशाला से संबन्धित कार्यों के मामले में स्थानीय प्रशासन की मंजूरी से एक दिन से अधिक समय तक धाम स्थल पर रुक सकेंगे।

इसके साथ ही 65 साल से आधिक और 10 साल से कम आयु के बालक भी धाम के दर्शन के लिए पात्र नहीं होंगे। भारत सरकार ने इस संबंध में सख्त रोक लगाई हुई है। बोर्ड के इस फैसले से स्थानीय कारोबारियों को थोड़ी बहुत राहत की उम्मीद बंधी है। उम्मीद है कि इससे राज्य के लोग दर्शन के लिए पहुंचेंगे। इससे स्थानीय अर्थ व्यवस्था थोड़ी बहुत सुधरेगी।

Top Story:अनूप-सुखबीर क्यों आएंगे! OP को ही मिलेगी नौकरशाही की शीर्ष कुर्सी!

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राधा की प्रतिष्ठा अच्छी लेकिन वरिष्ठता नजर अंदाज करना आसान नहीं

अगले महीने रिटायर हो जाएंगे मुख्य सचिव उत्पल

नौकरशाही में अंदरखाने खामोश लॉबिंग का दौर

Chetan Gurung

सबसे वरिष्ठ और बेदाग नौकरशाह:अनूप वधावन को हमेशा ही मुख्य सचिव के लिए सर्वश्रेष्ठ नाम समझा गया है।

अनूप वधावन उत्तराखंड के वरिष्ठतम नौकरशाह हैं। सुखबीर सिंह संधु को बेहद काबिल और सख्त टास्क मास्टर माना जाता है। दोनों केंद्र सरकार में अहम कुर्सियों पर हैं। दोनों शायद ही अपने मूल काडर उत्तराखंड लौटना चाहेंगे। राधा रतूड़ी अविवादित और अच्छी प्रतिष्ठा वाली हैं। यहीं हैं। फिर भी अगले महीने ओमप्रकाश को नौकरशाहों की किसी भी प्रदेश में सर्वोच्च कुर्सी (मुख्य सचिव) पर बैठने से रोक पाना नामुमकिन सा दिखता है। दरअसल, उत्पल कुमार सिंह सेवा विस्तार नहीं मिलता है तो अगले महीने मुख्य सचिव की कुर्सी से रिटायर हो जाएंगे। अंदरखाने उनके उत्तराधिकारी को ले के कूटनीति-संशय का दौर चल रहा है।

ओपी का दावा खारिज कर राधा रतूड़ी को CS बना पाएंगे CM त्रिवेन्द्र?

ओमप्रकाश को अगर कोई रोकने की ताकत रखते हैं तो वह सिर्फ वधावन हैं। 1985 बैच वाले हैं। जबर्दस्त प्रतिष्ठा वाले हैं। 2010 के कुंभ मेले में विवाद खूब हुए, लेकिन उन पर अंगुली किसी ने भी निजी तौर पर नहीं उठाई। आज वह केंद्र में वाणिज्य सचिव हैं। उनकी नौकरी अभी एक साल बची है। वह विवादों से दूर रहने वाले शख्स हैं। उत्तराखंड के मौजूदा हालात और नौकरशाही में द्वंद्व ऐसे हैं कि वह शायद ही आना चाहेंगे। फिर केन्द्र सरकार में जब इतनी अहम कुर्सी मिली हो तो फिर आखिरी साल में कोई मूल काडर में शायद ही लौटना चाहे। भले कुर्सी मुख्य सचिव की हो। एक बात और है। उनसे जूनियर रामास्वामी-उत्पल के मुख्य सचिव बनने के बाद उनके लिए अब इस कुर्सी में आकर्षण खत्म ही है।

केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति वाले सुखबीर सिंह संधु को भी CS के लिए मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

संधु 1988 बैच वाले हैं। ओमप्रकाश (1987) से एक बैच जूनियर। इसके साथ ही उत्तराखंड में नौकरशाहों की एक लॉबी उनको शीर्ष कुर्सी पर देखने को राजी नहीं है। उनके साथ एक भारी दिक्कत है। राधा रतूड़ी भी उनके बैच की हैं, लेकिन सिविल लिस्ट में ऊपर हैं। इसका मतलब ये हुआ कि सुखबीर को मुख्य सचिव बनाने की सूरत में ओपी और राधा को शासन के सिस्टम से बाहर करना पड़ेगा। जूनियर के मुख्य सचिव बनने पर सीनियर सिस्टम से बाहर हो जाते हैं। उनको जूनियर के आधीन नहीं रखा जाता है।

राधा के मुख्य सचिव बनने की सूरत में फिर संधु ही नहीं ओपी भी यूं ही सेवा से विदा हो जाएंगे। राधा 2024 में रिटायर होंगी। ओपी 2022 और संधु 2023 में। ओपी सिर्फ मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के करीबी और विश्वासपात्र नहीं हैं। काँग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के भी वह नज़दीकियों में शामिल हैं। ओमप्रकाश पर हाल ही में अमनमणि त्रिपाठी को लॉक डाउन के दौरान परिवार सहित पास जारी करने के आरोप लगे। फिर भी काँग्रेस की खामोशी की एक वजह ये रिश्ते भी थे।

त्रिवेन्द्र भी अपने इतने सालों के टेस्टेड और विश्वासपात्र नौकरशाह को उनके सेवा काल के अहम मोड़ पर शायद ही इतना बड़ा झटका देना पसंद करेंगे।

ये जरूर है कि ओपी को ले के उनमें हिचक झलकती है कि उनको मुख्य सचिव कैसे बनाया जाए। ऐसा न होता तो उत्पल को मुख्य सचिव के तौर पर इतना लंबा कार्यकाल कभी न मिल पाता। उत्पल उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष की कुर्सी पर कभी के जा चुके होते। उनमें मुख्य सचिव की कुर्सी को ले के बहुत अधिक ललक अब दिखाई भी नहीं देती। ओपी आज उस मोड़ पर हैं, जिस पर कभी राकेश शर्मा ACS होने के दौरान थे। शर्मा की खासियत उनका सभी को संतुष्ट करना, पहाड़ से विशेष प्रेम और उत्तराखंड के बारे में भरपूर ज्ञान, नतीजा देने के लिए ख्याति रखना और तेज-तर्रार कार्य शैली थी।

उनको ले के तब के मुख्यमंत्री हरीश रावत शुरू में कुछ हिचके। राकेश ने अपने कार्ड चले। जल्दी ही मीडिया में वही छाने लगे। ये उनका अंदाज था। सभी को प्रभावित करने और जीतने की। हरीश को उन्हें CS बनाने में फिर कोई दिक्कत नहीं हुई। ओपी इस मोर्चे पर कमजोर हैं। वह एकांतवासी और खामोशी से काम करने वाली प्रतिष्ठा रखते हैं। उनको ले के कहा जाता है कि नौकरशाहों की खास लॉबी उनकी सरपरस्ती में आगे बढ़ रही है। ये लॉबी उत्तराखंड और अन्य लॉबी पर वर्चस्व स्थापित कर चुकी है। खास तौर पर महकमों के बँटवारों को ले के ये आरोप खूब उछल रहे हैं।

ये बात अलग है कि महकमों का बंटवारा करने का हक मुख्यमंत्री के पास है। फिर भी ये आरोप उनके लिए अच्छे नहीं कहे जा सकते हैं। उत्तराखंड और अन्य मूल के नौकरशाहों की लॉबी वधावन या फिर राधा को शीर्ष कुर्सी पर देखना चाह रही है। वे इसके लिए भीतर ही भीतर महौल भी बना रहे हैं। राधा पर उनका दांव अधिक दिखता है। ओपी लॉबी भी पासा उल्टा नहीं पड़ने देना चाह रही। इस लॉबी के नौकरशाह जानते हैं। ये बाजी हार गए तो मोर्चों पर जमे रहना उनके लिए बहुत मुश्किल होगा।

राधा के साथ एक पेंच है। उनको मुख्य सचिव बनाया जाता है तो फिर उनके पति अनिल रतूड़ी को DGP की कुर्सी छोड़नी पड़ सकती है। पति-पत्नी को IPS-IAS की शीर्ष कुर्सी पर एक साथ कभी नहीं बिठाया जाता है। रतूड़ी इसी साल दिसंबर में रिटायर हो रहे हैं। अगर-मगर इतने सारे हैं, लेकिन ओपी की ताजपोशी की तैयारी एक किस्म से शुरू दिखती भी है। PWD सरीखा मलाईदार महकमा उनका छोड़ देना और आरके सुधांशु को दिया जाना इसकी मिसाल है।

जब राधा को मुख्यमंत्री का ACS बनाया गया था, तब लग रहा था कि ओपी जल्द ही मुख्य सचिव बनेंगे। ओपी पहले से ही CM के ACS थे। बाद में सरकार को शायद हालात माकूल नहीं लगे। तभी वह इतना अहम कदम उठाने से हिचक गई। फिलहाल, कुछ दिन इंतजार करने के सिवाय कुछ विकल्प नहीं है। त्रिवेन्द्र अपने फैसलों की भनक किसी को भी नहीं लगने देते हैं। एक अहम पहलू ये भी है कि मुख्यमंत्री की टीम में भी दो लॉबी होती जा रही है।

इसमें एक लॉबी उत्तराखंड मूल वालों की है। वे मुख्यमंत्री की छवि-प्रतिष्ठा का ख्याल विशेष रूप से रखने का काम अपने स्तर पर कर रहे हैं। उनकी कोशिश है कि खास क्षेत्र के लोगों के प्रभाव में घिरे सीएम की छवि को तोड़ने की जल्द से जल्द कोशिश की जाए। इसमें शक नहीं कि पौन दो साल बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में ये मुद्दे अहम और फैसलाकून साबित हो सकते हैं।

रसूख रामदेव का:कोरोना दवा की बिक्री पर उत्तराखंड में रोक नहीं

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स्वास्थ्य-आयुष महकमा इस बारे में फिलहाल कन्नी काट रहे

NIMS ने हाथ खींचे:सिर्फ 100 लक्षणविहीन केसों पर किया था परीक्षण

Chetan Gurung

इसको बाबा रामदेव का त्रिवेन्द्र सरकार पर गहरा रसूख कह सकते हैं। देश-दुनिया में पतंजलि की महामारी कोरोना ठीक करने संबंधी विवादित खोज Coronil दवा को ले कर बवाल है। अन्य राज्यों ने इसकी बिक्री पर रोक लगाना शुरू कर दिया है। जिस राज्य उत्तराखंड में इसकी खोज हुई और निर्माण हुआ, वहाँ फिलहाल इसकी बिक्री पर रोक का कोई विचार नहीं है। स्वास्थ्य सचिव और आयुष सचिव का इस बारे में `Newsspace’ से एक जैसा कहना है, `इस बारे में फिलहाल कोई फैसला अभी नहीं किया गया है’।

कोरोनिल को ले कर दिलचस्प पहलू ये है कि NIMS जयपुर ने विवाद भड़कने के बाद अब कह दिया है कि उसके अस्पताल में सिर्फ 100 और बिना लक्षण वालों पर ही इसका परीक्षण किया गया था। मेरठ-गाजियाबाद में जो परीक्षण हुए हैं, उसके बारे में वह कुछ नहीं जानता है। NIMS के साथ मिल के ही पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट ने कोरोना दावा ईजाद की है।

कोरोनिल को ले के बवाल इसलिए भी है कि खुद केन्द्रीय और राज्य आयुष मंत्रालय ने कहा कि कोरोना के ईलाज के नाम से दवा बनाने की अनुमति ली ही नहीं गई है। सिर्फ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की दवा बनाने की मंजूरी ली। महाराष्ट्र और NIMS जिस राजस्थान में है, वहाँ भी इस दवा की बिक्री पर सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया है, लेकिन उत्तराखंड सरकार की हिम्मत नहीं हो रही कि वह भी कुछ सख्त कदम इस बारे में उठा ले।

स्वास्थ्य सचिव अमित सिंह नेगी ने कहा कि इस बारे में आयुष मंत्रालय ही फैसला कर सकता है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकार और कार्य क्षेत्र से ये बाहर है। आयुष सचिव दिलीप जावलकर ने कहा कि इस बारे में पूरी रिपोर्ट का इंतजार करने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। दोनों सचिवों के जवाब का लब्बो-लुआब यही है कि दवा अगर उत्तराखंड में बेची जाती है, तो उस पर अभी कोई रोक नहीं है।

राज्य सरकार पतंजलि पर ऐसी कोई कार्रवाई भी नहीं कर पा रही है, जिससे ये लगे कि पतंजलि पर उसको अंधेरे में रखने के लिए दंडित ही किया जा सके। उत्तराखंड सरकार से उसने कोरोना की दवा के निर्माण के बारे में मंजूरी ली ही नहीं गई। इसकी संभावना है भी नहीं कि पतंजलि या फिर रामदेव और कंपनी के सीईओ आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ राज्य सरकार कुछ कार्रवाई करेगी।

बीजेपी ने जब भी उत्तराखंड में राज किया, रामदेव-बालकृष्ण-पतंजलि को हमेशा पूरी मदद सरकार से मिली। ये बात दीगर है कि कभी बालकृष्ण फर्जी पासपोर्ट-शैक्षिक दस्तावेज़ मामले में तो कभी रामदेव-पतंजलि श्रम क़ानूनों के उल्लंघन, दवाओं के निर्माण में विवादित साल्ट मिलाने और खुल के काँग्रेस का विरोध व बीजेपी का समर्थन करने को ले के विवादों में रहे हैं।

दो महीने पहले त्रिवेन्द्र सरकार के बोर्डिंग स्कूलों को खोलने के आदेश के पीछे भी माना गया कि रामदेव के स्कूल आचार्यकुलम को खोलने के लिए ये फैसला किया गया। रामदेव और पतंजलि के कोरोना दवाई को ले कर विवाद भड़कने और NIMS के बैक आउट करने के बाद अब दोनों के सुर भी बदले हुए से हैं। वे इस विवाद के लिए बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियों की साजिश की ओर इशारा कर रहे हैं। साथ ही ये भी कह रहे हैं कि उनकी बातों को तोड़-मरोड़ कर मीडिया पेश कर रहा है।  

शनिवार-इतवार की बंदी CM त्रिवेन्द्र ने कर दी खत्म: देर से सही पर बुद्धिमानी भरा फैसला

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सरकार के इस कदम से करोड़ों की GST-कारोबार का बचेगा नुक्सान

बाजार भी रात 8 बजे तक खुलेंगे

मॉर्निंग वॉक-जॉगिंग को भी 5 बजे से मंजूरी

`Newsspace’ ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था

Chetan Gurung

देर आए लेकिन दुरुस्त आए। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने देहरादून में हर शनिवार-इतवार को हो रही पूर्ण बंदी (लॉक डाउन) को खत्म कर दिया। फैसला अगले शनिवार से लागू होगा। इस फैसले से सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुक्सान बचेगा। सरकारी-निजी दफ्तरों में अहम कामकाज होंगे। लगातार करोड़ों का झटका सह रहा कारोबार भी अब राहत की सांस लेगा। कारोबारी सरकार के इस फैसले से बेहद खुश हैं। एक और अहम फैसला उन्होंने मॉर्निंग वॉक पर सख्त रोक को हटाने का लिया। `Newsspace’ ने तमाम बुद्धिजीवियों-कारोबारियों-पूर्व आला नौकरशाहों से बात करने के बाद इतवार-शनिवार की बंदी से हो रहे नुक्सान और इसके कुप्रभाव पर स्टोरी की थी। वॉक पर रोक को ले कर भी स्टोरी की थी।

CM त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने आज अहम फैसला करते हुए देहरादून में हर शनिवार-इतवार के लॉक डाउन को खत्म कर दिया।

इससे पहले सरकार के Odd-Even गाड़ियों के अजीबोगरीब फैसले पर भी `Newsspace’ ने ही स्टोरी की थी कि गाड़ियों से दूसरी गाड़ी में वाइरस फैलने की कोई मिसाल नहीं है। सरकार ने उस फैसले को भी वापिस लिया था। त्रिवेन्द्र के इस गुण की तारीफ की जा सकती है कि अच्छे सुझावों पर अमल में वह झिझकते नहीं हैं। भले वह किसी की तरफ से भी आए।

उन्होंने मिल रहे फीड बैक को भी हालांकि आधार बनाया होगा लेकिन उनका देहरादून में अगले शनिवार-इतवार से बाजार और शहर खोलने का फैसला निश्चित रूप से बुद्धिमानी भरा फैसला कहा जाएगा। उन्होंने आज बैठक में अफसरों को इस बाबत निर्देश दिए। ये भी कहा गया कि सामान्य परिस्थितियों में बाजारों में जो साप्ताहिक अवकाश रहता है, वह रहेगा।  बाजार और दफ्तरों के बंद रहने से सिर्फ कारोबारियों को निजी तौर पर नुक्सान नहीं हो रहा था।

कारोबार ठप्प होने से सरकार को करोड़ों की GST का नुक्सान महीने में 8 दिन की बंदी से हो रहा था। कोरोना संकट काल में जब सरकार एक-एक पाई को तरस रही और खजाना तेजी से खाली हो रहा, कैश का संकट है, तो बंदी के कारण हो रहे राजस्व घाटे को बर्दाश्त करना कहीं से भी बुद्धिमानी भरा फैसला नहीं था। लॉक डाउन से कोरोना तो नियंत्रित हो नहीं रहा, ऐसे में अर्थ व्यवस्था बचाना अधिक बेहतर कदम कहा जाएगा। वीकेंड का लॉक डाउन खत्म करने के साथ ही मुख्यमंत्री ने बाज़ारों को रात 8 बजे तक खोलने के निर्देश भी दिए।

ये भी निर्देश दिए कि लोगों को सुबह 5 बजे से सैर-जॉगिंग की अनुमति दी जाए। मुख्यमंत्री ने इन अहम फैसलों के साथ ही ये भी कहा कि राज्य में कोरोना पॉज़िटिव की रिकवरी रेट में तेजी से सुधार हुआ है। सभी जिलाधिकारियों एवं स्वास्थ्य विभाग को सतर्कता एवं सुरक्षात्मक दृष्टि से कार्य करने को कहा गया है। प्रदेश में अब 1700 से अधिक टेस्ट प्रतिदिन हो रहे हैं। सोमवार से मुक्तेश्वर में भी कोरोना की टेस्टिंग शुरू हो जायेगी। यहां पर प्रतिदिन 100 टेस्ट होंगे। उन्होंने सचिवालय में कोविड-19 एवं डेंगू के रोकथाम एवं बचाव के लिए सभी जिलाधिकारियों से वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से बैठक की।

त्रिवेन्द्र ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि डेंगू से बचाव के लिए व्यापक स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाया जाय। स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाय। ठोस रणनीति बनायी जाय। अस्पतालों में प्लेटलेट्स की पर्याप्त उपलब्धता हो। नगर निकायों द्वारा समय-समय पर फोगिंग की जाए। डेंगू से बचाव में रोकथाम के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार हो। इसके लिए डॉक्टर समय-समय पर मीडिया से समन्वय स्थापित करे। सप्ताह में एक दिन व्यापक स्तर पर स्वच्छता अभियान चलाया जाय। 

बरसात के मौसम के मद्देनजर पेयजल व्यवस्था की ओर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी उन्होंने दिए। मुख्यमंत्री ने Covid-19 से जुड़े कार्यों के बारे में देहरादून की तारीफ की। सर्विलांस सिस्टम को और अधिक मजबूत करने पर बल दिया। होम क्वारंटीन एवं एवं होम आईसोलेशन की लगातार निगरानी पर ज़ोर देते हुए कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाए।

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