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कॉकरोच जनता पार्टी की वेबसाइट ब्लॉक, संस्थापक अभिजीत दिपके ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप…


इंटरनेट से हटाई गई वायरल वेबसाइट, सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस

इंटरनेट पर तेजी से लोकप्रिय हुई “कॉकरोच जनता पार्टी” की चर्चित वेबसाइट शनिवार को अचानक ब्लॉक कर दी गई। इस बात की पुष्टि पार्टी के संस्थापक Abhijeet Dipke ने खुद की। वेबसाइट हटने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है और कई यूजर्स इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं।

अभिजीत दिपके ने भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए इसे “तानाशाही रवैया” बताया। उन्होंने दावा किया कि उनकी वेबसाइट पर करीब 10 लाख लोगों ने सदस्य के रूप में साइन अप किया था।

युवाओं के बीच तेजी से वायरल हुआ डिजिटल अभियान

कॉकरोच जनता पार्टी कोई पारंपरिक राजनीतिक संगठन नहीं था, बल्कि यह एक डिजिटल व्यंग्य अभियान के रूप में सामने आया था। खासकर मिलेनियल्स और जेन-जी सोशल मीडिया यूजर्स के बीच यह प्लेटफॉर्म बेहद लोकप्रिय हो गया था। मीम्स, कटाक्ष और राजनीतिक व्यंग्य के जरिए यह मंच मौजूदा व्यवस्था और सरकारी नीतियों पर सवाल उठाने का माध्यम बन गया था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसके कंटेंट को लाखों लोगों ने शेयर किया।

NEET-UG विवाद के बीच बढ़ी चर्चा

यह पूरा मामला कथित NEET-UG पेपर लीक विवाद के दौरान और ज्यादा चर्चा में आया। देशभर में मेडिकल छात्रों के विरोध के बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। दिपके का दावा है कि उनकी वेबसाइट के करीब 6 लाख सदस्यों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan के इस्तीफे की मांग वाली ऑनलाइन पिटीशन पर हस्ताक्षर किए थे।

“सरकार कॉकरोचों से इतना क्यों डरती है?

वेबसाइट हटने के बाद अभिजीत दिपके ने X पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा—

“सरकार ने हमारी आइकॉनिक वेबसाइट हटा दी। 10 लाख कॉकरोच हमारी वेबसाइट से जुड़े थे। 6 लाख लोगों ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग वाली याचिका पर हस्ताक्षर किए थे।” उन्होंने आगे कहा कि सरकार का यह रवैया युवाओं को और ज्यादा जागरूक कर रहा है।

कैसे शुरू हुआ “कॉकरोच जनता पार्टी” ट्रेंड?

कॉकरोच जनता पार्टी का नाम पहली बार तब वायरल हुआ था, जब एक कानूनी मामले की सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की कथित टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद शुरू हुआ। इसके बाद यह ऑनलाइन ट्रेंड धीरे-धीरे एक बड़े डिजिटल मूवमेंट में बदल गया, जिसमें हास्य, व्यंग्य और सत्ता-विरोधी कंटेंट प्रमुख रूप से शामिल रहा। खासकर युवाओं ने इसे सोशल मीडिया पर जमकर समर्थन दिया।

सोशल मीडिया पर दो हिस्सों में बंटे लोग

वेबसाइट ब्लॉक होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी बंटी हुई नजर आ रही हैं। एक वर्ग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बता रहा है, जबकि दूसरा वर्ग इसे केवल एक वायरल इंटरनेट ट्रेंड मान रहा है। हालांकि फिलहाल वेबसाइट हटाने को लेकर सरकार या संबंधित एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

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