
उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने आज अपने व्यस्त और निर्धारित कार्यक्रमों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेहद लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 134वें संस्करण को सुना। उन्होंने प्रधानमंत्री के इस संबोधन को देशवासियों को जोड़ने और राष्ट्रहित में काम करने का एक सशक्त माध्यम बताया।
PM मोदी के संबोधन के मुख्य बिंदु: संस्कृति से लेकर पर्यावरण तक
इस बार के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश और समाज से जुड़े कई गंभीर और प्रेरणादायी विषयों को जनता के सामने रखा। कार्यक्रम के दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दों पर चर्चा की गई भीषण गर्मी और स्वास्थ्य सुरक्षा: देश के कई हिस्सों में पड़ रही रिकॉर्ड तोड़ गर्मी को देखते हुए प्रधानमंत्री ने आम जनता से स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतने की अपील की। सांस्कृतिक विरासत की घर वापसी: पीएम ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जिक्र करते हुए चोलकाल की ऐतिहासिक ताम्र पट्टिकाओं की स्वदेश वापसी और प्राचीन धरोहरों के संरक्षण पर गर्व व्यक्त किया।
विज्ञान और पर्यावरण: खगोल विज्ञान (Astronomy) की तरफ देश के युवाओं के बढ़ते रुझान की सराहना की गई। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण, गंगा डॉल्फिन के संवर्धन और जल संरक्षण के लिए समाज द्वारा किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित किया गया।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी का बयान: “जनभागीदारी का सबसे बड़ा उदाहरण”
प्रधानमंत्री का संबोधन सुनने के बाद कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ केवल एक रेडियो कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह देशवासियों में सकारात्मक सोच और जनभागीदारी की भावना फूंकने का एक आंदोलन बन चुका है। “हर बार की तरह इस बार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने समाज के विभिन्न प्रेरक उदाहरणों के माध्यम से देश के हर वर्ग को राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया है। उनके द्वारा उठाए गए विषय न केवल समाज को जागरूक करते हैं, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत, पर्यावरण और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति नागरिकों को संवेदनशील भी बनाते हैं।”
गणेश जोशी (कैबिनेट मंत्री, उत्तराखंड समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान का आह्वान कैबिनेट मंत्री ने प्रदेशवासियों और कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि हम सभी को प्रधानमंत्री के इस आह्वान से सीख लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को बचाने, पानी का सदुपयोग करने और अपनी प्राचीन विरासतों का सम्मान करने की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक की है। हमें अपनी दिनचर्या में इन प्रेरणादायी बातों को शामिल कर समाज और राष्ट्र के विकास में अपना गिलहरी योगदान सुनिश्चित करना चाहिए।



