
हरिद्वार वन प्रभाग में बाघ के शिकार (टाइगर पोचिंग) का एक बेहद गंभीर मामला सामने आने के बाद वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग में हड़कंप मच गया है। इस घटना से सबक लेते हुए विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (CTR) में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। वन्यजीवों की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए कॉर्बेट प्रशासन ने उत्तर प्रदेश से सटे सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा घेरा कड़ा कर दिया है और एक विशेष निगरानी अभियान की शुरुआत की है।
अगले 15 दिन बेहद संवेदनशील, चलेगा ‘ब्लैक मार्च’
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक, अगले 15 दिनों तक पूरे रिजर्व क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को सामान्य से कई गुना बढ़ा दिया गया है। इस दौरान गश्त (पेट्रोलिंग), खुफिया तंत्र (इंटेलिजेंस) और चौतरफा निगरानी को तेज किया जाएगा। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे संवेदनशील इलाकों में ‘लॉन्ग रेंज पेट्रोलिंग’ और ‘ब्लैक मार्च’ जैसे कड़े सुरक्षा अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि शिकारियों के किसी भी मंसूबे को नाकाम किया जा सके।
बॉर्डर पर कड़ी निगरानी, संदिग्धों पर पैनी नज़र
“हरिद्वार वन प्रभाग में बाघ के शिकार की गंभीर घटना के बाद हम कोई रिस्क नहीं ले सकते। पूरे कॉर्बेट क्षेत्र को अलर्ट पर रखा गया है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के इंटरस्टेट बॉर्डर (अंतरराज्यीय सीमा) पर वन विभाग की टीमें दिन-रात मुस्तैद हैं। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या व्यक्ति के दिखने पर तुरंत और सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
स्टाफ की छुट्टियां रद्द, रात के अंधेरे में भी कड़ा पहरा
बाघों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कॉर्बेट प्रशासन ने कुछ बेहद कड़े कदम उठाए हैं, नाइट पेट्रोलिंग पर जोर: रात के समय होने वाली अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए रात्री गश्त को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत कर दिया गया है।SOG एक्टिव मोड में: स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) को पूरी तरह से एक्टिव कर दिया गया है, जो पल-पल की स्थिति पर नजर रख रहा है।
छुट्टियों पर रोक:
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सभी रेंज अधिकारियों, एएफओ (AFO) और फील्ड स्टाफ की छुट्टियों पर फिलहाल पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। वन विभाग ने साफ कर दिया है कि वन्यजीवों की सुरक्षा उनकी सबसे पहली प्राथमिकता है और रिजर्व क्षेत्र के आसपास किसी भी तरह की संदिग्ध या अवैध गतिविधि को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



